👉🏻3.20 लाख रुपये की रिकवरी के लिए एसडीएम ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
कोरबा। जिले के अजगरबहार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत देवपहरी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़ा मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं पंचायत राज अधिनियम के विहित प्राधिकारी द्वारा भाजपा से जुड़े एक पदाधिकारी सह ठेकेदार को राशि वसूली का नोटिस जारी किया गया है।
👉🏻 मंडल अध्यक्ष हरिशंकर, कार्रवाई की तलवार
जारी दस्तावेज के अनुसार ग्राम पंचायत देवपहरी के ठेकेदार हरीशंकर यादव(जिन्हें क्षेत्र में भाजपा के मण्डल अध्यक्ष के रूप में भी जाना जाता है) को पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92(4) के तहत कारण बताओ सूचना जारी की गई है।
नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवपहरी के कुछ हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार द्वारा ली गई थी, लेकिन निर्धारित समय में कई हितग्राहियों के मकानों का निर्माण शुरू नहीं कराया गया।
👉🏻 8 हितग्राहियों के मकान निर्माण नहीं होने का आरोप
जनपद पंचायत कोरबा के पत्र क्रमांक 12534/2026 दिनांक 30 अप्रैल 2026 के आधार पर बताया गया है कि ठेकेदार द्वारा नोटरी शपथपत्र देकर समय पर निर्माण कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद दस्तावेज में उल्लेख है कि 8 हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुए, जिससे हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और शासन की महत्वाकांक्षी योजना प्रभावित हुई।
👉🏻 3 लाख 20 हजार रुपये की वसूली प्रस्तावित
दस्तावेज में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर संबंधित ठेकेदार से 3 लाख 20 हजार रुपये की राशि वसूली योग्य मानी गई है। इसके लिए धारा 92 के तहत वसूली एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
👉🏻 गिरफ्तारी और जेल भेजने का भी प्रावधान
नोटिस में पंचायत राज अधिनियम की धारा 92(2) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति आदेश का पालन नहीं करता या राशि जमा नहीं करता, तो विधि अनुसार गिरफ्तारी और 30 दिन तक सिविल जेल भेजे जाने का प्रावधान भी है।
👉🏻 राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि संबंधित व्यक्ति भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण पद पर होने की बात सामने आ रही है। वहीं क्षेत्र में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि आवास योजना के हितग्राहियों को समय पर लाभ नहीं मिला तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या यह मामला केवल वसूली तक सीमित रहेगा या आगे और जांच होगी? क्या राजनीतिक पद पर होने के कारण मामले का प्रभाव बढ़ेगा?








