👉🏻रिटायर्ड कर्मचारियों के हक पर डाका…!
कोरबा। जिले के बिजली विभाग के संधारण/संचारण संभाग में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी जाने वाली बोनस अनुग्रह राशि में गड़बड़ी सामने आने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है। शुरुआत में इसे सामान्य लापरवाही माना जा रहा था, लेकिन जांच के शुरुआती संकेतों ने इसे बड़े गबन के रूप में उजागर कर दिया है।
👉🏻रिटायर्ड कर्मचारियों की राशि में हेराफेरी, शिकायतों से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी निर्धारित अनुग्रह राशि समय पर नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने विभाग से संपर्क किया। लगातार मिल रही शिकायतों और भुगतान में असामान्य देरी ने संदेह को जन्म दिया। जब आंतरिक स्तर पर जांच शुरू हुई, तब यह सामने आया कि राशि के वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। मामले के सामने आते ही विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संविदा लाइनमैन हरीश कुमार साहू को निलंबित कर दिया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद ही यह सवाल उठने लगे कि क्या इतने बड़े घोटाले की जिम्मेदारी केवल एक संविदा कर्मचारी पर डाली जा सकती है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा तंत्र काम कर रहा है।
👉🏻 “मैं नहीं, अधिकारी हैं जिम्मेदार”
मामले ने तब सनसनीखेज मोड़ ले लिया जब निलंबित लाइनमैन हरीश कुमार साहू ने खुद को निर्दोष बताते हुए कार्यपालन अभियंता शत्रुघ्न सोनी पर गंभीर आरोप लगा दिए। साहू का कहना है कि यह पूरा खेल उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हुआ और उन्हें केवल एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घोटाला उजागर होते ही सारा दोष उन पर डाल दिया गया।
👉🏻पुलिस और उच्च अधिकारियों को सौंपा गया लिखित ज्ञापन
हरीश कुमार साहू ने इस पूरे मामले को लेकर पुलिस थाना कोरबा और विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंप दी है। इस शिकायत में उन्होंने पूरे घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर और अधिक गंभीर हो गया है।
👉🏻“अकेला कर्मचारी नहीं कर सकता इतना बड़ा गबन”
विभागीय जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का वित्तीय गबन किसी एक संविदा कर्मचारी द्वारा अकेले करना संभव नहीं है। भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण को देखते हुए इसमें उच्च अधिकारियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में कार्यपालन अभियंता पर लगे आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
👉🏻खाता होल्ड, परिवार आर्थिक संकट में
कार्रवाई के तहत लाइनमैन का बैंक खाता होल्ड कर दिया गया है, जिससे उसका परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहीं दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए कार्यपालन अभियंता अब भी अपने पद पर बने हुए हैं, जिससे विभागीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
👉🏻प्रबंध निदेशक तक पहुंचा मामला, सबकी नजर जांच पर
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले की जानकारी विभाग के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर तक पहुंच चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है या फिर उच्च अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरती है।
👉🏻बड़ा सवाल—बलि का बकरा या बड़े खेल का पर्दाफाश?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह केवल एक कर्मचारी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश है या फिर आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नाम सामने आएंगे। फिलहाल, जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई ही इस मामले की सच्चाई को उजागर करेगी।








