0 कोरबा व कटघोरा वन मण्डल में बढ़ती समस्या,ग्रामीण-किसान हलाकान
कोरबा। कोरबा जिले में पिछले करीब तीन दशक से हाथियों की समस्या से ग्रामीण और किसान खासा परेशान हैं। हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है और इसके साथ-साथ आतंक भी। वर्तमान में हालात यह हैं कि हाथी और मानव दोनों एक-दूसरे से भयभीत हैं।
ग्रामीणों को अपने जान-माल की चिंता है, किसानों को खेत में लहलहाते फसल को बचाने की चिंता है ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण इन फसलों के जरिए कर सके, तो दूसरी तरफ हाथियों को इंसानी फितरत से भय है। बेजुबान हैं,किन्तु उन्हें भी अपने व अपने कुनबे के जान की परवाह है। इंसान अपनी सुरक्षा के लिए हाथियों को कोई न कोई तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है जिससे उनकी भी जान जा रही है। दोनों ही तरफ जान बचाने की जद्दोजहद है और इस हाथी-मानव द्वंद को रोकने के लिए, आतंक और हादसों को कम करने के लिए कोई खास और ठोस पहल होती अब तक नजर नहीं आई है।
कोरबा और कटघोरा वन मंडल में एक बार फिर हाथियों ने भयभीत कर रखा है दूसरी तरफ इंसान भी हाथियों को भयभीत कर रहे हैं। सोमवार का एक वीडियो कटघोरा-पसान मार्ग से सामने आया है। यहां ग्रामीण शोर मचाकर हाथियों को खदेड़ रहे हैं, हाथी जंगल से निकलकर सड़क पार करते हुए दूसरे जंगल जा रहे हैं तो किसान अपने फसल की रक्षा के लिए उन्हें लगातार दौड़ा रहे हैं। भयभीत हाथी चिंघाड़ते हुए अपनी जान बचाने दौड़ रहे हैं, पीछे-पीछे ग्रामीण दौड़ रहे हैं। लोगों को मजा भी आ रहा है लेकिन वह इसके अंजाम से अनजान हैं। हाथी अगर आक्रामक हुआ तो वह किसी के वश में नहीं आएगा क्योंकि वन विभाग सिर्फ चेतावनी की खानापूर्ति में लगा हुआ है। शिकायतें तो यह भी है कि फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के कई प्रकरण महीनों से लंबित रखे जा रहे हैं। थोड़ा बहुत मिलने वाली राशि से नुकसान की आंशिक भरपाई संभव हो पाती है लेकिन इसमें भी सेंध लग जाता है।
0 वन विभाग की नाकाम कोशिशों पर सवाल
वन विभाग द्वारा की जाने वाली तमाम तरह की कवायदें नाकाम साबित हुई हैं और अब तो हालात ऐसे हैं कि हाथियों की ट्रैकिंग भी सही वक्त पर कई बार नहीं हो पाती है और इसका खामियाजा किसी न किसी घटना- दुर्घटना, नुकसान के रूप में सामने आ जाता है। हाथियों के रहवास के नाम पर योजनाओं ने सिर्फ और सिर्फ भ्रष्ट अधिकारियों की जेब भरने का काम किया है। वह कहीं ना कहीं इस मानसिकता से ग्रसित हैं कि हाथी तो आते-जाते रहेंगे और इस विशालकाय जानवर को कैसे रोक पाएंगे, इंसानों का नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बनाए गए नियमों से भरपाई कर दी जाएगी। कुछ इसी सोच के कारण हाथियों को बेहतर रहवास नहीं मिल पा रहा है, उनके भोजन और पानी की व्यवस्था में कहीं ना कहीं चूक बार-बार हर-बार की गई है।
सरकारें भी इस विषय को लेकर कुछ खास संजीदा नजर नहीं आतीं। सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, दोनों ही सरकारों में हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाएं सामने आती रही हैं लेकिन किसी भी सरकार ने अपने वन महकमा को इतना सख्त नहीं किया कि वह इस विषय पर अपने पूरे अनुभव के साथ काम कर सकें। नो-गो एरिया, लेमरू एलिफेंट रिजर्व भी अब फाईलों में दब गए हैं। जंगलों की कटाई तस्करों के हवाले है, हाथियों के अलावा दूसरे जानवर भी गांव और शहर की ओर रुख करने लगे हैं तो यह सीधे तौर पर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नाकामी और अदूरदर्शिता पूर्ण लिए जाने वाले निर्णय और कहीं ना कहीं अपने विभागीय आकाओं को खुश करने के लिए बनाई जाने वाली बे सिर-पैर की योजनाओं का ही परिणाम है। यह कहना गलत नहीं है कि ईमानदाराना और जिम्मेदारी पूर्वक होने वाले प्रयास में कहीं ना कहीं कमी स्थानीय वन प्रशासन से लेकर शासन तक है जिसकी वजह से यह समस्या थमने और कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। यह तो गहन जांच का विषय है कि एलिफेंट रिजर्व के लिए सरकार ने वन मंडल को योजना के प्रारंभ होने से लेकर अब तक कितनी राशि जारी की और इसका किस-किस के द्वारा कितना किस-किस मद में कब-कब खर्च किया गया और हासिल क्या हुआ…?
0 आज तड़के कहर ढाया दंतैल ने
इधर,कोरबा वन मण्डल के ग्राम तौलीपाली और कुदमुरा में एक दंतेल हाथी ने आज तड़के लगभग 4:30 बजे बस्ती में घुसकर जमकर तबाही मचाई। तौलीपाली में बालक राम राठिया के घर को तोड़कर 1 बोरी धान और 1 कट्टी प्याज को नुकसान पहुंचाया। हाथी ने एक बोरी धान को अपनी सूंड में पकड़कर दूर ले जाकर खाया और फेंक दिया।
कुदमुरा में पुनी राम घनुहार और मनमोहन राठिया के घरों को बुरी तरह तोड़कर दो-तीन बोरी धान को नुकसान पहुंचाया। इस घटना से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। बालक राम राठिया ने बताया कि बिजली गुल होने के कारण बस्ती में अंधेरा था, तभी हाथी ने बस्ती में घुसकर घर को तोड़ दिया और धान और प्याज को नुकसान पहुंचाया। वन विभाग की टीम ने सुबह मौके पर पहुंचकर जांच की। बालक राम राठिया ने वन विभाग से उचित मुआवजे की मांग की है।