👉🏻दर्ज गम्भीर अपराध में पुलिस के क्लोजर (खात्मा) पर पीड़ित को है आपत्ति
👉🏻 कोरबा एसपी ने पुलिस जांच में विलम्ब पर पेश किया हलफनामा
👉🏻 CJMFC के आदेशानुसार 7 बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत कर देने की एसपी ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
👉🏻 तहसीलदार ने 7 बिंदुओं पर जांच प्रतिवेदन पुलिस को सौंपना बताया, यही जांच है महत्वपूर्ण
बिलासपुर/ कोरबा। टीपी नगर क्षेत्र में स्थित पाम माल से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाला को लेकर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कोरबा सीजेएम फास्ट्रेक को दो सप्ताह के भीतर आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश हाईकोर्ट में दायर उस याचिका पर दिया गया है जिसके जरिए पीड़ित पक्ष की तरफ से अंकित सिंह ने सीजेएम कोर्ट,कोरबा के आदेश का पालन/जांच में कोतवाली पुलिस द्वारा किये जा रहे विलम्ब पर ध्यान दिलाया था।
अंकित सिंह ने कोतवाली पुलिस द्वारा जमीन धोखाधड़ी और कूटरचना के दर्ज प्रकरण में राजस्व विभाग की टिप्पणी” कोई अपराध नहीं बनता” के आधार पर क्लोजर (खात्मा) हेतु रिपोर्ट पर आपत्ति की थी। आपत्ति पर सीजेएमएफसी ने पुलिस के खात्मा रिपोर्ट को खारिज कर 7 बिंदुओं पर 60 दिन में विस्तृत जांच प्रस्तुत करने कहा किन्तु पुलिस द्वारा विलम्ब किया जाता रहा। इससे क्षुब्ध पीड़ित ने हाईकोर्ट की शरण लेकर स्वयं अपना पक्ष रखा था।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता अंकित सिंह के साथ ही सरकारी वकील शालीन सिंह बघेल और रेस्पोंडेंट्स की ओर से वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को सुना।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने याचिका का 11 फरवरी 2026 को निपटारा करते हुए निर्देशित किया है कि संबंधित विद्वान मजिस्ट्रेट इस सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर विचार करें और इस ऑर्डर की कॉपी मिलने की तारीख से दो हफ़्ते के अंदर कानून के अनुसार उस पर सही ऑर्डर दें।
👉🏻 एसपी ने पेश किया व्यक्तिगत हलफनामा,टीआई को निन्दा की सजा
मामले में जेएमएफसी कोर्ट के आदेश पर जांच में विलम्ब हेतु हाईकोर्ट ने कोरबा एसपी को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने निर्देशित किया था। दायर हलफनामा में जांच पूरी करने में देरी और जेएमएफसी द्वारा तय 60 दिन के समय में सप्लीमेंट्री रिपोर्ट जमा न कर पाने के लिए बिना शर्त और ईमानदारी से माफी मांगी है। दी गई सफाई में देरी का मुख्य कारण ओरिजिनल रेवेन्यू रिकॉर्ड और इंटर-डिपार्टमेंटल कम्युनिकेशन का न मिलना बताया गया है, जो ट्रायल कोर्ट द्वारा बताए गए सात पॉइंट की जांच का पालन करने के लिए ज़रूरी थे। जब यह मामला उनके ध्यान में आया, तो तुरंत सुधार के कदम उठाए गए, जिसमें संबंधित जांच अधिकारी कोतवाली टीआई को कारण बताओ नोटिस जारी करना, निंदा की सज़ा देना, ज़रूरी जांच के लिए तहसीलदार से बातचीत करना और आखिरकार 07.02.2026 को ट्रायल कोर्ट के सामने फ़ाइनल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट जमा करना शामिल है। पुलिस अधीक्षक ने हलफ़नामा में कहा है कि फ़ाइनल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट द्वारा उठाए गए सात सवालों की ठीक से जांच की गई है। अगर याचिकाकर्ता सप्लीमेंट्री रिपोर्ट के तथ्यों या नतीजों से संतुष्ट नहीं है, तो वह कानून के तहत उपलब्ध उपायों का सहारा लेने के लिए स्वतंत्र है।
👉🏻इन 7 बिंदुओं पर कोर्ट ने मांगा है जांच,तहसीलदार बजरंग साहू ने बताया- दे दी है पुलिस को रिपोर्ट…
