👉🏻 नगर पंचायत के कामकाज पर अध्यक्ष-सीएमओ की लगाम नहीं
👉🏻 6 माह में भी बिल फाइनल नहीं कर सके,लेट लतीफी से परेशानी
कोरबा-छुरीकला। अटल परिसर निर्माण एवं मूर्ति स्थापना कार्य पूर्ण किए 6 माह से अधिक समय बीतने के बाद भी ठेकेदार भुगतान के लिए हलाकान है। कार्य का हैंडओवर एवं लोकार्पण भी हो चुका है किंतु लचर कार्यप्रणाली ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है जो कार्य करते हैं, वरना कई मामलों में तो कार्य हुए बिना ही और अपूर्ण कार्य हालत में भी पूरा भुगतान होता रहा है।

कार्य पूर्ण करा कर भुगतान नहीं होने से परेशान ठेकेदार अनिल अग्रवाल ने नगर पंचायत छुरीकला सीएमओ को 9 फरवरी 2026 तक भुगतान नहीं होने पर 10 फरवरी को अटल जी की प्रतिमा के सामने आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी थी। इसके तहत मजबूर ठेकेदार ने अटल परिसर के सामने सुबह 11 बजे से आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसके पूर्व् उन्हें आज ही चेक कटने के भरोसा देकर अनशन पर बैठने से रोकने की कोशिश की गई किन्तु अनिल अग्रवाल अपने इरादे पर अटल रहे और अनशन पर बैठे। सीएमओ ने टीएल मीटिंग से लौटकर चेक देने का आश्वासन भिजवाया जरूर किन्तु कार्यालयीन अवधि शाम 5 बजे तक कोई चेक नहीं मिला।
🫵🏻 नपं अध्यक्ष ने नहीं लिया संज्ञान
इस पूरे मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उनके द्वारा ठेकेदार के आमरण अनशन मामले में संज्ञान नहीं लिया जाना और आमरण अनशन प्रारंभ होने से पहले अथवा बाद में भी भुगतान संबंधी निर्देश,अनशन तुड़वाने आदि को लेकर उनकी उदासीनता ने शीर्ष जनप्रतिनिधि होने के नाते कटघरे में खड़ा किया है।
🫵🏻 ठेकेदार संघ व ब्लाक कांग्रेस का समर्थन
ठेकेदार अनिल अग्रवाल को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोरेलाल यादव और जिला ठेकेदार संघ के सचिव तथा नगर निगम कोरबा ठेकेदार संघ के अध्यक्ष असलम खान ने अनशन स्थल पहुंचकर अपना समर्थन दिया है। असलम खान का कहना है कि यह समस्या सिर्फ अनिल अग्रवाल की ही नहीं अपितु निविदा पर काम लेने वाले हर ठेकेदार की है । इस सरकार में 40:40:20 प्रतिशत भुगतान का रेशियो(अनुपात) बहुत ही गलत और ठेकेदारों के लिए तकलीफदायक है। विभाग द्वारा भुगतान तीन किश्तों में किया जाता है। प्रत्येक किश्त के लिए उस स्तर का कार्य पूर्ण होने के पश्चात ही भुगतान के लिए मांग पत्र भेजा जाता है। सिस्टम इतना लचर है कि भुगतान की राशि आते-आते कार्य ही पूर्ण हो जाता है। दूसरी ओर ठेकेदार भुगतान के अभाव में कार्य बंद नहीं कर सकता, ऐसा करेगा तो समयवृद्धि की मार ठेकेदार को अतिरिक्त झेलना पड़ेगा। इस तरह नगर पालिका,पंचायत एवं निगम में कार्य करने वालों ठेकेदारों की हालत भुगतान के लचर सिस्टम के कारण लचर हो कर रह गई है।







