0 घंटाघर ओपन थिएटर में प्रदेश स्तरीय आयोजन
कोरबा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत स्वरूप रविवार को घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में देखने को मिला। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) जिला कोरबा के तत्वावधान में आयोजित प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव 2026 का आयोजन महापौर संजूदेवी राजपूत, सभापति नूतन सिंह ठाकुर,वरिष्ठ पार्षद नरेंद्र देवांगन, एडवोकेट रामगुलाम सिंग ठाकुर, के आथित्य व में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
भव्य भोजली शोभायात्रा, लोक संस्कृति की मनमोहक झलक और लोगों की जनभागीदारी ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
भोजली महोत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक जीवन से जुड़े विभिन्न रंग देखने को मिले। शोभायात्रा में शामिल लोगों में खासा उत्साह नजर आया। पारंपरिक परंपराओं और आस्था से जुड़े इस आयोजन ने कोरबा में छत्तीसगढ़िया संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। कार्यक्रम स्थल पर भी लोगों की बड़ी उपस्थिति रही।
लोक परंपराएं हमारी पहचान
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ी आस्था, परंपरा, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। हमारी लोक परंपराएं ही हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। बदलते समय में अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ना और आने वाली पीढ़ी को इससे परिचित कराना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक पर्वों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजनों से जहां नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित होती है, वहीं समाज में आपसी भाईचारे और एकता की भावना भी मजबूत होती है।
0शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
भोजली महोत्सव के तहत निकाली गई भव्य शोभायात्रा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। छत्तीसगढ़िया लोक संस्कृति से जुड़े रंगों और पारंपरिक स्वरूप ने लोगों को आकर्षित किया। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही। जगह-जगह लोगों ने उत्साह के साथ इसका स्वागत किया। पूरे आयोजन में जय जोहार और जय छत्तीसगढ़ के उद्घोष गूंजते रहे।
गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव में, एल्डरमैन दीपक यादव, प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी, धीरेंद्र साहू, अतुलदास महंत, एल.एच. टोप्पो सहित छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में कोरबा के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और आस्था के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया। साथ ही सामाजिक एकता, समरसता और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
संस्कृति संरक्षण का संदेश
महोत्सव ने यह संदेश दिया कि विकास और आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। भोजली जैसे पारंपरिक पर्व छत्तीसगढ़ की पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं।





