कोरबा-कटघोरा। गुरुवार, 20 अगस्त को कटघोरा नगर पालिका परिषद क्षेत्र स्थित राधासागर तालाब में अचानक चीख-पुकार मच गई। गहरे पानी में लोग डूबते नजर आए और चारों ओर “बचाओ-बचाओ” की आवाजें गूंजने लगीं। स्थिति गंभीर थी, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं थी। कुछ ही देर में बचाव दल मौके पर पहुंचा और डूब रहे लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू शुरू कर दिया।
दरअसल, यह कोई वास्तविक हादसा नहीं, बल्कि बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी। मॉक ड्रिल के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान प्रशासन, नगर सेना, आपदा मित्र और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें किस तरह तत्काल कार्रवाई करते हुए लोगों की जान बचा सकती हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशानुसार जिला आपदा प्रबंधन के संयुक्त तत्वावधान में जिला प्रशासन द्वारा 20 अगस्त को कटघोरा के राधासागर तालाब में बाढ़ बचाव मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, जिला कोरबा के आपदा मित्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आपदा की काल्पनिक स्थिति तैयार कर यह दिखाया गया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में फंसे लोगों तक किस प्रकार पहुंच बनाई जाए, डूब रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य कैसे संचालित किया जाए। इस दौरान आपदा मित्रों ने बचाव एवं राहत कार्यों की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए लोगों को आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी। मॉक ड्रिल का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में प्रशासनिक मशीनरी और बचाव दल की तत्परता, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना रहा। मॉक ड्रिल में प्रशासनिक अधिकारियों एवं नगर सेना के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, जिला कोरबा के जिला प्रशिक्षण आयुक्त (स्काउट) प्रीतमलाल राजवाड़े, कटघोरा ब्लॉक सचिव भूपेन्द्र वर्मा, पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक संयुक्त सचिव मनराखन अगरिया, गाइड कैप्टिन उमेश्वरी राज, नमिता कुर्रे एवं अनीता लकड़ा सहित आपदा मित्र प्रमिला राजवाड़े, पंकज जांगड़े, ऋषि प्रसाद पाठक, कृष्णा पाठक, विकास कुमार, श्याम कुमार, आलेख कुमार, कृष्णा साहू, सुमित सारथी, जागेश्वर अगरिया, दुहन दास महंत, हिमांशु दास एवं आशीष तिर्की मौजूद रहे। मॉक ड्रिल ने यह संदेश भी दिया कि आपदा कभी सूचना देकर नहीं आती, लेकिन उससे निपटने की तैयारी पहले से जरूर की जा सकती है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में इस तरह के अभ्यास बचाव दलों को वास्तविक आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





