👉🏻गेवरा में तो NOTA से भी कम वोट मिले, अगुवाईयों के नेतृत्व पर सवाल
कोरबा-गेवरा/दीपका। एसईसीएल की गेवरा व दीपका कोयला खदान में श्रमिक प्रतिनिधित्व को लेकर संगठनों के बीच चल रही होड़ के बीच सदस्यता सत्यापन के आंकड़ों ने कोयला मजदूर सभा (HMS) को दूसरा बड़ा झटका दिया है।
कमजोर अगुवा नेतृत्व के कारण दूसरा झटका दीपका में लगा है।यहां 13 से 15 सितंबर तक चले तीन दिवसीय मतदान प्रक्रिया में कुल 1145 मत पड़े। BMS (भारतीय मजदूर संघ) ने कुल 521 मत हासिल कर दीपका क्षेत्र में सबसे बड़े और मजबूत संगठन के रूप में अपनी बढ़त बनाई। INTUC (इंटक) कुल 339 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रही। AITUC (एटक) ने कुल 193 मतों के साथ तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया। KMS (HMS कोयला मजदूर सभा) तमाम बड़े दावों और कद्दावर चेहरों के बावजूद मात्र 49 मतों पर सिमट गई। KMP (HMS कोयला मजदूर पंचायत) रेशम लाल यादव एवं विनय सिंह के नेतृत्व में उतरी इस विंग को मात्र 05 मत ही प्राप्त हुए। NOTA (नोटा) में 38 मजदूरों ने किसी भी यूनियन में विश्वास न जताते हुए नोटा का विकल्प चुना।
👉🏻 गेवरा के परिणाम ने बेहद चौंकाया
इसके पहले गेवरा प्रोजेक्ट (गेवरा क्षेत्र) में 12 और 13 सितंबर 2026 को सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक हुए दो दिवसीय सदस्यता सत्यापन में कुल 1913 मत दर्ज किए गए। यहां के आंकड़ों के अनुसार अनुपस्थित/NOTA को 536 वोट मिले। वहीं SEKMC (इंटक) को 496, SKMS (एटक) को 493, B.KKMS (BMS) को 234, कोयला मजदूर सभा (HMS) को 146 और KMP (HMS) को महज 8 वोट मिले। इस तरह HMS को पांचवें स्थान से संतोष करना पड़ा और उसे NOTA से भी कम वोट मिले। इस तरह गेवरा एरिया में HMS का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा।
सदस्यता सत्यापन के इन आंकड़ों ने गेवरा खदान में श्रमिक संगठनों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते समीकरण को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
😡 यूनियनों के प्रति कर्मचारियों का आक्रोश, NOTA पड़ा भारी
इस बार सत्यापन में सबसे चौंकाने वाला पहलू NOTA (35 प्रत्यक्ष वोट + 99 गैर-मतदाता = 134) का शीर्ष पर रहना रहा यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि क्षेत्र के कामगार वर्तमान पारंपरिक यूनियनबाजी से असंतुष्ट हैं। गेवरा क्षेत्रीय इकाई के परिणाम यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि श्रमिक अब केवल वादों पर नहीं बल्कि जमीनी काम और प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन कर रहे हैं HMS के अभेद किले का ढहना और NOTA का उभार स्थापित यूनियनों के लिए आत्मचिंतन का बड़ा विषय है ।
👉🏻HMS की रणनीति पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस वर्ष एचएमएस (HMS) के शीर्ष नेतृत्व की आपसी खींचतान और गुटबाजी का खामियाजा कोयला मजदूर सभा (KMS) को भुगतना पड़ा। कोयला मजदूर सभा के लिए बड़े पैमाने पर बिसात बिछाई गई थी और मैदान में चर्चित व प्रभावशाली चेहरों को उतारा गया था। सत्यापन के इस परिणाम ने सभी यूनियनों के सामने आईना रख दिया है। बिसात बिछी, मोहरे चले और दावे हजार हुए लेकिन अंततः मजदूरों ने आंकड़ों के जरिए अपना फैसला सुना दिया है। यह परिणाम संदेश देता है कि मजदूर वर्ग केवल वादों और बड़े नामों पर नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष और जमीनी उपस्थिति पर ही अपना भरोसा जताता है ।




