👉🏻सेंट जेवियर्स स्कूल की बड़ी लापरवाही..!, बच्चों को छोड़ने निकला था चालक,शराब के नशे में था हादसे के वक्त
👉🏻 वृद्ध को मारा था टक्कर,इलाज के दौरान मौत
कोरबा। मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र के अंतर्गत आने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में शुक्रवार को स्कूल बस की टक्कर से घायल बुजुर्ग भोकालू साहू 61 वर्ष की मौत के बाद शनिवार को सड़क पर शव रखकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई, ऎसे किसी हादसे की पुनरावृत्ति रोकने हेतु उपाय, ब्रेकर निर्माण का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी, कोतवाली टीआई प्रमोद डडसेना, मानिकपुर चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर सहित प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक चली समझाइश और बातचीत के बाद स्कूल प्रबंधन ने मृतक के परिजन पुत्र को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। प्रशासन की ओर से 25000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।

पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद परिजनों ने अपना आंदोलन समाप्त किया और शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए अपने गृहग्राम रवाना हो गए। मामले में मानिकपुर चौकी पुलिस ने स्कूल बस के चालक गोरेलाल निषाद निवासी ग्राम भुलसीडीह के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। यह हादसा दोपहर करीब 3:30 बजे तब हुआ था जब बच्चों को छोड़कर चालक खाली बस वापस लौट रहा था।
👉🏻 पापा को खो दिया, उपाय करें कि किसी बच्चे को न खोना पड़े
मृतक के पुत्र ने कहा कि इस हादसे में उसने अपने पापा को खोया है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। लेकिन किसी दूसरे के साथ ऐसा हादसा ना हो, किसी बच्चे की जान आफत में ना पड़े, इसके लिए प्रशासन को उचित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सेंट जेवियर स्कूल की लापरवाही को बहुत ही गंभीर बताया। साथ ही अपील की कि कोई भी स्कूल बस का चालक तेज रफ्तार से वाहन ना चलाए और शराब पीकर ड्राइविंग ना करें।
👉🏻 कालोनीवासियों ने भी रखी मांग
घटना के बाद कॉलोनीवासियों ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन के सामने कई अहम मांगें रखीं। अधिकारियों ने कॉलोनी के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण लगाने का आश्वासन दिया। साथ ही जिस मार्ग पर यह हादसा हुआ, वहां स्पीड ब्रेकर बनाए जाने की मांग नगर निगम आयुक्त के समक्ष रखी गई, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
👉🏻जान की कीमत एक लाख रुपए
मामले में देखा गया कि पुलिस और प्रशासन ने कुछ लोगों की मध्यस्थता में मृतक के पुत्र सहित स्थानीय लोगों के विरोध और आक्रोश को शांत तो कर दिया लेकिन यह सवाल लोगों के जेहन में जरूर तैर रहा है कि क्या किसी की जान की कीमत लाख- सवा लाख रूपए देकर चुकाई जा सकती है? आखिर इस तरह के मामलों में क्या ऐसा ही चलता रहेगा? क्या इस तरह के उपाय लापरवाहियों को छुपाने का तरीका नहीं हैं? बता दें कि 16 जुलाई को ग्राम दादर में जब 5 साल के एक मासूम को कुत्तों ने नोंच डाला तो परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए 100000 रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई। यह अनुग्रह राशि मानवीय संवेदना के तहत राहत हो सकती है लेकिन उस लापरवाही और लापरवाह लोगों का क्या, जो ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार हैं।


















