👉🏻SDM न्यायालय का मामला, बाबू पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप
👉🏻 मिलीभगत कर जमीन हड़पने की साजिश का खुलासा
बिलासपुर। जमीन संबंधी विवादास्पद मामलों में बेजा लाभ पहुंचाने के लिए सांठगांठ और आदेश में मनमानी चलाने का खेल चंद कर्मियों के द्वारा अधिकारी/दण्डाधिकारी के पीठ पीछे खेला जाता है। इसके कारण पीड़ित पक्ष को परेशान होना पड़ता है व उसकी जिंदगी दावों और अपील में गुजरने लगती है, इसका एक ज्वलंत उदाहरण सामने आया है।
SDM न्यायालय बिलासपुर में लंबित एक भूमि अपील प्रकरण में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। खसरा नं. 885/5, मौजा जूना बिलासपुर से जुड़े इस प्रकरण में अपीलकर्ता सि. कीर्ति राव ने SDM कार्यालय में पदस्थ बाबू विनय विश्वकर्मा पर उत्तरवादी से मिलीभगत कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
अपीलकर्ता के अनुसार यह प्रकरण मार्च 2025 से SDM न्यायालय में लंबित है, जिसमें उत्तरवादी मनप्रीत सिंह होरा आज तक एक बार भी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ है। सभी वैध दस्तावेज – पंजीकृत विक्रय विलेख, नामांतरण, डाइवर्शन रिकॉर्ड, ऋण पुस्तिका एवं पटवारी प्रतिवेदन – अपीलकर्ता के पक्ष में हैं, इसके बावजूद अंदरखाने में उनके विरुद्ध आदेश तैयार कर लिया गया।
मामला उस समय उजागर हुआ जब अपीलकर्ता के अधिवक्ता न्यायालयीन फाईल देखने पहुंचे। उन्होंने पाया कि धारा 5 के आवेदन को खारिज करने हेतु आदेश पहले से तैयार किया जा चुका है, जबकि न तो कोई सुनवाई हुई थी और न ही उत्तरवादी उपस्थित था। जब अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति की और आदेश देखने की कोशिश की, तब बाबू विनय विश्वकर्मा ने वह आदेश फाइल से फाड़कर फेंक दिया और फाइल छीनकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
अपीलकर्ता का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि रिकॉर्ड से सबूत मिटाकर उत्तरवादी को अवैध लाभ पहुंचाया जा सके। यह सीधा न्यायिक दस्तावेजों से छेड़छाड़ और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर बिलासपुर, संभाग आयुक्त एवं राजस्व मंत्री को भेजी गई है, जिसमें बाबू विनय विश्वकर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच, निलंबन और आपराधिक कार्यवाही की मांग की गई है।
स्थानीय वकील समुदाय ने भी इस घटना को न्यायिक प्रणाली के लिए खतरनाक बताते हुए कहा है कि यदि ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आम नागरिक को न्याय मिलना असंभव हो जाएगा।







