0 कैदियों पर अति विश्वास या सुरक्षा में लापरवाही, किस-किस पर तय होगी जवाबदेही…?
कोरबा। कोरबा में जिला जेल की दीवार फांदकर चार कैदी फरार हो गए। बिजली गुल होने का फायदा उठाकर बमुश्किल 15 मिनट के भीतर इन चारों कैदियों ने करीब 25 फीट ऊंची दीवार को फांदा और दूसरी तरफ झाड़ियां में कूद कर रफू चक्कर हो गए। इस घटनाक्रम को घटित हुए 24 घंटे बीत चुके हैं लेकिन मामले में अभी तक किसी के प्रति जवाबदेही ना तो तय हो सकी है और ना ही निलंबन आदि की कार्यवाही। इस पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या जेल में कार्यरत और अनुभवी सुरक्षा प्रहरियों का बंदियों पर अति आत्मविश्वास इस घटना की वजह है या फिर सुरक्षा में बड़ी चूक बरती गई?

हर दिन की तरह यह चारों बंदी जिला जेल की गौशाला में काम करने के लिए बैरक से निकाले गए थे लेकिन निकाले जाने के बाद इन पर नजर नहीं रखी गई, जिसका इन्होंने पूरा-पूरा फायदा उठाया।
सवाल है कि आखिर इन पर इतना विश्वास किसने और क्यों किया? CCTV कक्ष से कैदियों की गतिविधियों की निगरानी में लापरवाही क्यों और किसके द्वारा बरती गई? जेल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षागत लापरवाही का खामियाजा इस पूरी घटना के रूप में सामने आया है।
वास्तविक कारण तो जांच के बाद सामने आएगा लेकिन जिला जेल प्रबंधन की ओर से समाचार के लिखे जाने तक किसी भी तरह की जांच अथवा कार्रवाई संबंधी जानकारी निकलकर सामने नहीं आई है। इधर चार कैदियों के फरार होने की घटना के बाद जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता शनिवार की रात कोरबा पहुंचे।उन्होंने आज रविवार को सुबह जिला जेल पहुंचकर निरीक्षण करने के साथ घटनाक्रम की जानकारी जेलर व अन्य लोगों से लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए।
बलात्कार व पॉक्सो एक्ट के आरोपी 4 बंदियों के फरार होने के मामले में सिविल लाइन थाना में अपराध दर्ज कर जिला पुलिस द्वारा उनकी तलाश में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया गया है। जिले के सभी थाना व चौकी प्रभारी को बन्दियों की तस्वीरें जारी कर उनके क्षेत्र में प्रसारित करते हुए सभी सार्वजनिक स्थान पर तलाशी का अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। बंदियों के पुलिस गिरफ्त में आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके भागने में किसी ने मदद की थी या फिर इन्होंने स्वयं से ही सारा कुछ बंदोबस्त कर लिया था।