प्रार्थीया श्रीमति अरूणिमा सिंह के स्वामित्व की भूमि खसरा नम्बर 663/3 रकबा 4200 वर्ग फीट को शासकीय दस्तावेज़ों से छेडछाड कर एवं कूटरचना कर हड़प लेने के मामले में न्यायालय द्वारा इन बिन्दुओं में जानकारी चाही गयी है :-
- मूल खसरा नंबर 663 नंबर की मूल स्थिति और चौहदी अधिकार अभिख वर्ष 1954-55 की स्थिति में उपलब्ध करावे।
- वर्ष 1991 में खसरा नंबर 663/3 के भू स्वामी अमरनाथ पिता नत्थू लाल के स्वामित्व के दौरान भूमि की चौहद्दी क्या थी, उपलब्ध करावे।
- उक्त खसरा नंबर 663/3 के भू-स्वामी के रूप में रा पिता रू अंकित किस पटवारी के द्वारा किया गया है, उपलब्ध करावे।
- प्रार्थिया अरूणिमा सिंह के शिकायत पर पुनः रा पिता रू के स्थान पर अरूणिमा सिंह का नाम किसके द्वारा संशोधित किया गया है। खसरा नंबर 383/3 को खसरा नंबर 063/3 किसके द्वारा संशोधित किया गया है, उपलब्ध करावे।
- कंप्यूटर में राजस्व अभिलेखो की प्रवृष्टि दर्ज करने व विलोपन करने की क्या प्रक्रिया होती है, उक्त कार्यवाही किसके आदेश से होती है प्रवृष्टि कौन करता है तथा साफ्टवेयर अपडेट किसके द्वारा की जाती है, उपलब्ध करावे।
- वर्ष 1954-55 में मूल भूमि खसरा नंबर 663 रकबा 1.82 एकड़ स्वामी हीरालाल पिता धनसाय के समय मैनुअली तैयार किया गया है।हस्तलिखित अभिलेख का मिलान क्या कंप्यूटरीकृत अभिलेख से किया गया है यदि नहीं तो मूल भूमि के हस्तलिखित संधारित अभिलेख मूल भूमि की चौहदी और नक्शा उपलब्ध करावें।
- खसरा नंबर 338, 339 एवं 340 की मूल स्थिति और चौहद्दी वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख के आधार पर क्या थी, उपलब्ध करावे।
👉🏻 पूरा मामला इस तरह समझें
यह मामला कोरबा में पाम मॉल के कंस्ट्रक्शन के दौरान ज़मीन पर कथित गैर-कानूनी कब्जे और गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिसके बारे में 22.01.2015 को विजय बुधिया ने कमिश्नर (रेवेन्यू), बिलासपुर डिवीज़न के सामने एक शिकायत दी थी। बिल्डरों ने कथित तौर पर कब्ज़ा कर लिया था, के खिलाफ़ केस दर्ज किया गया। साथ ही, 23.04.2018 के रेवेन्यू रिकॉर्ड भी जमा किए गए। एक अन्य अरुणिमा सिंह की जमीन भी मॉल में दबा दी गई। बार-बार बताने के बावजूद, रेवेन्यू अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे याचिकाकर्ता अंकित सिंह की माँ अरुणिमा सिंह को पुलिस स्टेशन कोतवाली, कोरबा में अज्ञात लोगों के खिलाफ़ FIR नंबर 1085/2020 दर्ज करानी पड़ी। हालाँकि, संबंधित पटवारी द्वारा मांगी गई अग्रिम ज़मानत को JMFC, कोरबा ने 15.04.2021 को खारिज कर दिया था, लेकिन कोई प्रभावी जांच या गिरफ्तारी नहीं हुई, और शिकायतकर्ता अरुणिमा सिंह को उचित सूचना दिए बिना एक क्लोजर (खात्मा) रिपोर्ट फाइल कर दी गई, जबकि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट(ED) रायपुर ने 26.07.2023 कोECIR/RPZO/01/2023/325 के ज़रिए जांच शुरू कर दी थी। इधर,अरुणिमा सिंह को जुलाई 2025 में ही बुलाया गया था, जिसके बाद CJM (JMFC), कोरबा ने देखा कि कोई सही जांच नहीं की गई थी और 10.11.2025 को आदेश जारी कर, थाना प्रभारी, कोतवाली को 60 दिनों के अंदर बताए गए पॉइंट्स पर आगे की जांच करने का निर्देश दिया। हालांकि,याचिकाकर्ता अंकित सिंह ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई जांच निष्पक्ष, सही और कानूनी तरीके से नहीं की गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग न करने और कोई कार्रवाई न करने की वजह से एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट, रायपुर की जांच अभी भी पेंडिंग है।







