👉🏻तीजा-चतुर्थी की शाम आस्था और खगोल विज्ञान ने मिलकर लिखी खूबसूरत कहानी
कोरबा। “चांद जैसे मुखड़े पर बिंदिया सितारा…” गीत की ये पंक्तियां सोमवार की शाम आसमान में कुछ ऐसी ही तस्वीर के रूप में बन कर उतर आईं। करीब 6:50 बजे, आसमान में पतली-सी चांद की कोर के पास चमकता शुक्र ग्रह ऐसा नजर आया, मानो किसी सुंदरी के चांद जैसे मुखड़े पर चमकते सितारा रूपी बिंदिया सजा दी गई हो।
हरतालिका तीज की शाम दिखे इस मनमोहक दृश्य ने नजारे को और खास बना दिया। तीज पर जहां सुहागिनें भगवान शिव और माता पार्वती के श्रृंगार और पूजन में जुटी थीं, वहीं आसमान में चांद और शुक्र का यह मिलन भी अपने आप में किसी श्रृंगार से कम नहीं था। किसी ने इसे शिव-पार्वती के दिव्य श्रृंगार से जोड़ा तो किसी ने प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य माना।
हालांकि संयोग से इसी दिन गणेश चतुर्थी भी थी। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगने की कथा जुड़ी है। लिहाजा कई लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से आसमान में चांद देखने से परहेज किया, लेकिन जब इस खूबसूरत नजारे की तस्वीरें सामने आईं तो लोग इन्हें देखकर खूब आनंदित हुए।
दरअसल, यह किसी चमत्कार से अधिक एक खगोलीय घटना थी। 14 सितंबर को चंद्रमा और शुक्र का बेहद करीबी संयोग हुआ। कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा के पीछे शुक्र के कुछ समय के लिए छिपने की घटना यानी लूनर ऑकल्टेशन भी दर्ज हुई।
आस्था ने इसे तीजा का श्रृंगार माना और विज्ञान ने चांद-शुक्र का मिलन… लेकिन तस्वीर में दोनों सचमुच ऐसे लगे, जैसे आसमान ने खुद चांद के माथे पर बिंदिया सजा दी हो। इस नजारे ने विज्ञान से आगे बढ़कर आस्था, सौंदर्य और कल्पना—तीनों को एक साथ छू लिया। इसे देखकर अनायास एक पुराना गीत –
“चांद जैसे मुखड़े पर बिंदिया सितारा…” होठों पर आ गया।




