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KORBA:बिना काम के वर्षों से तनख्वाह उठा रहीं रेडियोग्राफर

0 जिला प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर लेखापाल से सांठगांठ कर चल रहा भर्राशाही का खेल

कोरबा। प्रशासन के नाक के नीचे प्रशासन के ही  शासकीय कर्मचारी शासन के खजाने को लगभग 12  वर्षों से चूना लगा रहें है। इस भृष्टाचार पर सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी मिली उस जानकारी में कई ऐसे तथ्य सामने आए जो काफी चौकाने वाले हैं। इस सनसनीखेज मामले से रूबरू कराते हैं।

ताजा मामला कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 42 किलोमीटर दूर शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोंडी उपरोड़ा का है जहां रेडियोग्राफर पद पर पदस्थ सालों से अस्पताल का मुख तक नहीं देखी है लेकिन हर महीने तनख्वाह लेने में पीछे नहीं रहती। स्थानीय सूत्र के मुताबिक अस्पताल के कुछ कर्मचारी नाम ना बताने की शर्त और दबी जुबान से बताते हैं कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मैडम बाकायदा एक ट्रेनी लड़के को अपनी जगह तैनात कर दी है, अब यहां बड़ा प्रश्न यह खड़ा होता है कि जिस एक्सरे विभाग में मरीज अपनी सही स्थिति जानने आता है वहां का टेक्नीशियन ना तो शासकीय कर्मचारी है और ना ही संविदा कर्मचारी है। लेकिन इन सबसे कोई सरोकार नहीं है वह तो महीने के आखिर में एक दिन प्रकट होकर पूरा हाजिरी लगाकर शासन को कई वर्षों से चूना लगा रही है। इन सब कृत्य में अस्पताल प्रबंधन के कुछ कर्मचारियों के साथ गांठ होने की भी जानकारी मिल रही है जिसमें मुख्य रूप से लेखापाल हबीब खान की संलिप्तता साफ नजर आ रही है, जो हर महीने मैडम को वेतन बनाकर देते आ रहे हैं।

बता दे लेखापाल हबीब खान भी यहा कई सालो से पोंडी उपरोडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जमे हुए है और शासन प्रशासन से आंख मिचौली का खेल लगभग 12 वर्षों से भी अधिक से जारी है, इस खेल में लाखों रुपए का दोनों कर्मचारी मिलकर शासन के कोषालय को चुना लगाते आ रहे हैं।

बीएमओ का दावा कि सहायक रेडियोग्राफर शासकीय कर्मचारी.

जब इस विषय पर पोंडी उपरोडा के खंड चिकित्सा अधिकारी दीपक सिंह कंवर से जानकारी ली गई तो सबसे पहले तो उन्हें अपने मातहत कर्मचारी का नाम तक याद नही आया जब उन्हें नाम बताया गया तो उनका कहना है कि मैडम आती तो हैं लेकिन स्वास्थ्य खराब होने की वजह से कभी कभी नहीं आती है। उनकी जगह उनका सहायक  कर्मचारी ( असिस्टेन्ट ) वरुण कुमार उपस्थित रहता है और वरुण कुमार की नियुक्ति किस आधार पर हुई तो उन्होंने बताया कि वो भी शासकीय कर्मचारी है उसका वेतन शासन द्वारा किया जाता है। लेकिन सूचना के अधिकार में चाही गई जानकारी में उपस्थिति पंजीयक में कहीं पर भी वरुण कुमार का नाम अंकित नहीं है और न ही नियमित शासकीय कर्मचारियों की सूची में और न ही संविदा नियुक्त कर्मचारियों में। अब सवाल यहां यह उठ रहा है कि आखिर मैडम की उपस्थिति को लेकर खण्ड चिकित्सा अधिकारी ने ऐसा क्यों कहा?

रेडियोग्राफर भूल जाती है कि रविवार व छुट्टियों में हाजिरी नही लगती

सूचना के अधिकार से मिली जानकारी में कई ऐसे तथ्य सामने आए जो काफी चौकाने वाले हैं। रेडियोग्राफर का नाम उपस्थिति पंजीयक में वरिष्टता सूची में सबसे आखरी में नाम दर्ज रहता है और माह के आखिरी दिनों में आकर हाजिरी रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आती हैं लेकिन हस्ताक्षर करने की लय में यह भूल जाती हैं कि रविवार व अन्य त्योहारिक छुट्टियां भी होती है वो लगातार 1 तारीख से लेकर 30 तारीख तक अपनी उस्थिति दर्ज कर हस्ताक्षर करती है। कहीं कहीं पर उपस्थिति रजिस्टर में आखिरी नाम दर्ज होने के बाद क्रॉस किये गए लाइन के ऊपर ही उपस्थिति दर्ज की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना नहीं देखा कभी

जब इस विषय पर पोंडी उपरोडा स्वास्थ्य केंद्र के आसपास के स्थानीय लोगों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि यहाँ के अस्पताल में एक्सरे (रेडियोग्राफर ) में कोई मैडम तो हैं लेकिन हमने उन्हें कभी देखा नहीं है। जब भी अस्पताल जाते हैं तो वहां एक लड़का है जो एक्सरे करता है। स्थानीय जनप्रतिनिधि व जीवन दीप समिति के पूर्व सदस्य अशोक मिश्रा ने बताया कि यह जानकारी तो है कि यहां कोई मेडम रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ है लेकिन हमने आज नही देखा है उन्हें। एक लड़का है जो एक्सरे का काम करता है। जीवन दीप समिति के द्वारा मेरे रहते तो यहां कोई रेडियोग्राफर सहायक की नियुक्ति नही की गई है।

एक तरफ जहां सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की सरकार प्रदेश में बनी है,उसके बाद से ही प्रदेश के मुखिया भ्रष्टाचारियों पर सख्त नजर आ रहे हैं और कई बड़ी कार्यवाहियां भी राज्य में हो रही है। अब देखने वाली बात होगी कि इस अस्पताल का काला खेल उजागर होने के बाद यह खेल कब खत्म होता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है?

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