कोरबा। मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और करीब 2300 रुपए की लूट के पांच साल पुराने मामले में कमजोर साक्ष्य के कारण न्यायालय ने छह आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय के समक्ष प्रार्थी, प्रत्यक्षदर्शी और जप्ती-मेमो के स्वतंत्र गवाह ही अपने पूर्व कथित मामले के समर्थन में नहीं आए। ऐसे में आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके।
मामला दीपका थाना क्षेत्र का है। प्रार्थी मनोज सिंह ने शिकायत में बताया था कि 19 जनवरी 2021 को वह मोटरसाइकिल क्रमांक CG 12 AN-1189 से रतिजा पावर प्लांट ड्यूटी पर जा रहा था। मेन रोड के पास सुरजीत सोनी, अजय पटेल, कान्हा अहिर, रवि पटेल, संजय पटेल, सुरेश पटेल सहित अन्य लोगों द्वारा उसकी मोटरसाइकिल रोककर गाली-गलौज और हाथ-मुक्का, लात व डंडे से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में पर्स छीनने की बात भी कही गई थी, जिसमें करीब ₹2300 रखे होने का उल्लेख था।
रिपोर्ट के आधार पर दीपका थाने में अपराध क्रमांक 17/2021 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत विवेचना की गई। मामला विचारण के दौरान धारा 294, 506 भाग-दो, 147, 341, 323, 395 सहपठित धारा 149 के आरोपों तक पहुंचा।
👉🏻 प्रार्थी ने ही नहीं पहचाना आरोपियों को
मामले की सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण स्थिति तब बनी, जब प्रार्थी/आहत मनोज सिंह ने अभियुक्तों को पहचानने से इनकार कर दिया और अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। लिखित शिकायत में आरोपियों के नाम कैसे आए, इस सवाल पर उसने बताया कि कंपनी के लोगों ने उसे आरोपियों के नाम बताए थे और उसी आधार पर आवेदन में नाम लिखवाए गए थे। यानी आरोपियों की पहचान और उनकी कथित भूमिका को लेकर प्रार्थी की अदालत में गवाही अभियोजन के लिए मजबूत आधार नहीं बन सकी।
👉🏻प्रत्यक्षदर्शी और स्वतंत्र गवाह भी मुकर गए
मामले के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए कलेश्वर सोनी और आजाद सिंह ने भी प्रार्थी के मामले का समर्थन नहीं किया। वहीं मेमोरण्डम और जप्ती के स्वतंत्र गवाह चित्रपाल सिंह, सुनील कुमार, लक्ष्मीनारायण यादव और गब्रैल लकड़ा की गवाही भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकी। इस तरह घटना के प्रत्यक्ष समर्थन के लिए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए प्रमुख गवाहों की गवाही आरोपों को मजबूती नहीं दे सकी।
👉🏻मेडिकल रिपोर्ट में भी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं
चिकित्सक डॉ. कमलेश पोर्ते की रिपोर्ट में आहत की बाहों में दर्द और सूजन का उल्लेख था। वहीं डॉ. दिलीश सिंह की गवाही में किसी अस्थिभंग (हड्डी टूटने) की पुष्टि नहीं हुई। न्यायालय ने चिकित्सकीय साक्ष्य को भी आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं माना।
👉🏻विवेचना प्रमाणित हुई, लेकिन आरोप साबित नहीं हुए
न्यायालय ने माना कि विवेचकों ने एफआईआर, देहाती नालसी और विवेचना की कार्रवाई को प्रमाणित किया है, लेकिन केवल विवेचना की प्रक्रिया का प्रमाणित होना आरोपों को स्वतः सिद्ध नहीं करता। मामले में प्रार्थी/आहत, प्रत्यक्षदर्शी तथा स्वतंत्र जप्ती-मेमो गवाहों के समर्थन के अभाव में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके।
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि प्रस्तुत साक्ष्य से धारा 294, 506 भाग-दो, 147, 341, 323, 395 सहपठित धारा 149 के आवश्यक तत्व प्रमाणित नहीं होते।
फलस्वरूप सुरेश पटेल, सुरजीत सोनी, अजय कुमार पटेल, संजय कुमार पटेल, कान्हा अहिर और रवि कुमार पटेल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। राहत प्राप्त लोगों ने इसे सत्य की जीत करार दिया है।


















