कोरबा। काफी लंबे अरसे के बाद कोरबा निगम को एक ऐसे आयुक्त की प्राप्ति हुई जिन्होंने इस शहर को अपना समझा। शहर को अपना समझकर उसे व्यवस्थित और संवर्धित करने की मंशा से उन्होंने काम शुरू किया लेकिन उनके प्रशिक्षण अवकाश पर चले जाने के बाद उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों को मौजूदा आयुक्त से लेकर अधीनस्थ अधिकारी पलीता लगाने में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं।
आलम यह है कि आयुक्त आशुतोष पांडेय ने अपनी पदस्थापना के बाद शुरुआती दिनों में शहर का भ्रमण कर जिन व्यवस्थाओं में सुधार लाने की कोशिश शुरू की और यह धरातल पर दिखने भी लगा, जिसे शहर वासियों की सराहना भी मिलने लगी कि उनके अवकाश पर जाने के बाद बनाई गई व्यवस्था भी चौपट होने लगी है।
उनके कार्यों और प्रयासों को रत्ती भर भी आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है बल्कि उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का उपयोग करते हुए जिन अव्यवस्थाओं को सुधारने की दिशा में काम किया, वह अव्यवस्थाएं फिर से हावी होने लगी हैं। ज्यादा दूर न जाएं और सिर्फ नगर निगम के प्रशासनिक भवन साकेत से चंद किलोमीटर पहले VIP बुधवारी मार्ग की बात करें तो आयुक्त ने यहां के फुटपाथ पर जमा बेजा कब्जा को सख्ती से हटवाने के साथ ही फुटपाथ को पैदल राहगीरों के अनुकूल बनाने के लिए आकर्षक स्वरूप दिया।

फुटपाथ के आंतरिक मार्ग को दुरुस्त करने व टाइल्स लगवाने का काम भी उन्होंने शुरू कराया। इसी तरह कोसाबाड़ी चौक के पास भी रेलिंग लगवाई गई। लोगों के लिए यह फुटपाथ आवागमन का माध्यम भी बनने लगा और इसे अपनी आदत में शामिल भी करने लगे थे लेकिन 5 मई 2025 को आयुक्त के अवकाश पर चले जाने के बाद अब एक बार फिर यह फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में है। फुटपाथ को सुरक्षित करने और यहां सड़क पर किसी तरह की दुकान ना लगे, इसके लिए भी उन्होंने सख्त निर्देश दिए थे किंतु संभावित सड़क दुर्घटनाओं के खतरे के बीच बुधवारी बाजार VIP मार्ग मोड़ पर फिर से दुकानें लगने लगी हैं। ठेला खोमचा वाले बेतरतीब होने लगे हैं, सड़क पर पसरे लग रहे हैं। फुटपाथ का उपयोग बंद होने लगा है क्योंकि इसके ऊबड़-खाबड़ रास्ते को दुरुस्त करने और पेवर ब्लॉक लगाने का काम करना तो दूर अब पसरे लगाने वालों के द्वारा अपने सामान,ठेले भी यहां रखे जाने लगे हैं। सड़क पर बरसाती पानी जमा होने के कारण अनजाने में इस फुटपाथ के रास्ते से गुजरते वक्त दो-चार बच्चे चोटिल भी हो गए। इधर दूसरी तरफ भी सड़क पर अतिक्रमण बढ़ रहा है।

कोसाबाड़ी से सीतामणी और सीतामणी से कोसाबाड़ी तक,सर्वमङ्गला मार्ग में भी चौतरफा अतिक्रमण का इतना आतंक है कि सड़क पर सुगम आवागमन तो दूर हर समय इसलिए हादसे का खतरा बना रहता है कि आगे चलने वाला कब अपनी गाड़ी किसी दुकान के सामने रोक दे और पीछे आ रहा व्यक्ति उससे ठोंका न जाये।

कोसाबाड़ी चौक में निर्मला स्कूल के पास का फुटपाथ और सब्जी मार्केट भी प्रयासों को पलीता लगा रहा है। रेलिंग के अंदर ही पसरा लगाने लग गए हैं। हालांकि गरीबी और मजबूरी इन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती है किंतु दी गई व्यवस्था को मानते भी नहीं। व्यवस्था बिगड़ रही है क्योंकि आयुक्त आशुतोष पांडेय के अवकाश पर जाने के बाद मौजूदा आयुक्त से लेकर अधीनस्थ अधिकारियों ने इसे अनदेखा कर दिया है। शहर में तो अव्यवस्था का आलम है ही, आम जनता को भी निगम के अधिकारियों से कोई खास अपेक्षा नहीं रह गई लेकिन वह आशुतोष पांडेय की कार्यशैली और शहर को अपना समझ कर काम करने की प्रवृत्ति को याद करते हुए मना रहे हैं कि वह जल्द ही अपना प्रशिक्षण पूर्ण कर पुनः आयुक्त के रूप में वापस लौटें और 1-2 साल नहीं बल्कि लंबे समय तक यहां सेवा दें ताकि पूरी प्रशासनिक क्षमता निगम क्षेत्र में नजर आए और मठाधीश बनकर बैठे मट्ठड़ किस्म के अधिकारियों की कार्यशैली में भी सुधार हो।







