👉🏻 क्या भगवान राम सिर्फ भाजपा और उसके अनुषंगी संगठनों के आराध्य…?
कोरबा। दुनिया चले ना श्री राम के बिना, राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना…. यह भजन बड़ा ही प्रासंगिक और तार्किक है किंतु कोरबा शहर में इस बार बड़ा गजब हो गया।
एक तरफ भगवान राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान की कथा का 28 मार्च से बागेश्वर सरकार के सानिध्य में आयोजन ग्राम ढपढप में करने से पूर्व आज विशाल शोभायात्रा को ऐतिहासिक बनाने की कवायद की जाती रही तो दूसरी तरफ भक्त हनुमान के आराध्य श्री राम को शहर में बिसरा दिया गया। यह पहला मौका होगा जब कोरबा शहर में भगवान राम के अवतरण दिवस के अवसर पर कोई झांकी, कोई शोभायात्रा, कोई रैली का आयोजन ना हुआ हो। यूं तो भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े हिंदुत्ववादी संगठन के लोग यह बीड़ा प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं किंतु इस बार ना बीजेपी, ना विश्व हिंदू परिषद, ना बजरंग दल ना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,ना भारतीय जनता युवा मोर्चा, ना महिला मोर्चा और ना ही अन्य अनुषंगी संगठनों के अन्य लोगों ने इस तरह के किसी आयोजन को लेकर दिलचस्पी दिखाई। इस बात की हैरानी भाजपा संगठन से जुड़े और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों में भी है। वह इस बार इस बात की प्रतीक्षा करते रह गए कि उन्हें शहर में निकलने वाली शोभायात्रा में शामिल होना है, जिसके लिए अब बुलावा आएगा-तब बुलावा आएगा,लेकिन नहीं आया। हालांकि, तर्क यह दिया जा रहा है कि हनुमंत कथा के आयोजन को लेकर व्यस्तता के कारण शहर में किसी भी तरह की रैली अथवा शोभायात्रा को स्थगित कर दिया गया। यह बड़ा ही विचित्र तर्क है क्योंकि हिंदुत्व की अलख जगाने और वैचारिक क्रांति लाने की और अग्रसर भाजपा और इससे जुड़े संगठनों के क्या तमाम पदाधिकारी और शहर के तमाम कार्यकर्ता वहीं डेरा डाले हुए थे?
लोगों के बीच से एक सवाल यह भी उभरा है कि क्या भगवान राम सिर्फ भाजपा और इससे जुड़े संगठनों के ही आराध्य हैं? क्या उन्हें मानने वाले लोग इसी दल से वास्ता रखते हैं? क्या भगवान राम एक राजनीतिक विचारधारा वाले लोगों के ही देवता बनकर रह गए हैं? यदि नहीं, तो अन्य लोगों में भी इस रामनवमी के अवसर पर भगवान राम की भक्ति को प्रचारित करते हुए किसी तरह के आयोजन से दूरी क्यों बनाई गई? हालांकि, मंदिरों में रामनवमी का उत्सव परंपरागत धूमधाम से मनाया जा रहा है। आने वाले भक्तों को भोग प्रसाद वितरण किये जा रहे हैं किंतु जब चारों तरफ देश भर में रामत्व की गूंज है, तब ऐसे में उनके अवतरण दिवस पर कोरबा शहर में मौजूद गहरी खामोशी तो सवाल उठाएगी ही। खासकर विज्ञप्तिबाज,सोशल मीडिया में सुर्खियां बने रहने के आतुर और फोटोबाज छपास नेताओं के लिए….जो शहर में किसी आयोजन के लिए रूपरेखा नहीं बना सके जिसमें बमुश्किल 2-300 कार्यकर्ता ही लगते..!
🙏🏻जय श्री राम-जय हनुमान🙏🏻




