👉🏻 बना रहता है हादसे का खतरा, मुरुम पटवाकर काम चला रहे
👉🏻100 मीटर तक बनवाने एक साल से इंतजार
👉🏻 निगम में दिए गए आवेदन पर कार्रवाई और स्वीकृति क्यों और कहाँ अटकी,पता नहीं…!
कोरबा। आम जनता की सुरक्षा से लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए जिन पुलिस कर्मियों की तैनाती मुस्तैद रहती है, उन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की कॉलोनी पिछले 1 साल से भी अधिक समय से एक एप्रोच रोड के लिए तरस गई है। सिस्टम की चाल इतनी धीमी है कि दिए गए आवेदन पर फाइल कछुआ गति से इधर-उधर चल रही है और एक एप्रोच रोड निर्माण के लिए प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। प्रक्रिया को कहां लाकर लटकाया गया है, क्यों अटकाया गया है, इसकी जानकारी विभागीय अधिकारी को भी नहीं है। शायद, नगर निगम के जिम्मेदार कुछ अधिकारी समन्वय की बजाय काम चलाऊ और टरकाऊ रवैया को ज्यादा तवज्जो देते हैं। इस मामले को लेकर तो ऐसा ही कहा जा सकता है।

दरअसल, रिसदी मार्ग में जिला पुलिस बल का रक्षित केंद्र स्थित है और यहां पुलिस कर्मियों की आवासीय कॉलोनी भी विकसित है। पुलिस लाइन होने के साथ-साथ इसके ठीक बगल पुलिस विभाग का अपना पेट्रोल पंप भी संचालित है। पुलिस लाइन कॉलोनी के प्रवेश द्वार से लेकर पेट्रोल पंप के प्रवेश द्वार के मध्य एप्रोच रोड का निर्माण वर्षों से लंबित और अपेक्षित है। कमोबेश 2 साल से ऊपर ऐसा ही नजारा बारिश के मौसम में देखने को मिलता है जब यहां बड़े-बड़े गड्ढे से होकर दो पहिया व चार पहिया वाहन चलाते हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों, बच्चों को आना जाना पड़ता है। पुलिस लाइन परिसर और कॉलोनी के अंदर की भी सड़कें जगह-जगह से थोड़ी बहुत टूट गई है लेकिन कामचलाऊ व्यवस्था में सब कुछ चल रहा है, परंतु प्रवेश द्वार जिस पर कि नजर सीधे ही पड़ती है और पेट्रोल पंप के आगे कन्वेंशन हॉल का भी निर्माण जिला प्रशासन द्वारा कराया गया है।

यहां समय-समय पर गतिविधियां और आयोजन होने के कारण अधिकारियों का आवागमन होता रहता है इसलिए यह कहना कि जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में पुलिस लाइन के प्रवेश द्वार का ऊबड़-खाबड़ और गड्ढायुक्त रास्ता नहीं है, यह कहना अनुचित होगा। पिछले साल की बारिश में भी ऐसे ही हालत निर्मित हुए थे। जिला पुलिस लाइन में विकास के साथ-साथ अब यहां हेलीपैड भी निर्मित कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों और वीआईपी के हेलीकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरते हैं और यहां से काफिला गंतव्य के लिए रवाना होता है। ऐसे वक्त में प्रवेश द्वार के गड्ढों को भरने के लिए आरआई द्वारा मुरुम पटवा कर काम चलाया जा रहा है। पुलिस लाइन में आने-जाने वाले चार पहिया और बड़े वाहनों के कारण भी गड्ढों का आकार बढ़ता जाता है। मुरुम, मिट्टी पटवा कर समतल करा लेते हैं। बरसात में जहां पानी भरा रहता है वहीं सूखे मौसम में गड्ढे और उड़ती धूल परेशान करती है। यहां के निवासी पुलिस कर्मियों ने बताया कि रात के वक्त प्रवेश मार्ग और उसके आसपास अंधेरा भी रहता है। पर्याप्त रोशनी का अभाव लगातार बना हुआ है।
👉🏻 एक साल पहले आवेदन दिया गया
पुलिस लाइन और पुलिस पेट्रोल पंप के बीच एप्रोच रोड के सिलसिले में जब हमने रक्षित निरीक्षक अनथराम पैकरा से चर्चा की तो बताया कि करीब 1 साल पहले नगर निगम के अधिकारी भूषण उरांव को आवेदन दिया गया है। उनसे चर्चा होने पर कहा जाता है कि आवेदन प्रक्रिया में है और जल्द ही स्वीकृति मिलेगी लेकिन यह सुनते-सुनते साल भर बीत चुका है। फाइल कहां अटकी है, स्वीकृति कहां लटकी है, इसका कुछ पता आरआई को भी नहीं है। वे स्वीकृति और निर्माण के लिए निगम अधिकारी के भरोसे हैं।
👉🏻अधिकारियों की कॉलोनी का एप्रोच रोड भी जलमग्न

काफी लंबे इंतजार के बाद एसपी कॉलोनी के बगल से तहसील मार्ग तक की जर्जर से सड़क से इसी साल गर्मी के मौसम में छुटकारा मिला जब डामरीकरण का कार्य कराया गया। इसी के साथ ही इस मार्ग से गुजरने वाले आंतरिक रास्तों को भी जोड़ा गया। खराब एप्रोच रोड को डामरीकृत कर ठीक कराया गया। बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी और अधिकारियों की कॉलोनी के जाने वाले मार्ग की एप्रोच रोड इस बारिश में जलमग्न नजर आती है। इससे निर्माण की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसा निर्माण क्यों कराया जाता है जो ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक समाधानकारक न हो !








