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वन मंडल में फिर शुरू हुआ फर्जी भुगतान का खेल…!

0 जिन मामलों की जांच पूरी नहीं, उनका भुगतान के लिए लग रही कतार
0 स्टापडेम निर्माण मेंं खूब हुआ वारा-न्यारा, जांच के नाम पर लीपापोती
कोरबा-कटघोरा। कोरबा जिले का कटघोरा वन मंडल एक बार फिर फर्जी भुगतान की राह पर चल पड़ा है। चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति 31 मार्च को हो जाएगी और इससे पहले सेटलमेंट के जरिए पुराने बिलों का भुगतान के साथ-साथ आधे-अधूरे कार्यों का पूरा भुगतान प्राप्त करने से लेकर फर्जी मजदूरों के नाम की राशि निकालने के लिये तैयारी कर ली गई है। विभाग के बड़े अधिकारी जो न सिर्फ कटघोरा वनमंडल बल्कि पड़ोसी जिले में पदस्थापना के दौरान किये गये भ्रष्ट कारनामों के कारण काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं, के इशारे पर फर्जी बिलों को लगाकर भुगतान का खेल खेला जा रहा है।
कटघोरा वन मंडल में जटगा वन परिक्षेत्र भ्रष्टाचार के मामले में काफी सुर्खियों में रहा। यहां पुटुवा स्टापडेम, सोढ़ीनाला, टेढ़ीनाला पर स्टापडेम निर्माण से लेकर त्रिकुटी पहाड़ पर 6 स्टापडेम का निर्माण में गड़बडिय़ां और अधूरा कार्य से लेकर कार्य प्रारंभ हुए बगैर की भुगतान का मामला समाचारों की सुर्खियां बनता रहा। जंगल के भीतर तालाबों के निर्माण में भी भारी भ्रष्टाचार हुआ है। रेंजर प्रद्युम्न सिंह तंवर के द्वारा कुटेशरनगोई में तालाब खुदाई के लिये करतला ब्लॉक से मजदूरों को ले जाकर मजदूरी कराने और अपने ही परिवार तथा परिचितों के नाम से इन्हें मजदूर बताकर 12 लाख रुपए से अधिक की राशि का भुगतान कराने का मामला आज भी कार्रवाई के मामले में लंबित है और रिकव्हरी शेष है। रेंजर मृत्युंजय शर्मा पर करोड़ों की रिकवरी व एफआईआर लंबित है। आधे-अधूरे और बिना हुए कार्यों का फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराने की कवायदों के बीच यह बात भी सामने आई है कि कार्य हुए बिना ही मजदूरों का भुगतान पहले ही कर दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि वर्ष-2017-18, वर्ष 2018-19 और वर्ष 2019-20, इन तीन वर्षों के कार्यों का भुगतान में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल विभाग के इस अधिकारी के शह व संरक्षण में खेला जा रहा है। बताते चलें कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में जहां पूरे प्रदेश में एकमात्र कटघोरा वनमंडल भ्रष्टाचार और कमिशनखोरी के मामले में सुर्खियां बटोरता रहा और सप्लायर तथा ठेकेदार को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ गई वहीं सत्ता बदलने के बाद भी कटघोरा वनमंडल में आने वाले संबंधित अधिकारी की कार्यशैली से न सिर्फ विभागीय कर्मी बल्कि ठेकेदार व सप्लायर परेशान हैं, इसकी वजह से मौजूदा सरकार की छवि भी कहीं न कहीं धूमिल हो रही है।

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