👉🏻 कहा- नाचती हुई स्त्रियों पर रुपए लुटाते हैं, हो सके तो कभी जरूरतमंदों को भी रुपए दिया करें
👉🏻 मंत्री रामविचार नेताम सहित अन्य ने भी दी राशि, इकट्ठा हुए 1 लाख 6 हजार
कोरबा। देने वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के….यह चरितार्थ हुआ श्री हनुमंत कथा में। कथा सुनने आए वृद्ध शत्रुघन प्रसाद श्रीवास को आभास न था कि उसकी पर्ची खुलेगी और वह लखपति बनकर लौटेगा।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बांकीमोंगरा अंतर्गत ग्राम ढपढप में आयोजित हो रही श्री हनुमंत कथा के आज चौथे दिन मंगलवार को दिव्य दरबार लगाकर अर्जी सुनी गई और पर्चे खोले गए। कोरबा सहित अन्य जिलों से आए लोगों के पर्चे बाबा ने खोले। इस दौरान एक बड़ा ही भावुक क्षण आया जब वयोवृध्द की आपबीती सुनकर हंसी-ठिठोली के बीच बाबा सहित उपस्थित जनसमूह भी भावुक हो उठा।
दरबार के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बुजुर्ग की अर्जी स्वीकार होते ही उनको भीड़ से बुलाया। लाठी टेकते वृद्ध ग्राम मुनगाडीह पाली,कोरबा निवासी शत्रुघ्न श्रीवास मंच पर पहुंचे। उनकी शिक्षा आदि के बारे में पूछते हुए बाबा ने उनका पर्चा लिखा और समस्या पूछे तो सब हूबहू बताया। वृद्ध के बेटा-बहू की अकाल मृत्यु हो गई, उनके 5 संतानों (पोतों) का पालन-पोषण, विवाह वृद्ध दादा ने किया किन्तु उसकी पूछ-परख घर पर नहीं करते। पोते नशा पान में मस्त रहते हैं। बाबा ने उन्हें उपाय बताने के साथ बागेश्वर धाम छतरपुर बुलाया। जब वृद्ध ने बताया कि वह पैदल चलकर दरबार में पहुंचा है,तब उनसे सवाल किया कि छतरपुर कैसे आओगे? फिर क्या था, धीरेन्द्र शास्त्री ने अपने थैले से भक्त द्वारा कैंसर अस्पताल के सहयोगार्थ दिए गए 50 हजार रुपये की एक गड्डी निकाल कर वृद्ध को दिए। कार्यक्रम आयोजक अमरजीत सिंह के कार्यकर्ता शैलू को कहा कि बाबा को घर तक टीम की गाड़ी में छोड़कर आएं ताकि पैसा और वृद्ध दोनों सुरक्षित रहें।
इसके अलावा सामने बैठे वीआईपी लोगों से भी रुपये देने और उन्हें देने के लिए लाए गए लिफाफा को भी वृद्ध को देने के लिए कहा। इस तरह सारे एकत्र राशि को धीरेन्द्र शास्त्री ने वृद्ध की झोली में डाल दिए। दो पत्रकारों व समिति के एक सदस्य को सारी रकम गिनती करने के लिए बोला गया। बताया गया कि कुल एक लाख 6 हजार रुपये वृद्ध को सहयोगार्थ प्राप्त हुए।अब इस राशि से वृद्ध को गुजर-बसर करने के साथ-साथ बागेश्वर धाम छतरपुर जाने में पूर्ण मदद होगी।





