👉🏻 कथा स्थल पर धक्का-मुक्की व अभद्रता से भड़के,पास फाड़ देने की बात से बढ़ी नाराजगी
कोरबा। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की श्री हनुमंत कथा के आयोजन स्थल ग्राम ढपढप में आज दोपहर उस वक्त माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया जब यहां पहुंचे पासधारक जनप्रतिनिधियों को आगे नहीं जाने दिया गया। पुलिसकर्मियों द्वारा इन्हें पास होने के बावजूद रोके जाने और आगे नहीं जाने देने के कारण बढ़ी नाराजगी के बीच काफी देर तक कहा-सुनी होती रही और इन्हें पास फाड़ देने तक के लिए धमकाया जाता रहा। पास फाड़ देने की बात सुनते ही जनप्रतिनिधि भड़क उठे और उन्होंने पास थमाते हुए कहा कि, लो इसे फाड़ कर दिखाओ।

दरअसल, यह सारा घटनाक्रम इस वजह से हुआ क्योंकि कथा के आयोजकों की व्यवस्था पर बाहरी लोग ज्यादा हावी होते नजर आए हैं। इनके द्वारा अपने हिसाब से कथा स्थल से लेकर अग्रसेन भवन तक व्यवस्था को बनाने की कोशिश शुरू से की जाती रही, जिसे लेकर बीच-बीच में धक्का-मुक्की, पकड़ा- पकड़ी, तनाव- हंगामा जैसी बातें भी सामने आती रही।
दूसरी तरफ, स्थानीय आयोजकों के द्वारा कथा को सफल करने के लिए एवं आयोजन की तैयारी हेतु सभी से सहयोग प्राप्त किया गया है। इन सहयोगकर्ताओं में संबंधित जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ पार्षद भी शामिल हैं। पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्र से किसी न किसी माध्यम से सहयोग प्रदान किया। ऐसे प्रायः सभी सहयोग कर्ताओं को उनकी गरिमा के अनुरूप व पार्षदों को आयोजन समिति के द्वारा पास प्रदान किया गया। नगर निगम कोरबा के सचिव के माध्यम से पार्षदों को पास उपलब्ध कराए गए। मंगलवार को पार्षद रामकुमार साहू, टोमेश यादव, सरोज शांडिल्य, प्रीति शर्मा आदि अपने परिवार के साथ कथा स्थल पर पहुंचे तो यहां की अव्यवस्थाओं का उन्हें सामना करना पड़ा। पास धारक स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस तरह से अपमान की बड़ी वजह स्थानीय आयोजन समिति पर बाहरी लोगों की व्यवस्था का हावी होना माना जा रहा है। ऐसे तथाकथित लोगों के इशारे पर जन प्रतिनिधियों का अपमान हुआ है।
यदि पास होने के बावजूद इन्हें आयोजन स्थल पर तवज्जो नहीं दी गई तो भला इस तरह से पास देने का मतलब ही क्या था? स्थानीय आयोजन समिति ने पास अगर दिया तो इसे उपस्थित पुलिस कर्मियों ने स्वीकार क्यों नहीं किया? क्या पुलिस कर्मियों के लिए किसी अन्य ने कोई अलग से निर्देश जारी किया था या आयोजन समिति द्वारा दिए गए पास को महत्वहीन माना गया। आयोजन पर मौजूद सूत्रों की मानें तो जिस दिन कैबिनेट मंत्री और उनके भाई, कथा स्थल पहुंचे थे तब पंडित धीरेंद्र शास्त्री का आशीर्वाद लेने के लिए मंच पर चढ़ते वक्त परिवार के एक सदस्य को चढ़ने से रोक दिया गया था। इस बात को लेकर मौके पर ही नाराजगी जाहिर की गई। इसके बाद सदस्य को मंच पर जाने दिया गया।बताया गया कि यह कृत्य आयोजन समिति से अलग व्यवस्था बना रहे लोगों के द्वारा किया गया था।






