👉🏻 मंत्री-विधायक की छवि और साख को बट्टा लगाने में कसर नहीं छोड़ रहे कई सिपहसलार
कोरबा। कोरबा में प्रशासनिक कामकाज में मंत्री-विधायक के खास लोगों का हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि पंचायतों की आबोहवा में राजनीतिक विद्वेष का जहर घुलने लगा है। अपने-अपने खास सचिवों की बड़े और खास पंचायतों में पदस्थापना का खेल खेला जा रहा है। पंचायतों में होने वाले विकास व निर्माण कार्यों का ठेका इनके ही खास लोगों के हाथ में आने के बाद मुड़कर कौन देखता है। जनपदों से लेकर जिला पंचायत तक दबाव और दलाली की नीति हावी है, आवास और मनरेगा शाखा में इतना बोलबाला है कि तमाम उजागर धांधली के बाद भी अनेक अंगद को वहीं पर बनाए और बचाये रखने के लिए सत्ता का संरक्षण लगातार दे रहे हैं।
ताजातरीन मामला ग्राम पंचायत रजगामार और कटबितला का है।
रजगामार पंचायत में जहाँ अपने-अपने हिसाब से शिकायत और जाँच में उलझाकर विकास कार्यो से लेकर जारी होने वाली राशि को बाधित रखा गया है तो वहीं हो चुकी जांच और निष्कर्ष के बाद फिर से राजनीति हावी होने लगी है। मानो यह पंचायत दांव-पेंच दिखाने का अखाड़ा बन गया हो।
👉🏻 दूसरा चर्चित पंचायत कटबितला है जहां एक पूर्व हो चुके सचिव को बिठाने के लिए मंत्री के एक खास ने पूरा जोर लगा दिया। एकतरफा आदेश जिला पंचायत से जारी हुआ और बार-बार टोचन मारकर इसे अमल में लाने का अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जाता रहा। अब यह बड़ा सवाल है कि आखिर सचिव को इसी पंचायत में क्यों जाना है, जहाँ कि वह पहले ही 15 साल पदस्थ रहा। इनको इसी पंचायत से इतना क्या मोह…? क्या वे किसी खास इरादे से इसी पंचायत में दुबारा जमना चाहते हैं, यदि नहीं तो इतने सवालों और विवादों के बीच वे क्यों अपने चलते मंत्री जी का नाम खराब करवाने पर तुले हैं। पंचायत उन्हें फिर से अपने यहाँ सचिव नहीं चाहता,काम करने की तीव्रता को वे दूसरे पंचायत में भी दिखा सकते हैं,फिर विरोध के बावजूद यहीं आने का इरादा तो कुछ नेक नहीं लगता….।







