👉🏻 कार्यों की राशि शासन से मंगाने में जानबूझकर विलम्ब,कर्तव्य के प्रति उदासीन रवैया
👉🏻 कई शाखा प्रमुखों में आपसी तालमेल व समन्वय का अभाव, प्रभावित होता है कामकाज
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में कई विभागों के प्रमुखों के आपसी तालमेल के अभाव के कारण कई तरह के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनमें इन दिनों अकाउंट सेक्शन और निर्माण शाखा से जुड़े कार्यों पर असर देखा जा रहा है। लेखा अधिकारी की सुस्त चाल और कार्य के प्रति कहीं न कहीं उदासीनता बरतने के कारण भुगतान संबंधी कार्य बाधित होने के साथ-साथ ठेकेदारों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आश्चर्य इस बात का है कि जब लेखा अधिकारी को इस बात की जानकारी होती है कि उन्हें विविध कार्यों के संबंध में शासन से प्राप्त राशि मंगानी होती है,भुगतान करना होता है और यह एक रूटीन वर्क है, इसके बावजूद इस कार्य को गंभीरता से अंजाम नहीं दे रहे हैं। इसकी वजह से ठेकेदारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही साथ शासन की योजनाओं के अलावा निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन और भुगतान में भी विलंब हो रहा है।
👉🏻पार्षद निधि वर्ष 2024-2025 का भुगतान लंबित
वित्तीय वर्ष 2024-2025 के पार्षद निधि की 50% प्रतिशत राशि नगर पालिक निगम कोरबा को 09 दिसम्बर 2024 को राज्य सरकार से प्राप्त हुई थी जो कि 32 ठेकेदारों को ही भुगतान हो पाया है, और बचे शेष 37 ठेकेदारों का भुगतान अब तक लंबित है। कुल राशि 201 लाख रुपये राज्य सरकार ने नगर निगम कोरबा को प्रदान किया है, बाकी 201 लाख रुपये आज दिनांक तक अप्राप्त है,जबकि राशि मंगाना लेखाधिकारी की जिम्मेदारी है।
सवाल है कि 14 महीनों बाद भी राशि लाने को निगम प्रशासन ने रुचि नहीं दिखाई है। कई फाइलें चेक सेक्शन में भुगतान हेतु लंबित हैं और किसी को कोई परवाह ही नहीं है।
👉🏻 संज्ञान में लाया तब बना उपयोगिता प्रमाण पत्र
एक माह पहले ठेकेदरों के साथ अध्यक्ष ने नगर निगम के अधिकारियों को इस विलम्ब और समस्या से अवगत कराया, तब जाकर उन्होंने उपयोगिता प्रमाण पत्र 21 जनवरी 2026 को बना कर संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग,रायपुर को भेजा है। सवाल जायज है कि सम्बंधित शाखा के अधिकारी इतने लंबे समय से क्या नींद में थे..? अचरज तो इस बात का भी है कि पत्र के एक माह बाद भी किसी भी प्रकार की राशि निगम को प्राप्त नहीं हुई है।
👉🏻 उसी मद में खर्च न कर दूसरे में खर्च किया जा रहा
इसी तरह से यह भी बात आई है कि जिस मद में कार्य के लिए जो राशि सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, उसे उसी मद में खर्च करने हेतु अधिकारियों द्वारा ठेकेदार संघ को बोला गया है, किन्तु यहां तो माजरा ही कुछ और है। 3-4 निर्माण कार्यों को छोड़कर शेष कार्य तो खरीदी के हैं और पूरी रकम सामग्रियों की खरीदी में खर्च कर दिए गए हैं। यह हाल सिर्फ नगर निगम ही नहीं बल्कि दूसरे निकायों जिला पंचायत,जनपद पंचायतों, नगर पंचायतों व ग्राम पंचायतों में भी धड़ल्ले से हो रहा है। यह एक बड़ी वजह है कि सरकार का खजाना खाली तो हो रहा है किंतु कार्य अपेक्षित नजर नहीं आ रहा। सरकार का भी रवैया समझ नहीं आता कि वह राशि देना चाहती है तो विलम्ब किस बात का….?
👉🏻 ठेकेदार संघ ने आयुक्त से लगाई गुहार
नगर निगम कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन कोरबा के अध्यक्ष असलम खान ने कहा है कि हम ठेकेदारों को कई दायित्वों का निर्वाह करना होता है। कई बार अकाउंट एवं निर्माण शाखा प्रमुखों को अवगत करवाया गया है लेकिन उनका व्यवहार असामान्य प्रतीत होता है। निगम आयुक्त से निवेदन किया गया है कि इस विषय पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द भुगतान कराने प्रयास किया जाए।






