0 जल संसाधन विभाग का मामला, अब कलेक्टर से गुहार
कोरबा-पाली। जिस विभाग की बुनियाद मजबूत करने में एक कर्मचारी ने अपनी जिंदगी के वर्षो झोंक दिए, आज वही विभाग उनके रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए 14 माह से तरसा रहा है। उन्हें 14 माह बाद भी पेंशन की रकम न मिल पाना, विभागीय अनदेखी को दर्शाता है।
मामला जल संसाधन उपसंभाग पाली का है, जहाँ जून 2025 में सेवानिवृत्त हुए स्थल सहायक मुरारी लाल डिक्सेना सिस्टम की मनमानी और बाबूशाही का शिकार हुए हैं। हर सरकारी अधिकारी और अधीनस्थ को यह ज्ञात है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन ही परिवार के जीवन यापन का सहारा होता है और स्वत्वों का भुगतान उसके अन्य कार्यों में काम आता है। जरूरी होता है कि रिटायरमेंट से पहले कर्मी की फाइल चलनी चाहिए और रिटायर होने के अगले महीने से उसे बिना दिक्कत पेंशन शुरू हो जाय,पर हकीकत में यह विरले ही होता है।
सिस्टम की बेरुखी की मार झेल रहे मुरारी लाल को सेवानिवृत्ति के 14 महीने बीत जाने के बाद भी न पेंशन मिली, न DPF (GPF) और न ही समयमान वेतनमान का एरियर्स। अपना हक पाने के लिए यह बुजुर्ग पूर्व कर्मचारी आज दफ्तरों के चौखट पर माथा टेकने को मजबूर है। जो हाथ कल तक विभागीय फाईलों को ईमानदारी से आगे बढ़ाते थे, आज वे अपनी ही जमापूँजी के लिए अफसरों और क्लर्कों के आगे गिड़गिड़ा रहे हैं। यदि फाइल रुकने का कोई कारण हो तो,वह भी मुरारी लाल को नहीं पता।
फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे उन लोगों को शायद यह गुमान नहीं कि वक्त का पहिया सभी सरकारी सेवक को एक दिन उसी मोड़ पर खड़ा करता है। कल उन्हें भी इसी सिस्टम के थपेड़े सहने होंगे। शिक्षित लोगों की इस प्रशासनिक व्यवस्था में आखिर पेंशनरों के लिए इंसानियत कहाँ मर जाती है? अपने विभाग से थक-हार कर पीड़ित ने अब कलेक्टर दफ्तर का दरवाजा खटखटाया है। अब न्याय मिलने,पेंशन के साथ स्वत्वों का भुगतान होने के अलावा सवाल है कि क्या जिला प्रशासन इन लापरवाह बाबुओं पर कार्रवाई की गाज़ भी गिराएगा…?





