0 क्या मण्डल अध्यक्ष व महामंत्री राजनीतिक साजिश का शिकार बने….?
कोरबा-पाली। कोरबा जिले के पाली ब्लॉक और तानाखार विधानसभा क्षेत्र सहित जिले व प्रदेश की भाजपा राजनीति में हलचल मचा देने वाली हत्याकांड की घटना को पांच माह पूरे हो चुके हैं, किन्तु संगठन का रवैया पांच माह बाद भी ढुलमुल और सवालों के घेरे में है। वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया में अभी तेजी से वायरल है जिसमें दिख रहा है किस तरह से संजय भावनानी और कन्हैया जायसवाल ने थाना के भीतर गाली-गलौच कर घर में आग लगा देने की धमकी दी। सौरभ, नउआ, सिज्जु के घर मे आग लगा देने की बात कहते हुए टीआई व पुलिस कर्मियों से गाली गलौच का यह वीडियो है। पुलिस कर्मियों को वीडियो बनाने से रोका जाता रहा। यही नहीं घटना दिनांक की रात जिस अस्पताल में घायल रोहित जायसवाल को ले जाया गया था, उसके बाहर पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। मौजूद पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया जो वहां से किसी तरह जान बचाकर भागे। दूसरी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ को अंजाम दिया गया जिससे दहशत व आतंक का माहौल रहा।
पाली क्षेत्र के दो कद्दावर भाजपा नेताओं के बीच कोयला के कारोबार को लेकर चली आ रही टशन 28 मार्च 2025 को एक पक्ष के कोल लिफ्टर की हत्या पर आकर थमी। सत्ता और संगठन दोनों इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे लेकिन वह कोई हल ना निकल सके। जब कोल लिफ्टर रोहित जायसवाल की हत्या की खबर फैली तो मंडल अध्यक्ष रोशन सिंह ठाकुर और महामंत्री विवेक कौशिक को दूसरे ही दिन पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता व पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस हत्याकांड के बाद दूसरे पक्ष ने उसी रात बलवा, तोड़फोड़, आगजनी, मारपीट जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दिया जिसमें भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय भावनानी सहित सात लोगों पर गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज हुए। तत्काल में भाजपा जिला अध्यक्ष मनोज शर्मा की रिपोर्टिंग के आधार पर रोशन सिंह ठाकुर व विवेक कौशिक को तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया लेकिन आरोपी बने संजय भावनानी पर आज 5 माह बाद भी कोई संगठनात्मक/अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकी है। उन पर में घुसकर धमकाने का भी जुर्म दर्ज है। इस बीच अभी 25 अगस्त 2025 को संजय भावनानी को छोड़कर सभी 6 लोगों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया जिन्हें रिमांड पर जेल भेजा गया। इस तरह दोनों पक्ष से गिरफ्तारियां लगभग पूर्ण हुई हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है किंतु जिला उपाध्यक्ष फरार हैं। प्रकरण में कुल 8 में से एक आरोपी नाबालिग है।
अब इस तरह की एकतरफ़ा संगठनात्मक कार्रवाई को पाली क्षेत्र के भाजपा नेता सहित जिले के भी कुछ भाजपा नेता रोशन सिंह ठाकुर की राजनीतिक हत्या मान रहे हैं। इनका कहना है कि संगठन के लिए सभी बराबर होने चाहिए, खासकर अनुशासन के मामले में लेकिन जिस तरह से संगठन की गतिविधियां कुछ घटनाक्रमों को लेकर चल रही हैं, उससे इस बात को बल मिल रहा है कि भाजपा में पर्दे के पीछे से खेल होने लगा है। तो क्या, भाजपा कमजोर नेताओं के हाथ में है जो कार्रवाई करने में अक्षम हैं?
0 लोकसभा चुनाव में बढ़ने लगी थीं दूरियां
पाली में भाजपा की राजनीति लोकसभा चुनाव के दौरान दो गुटों में तब्दील होने लगी थी। सुश्री सरोज पांडेय के सांसद प्रत्याशी चयन के बाद मंडल अध्यक्ष रोशन सिंह ठाकुर अपनी टीम के साथ सरोज पांडे के पक्ष में भाजपा प्रवेश करने वालों का रेला खड़ा कर रहे थे तो यह बात दूसरे पक्ष को नागवार गुजर रही थी। इसे लेकर शिकवा-शिकायतों का दौर भी चला और ऐसे में राजनीतिक रंजिश में कोयला कारोबार की रंजिश ने आग में घी का काम किया। रोशन सिंह के परिजनों ने शुरू से इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जिस तरह का रवैया हत्याकांड के दूसरे दिन से तात्कालिक तौर पर संगठन ने दिखाया, वह एक तरफ़ा और कहीं ना कहीं रोशन सिंह और उनके खास महामंत्री विवेक कौशिक के राजनीतिक कैरियर को खत्म करने की साजिश कही जा सकती है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर जिला उपाध्यक्ष पर अनुशासन की गाज आज तक क्यों नहीं गिराई गई, जबकि वह भी गैर जमानती धाराओं के आरोपी हैं। मामलों में कौन दोषी है और कौन निर्दोष, इसका फैसला पुलिस विवेचना में जुटाए गए तथ्यों और सबूतों के आधार पर न्यायालय को करना है लेकिन इससे पहले ही संगठन ने एक पक्ष को दोषी बताकर दूसरे पक्ष को कहीं ना कहीं संरक्षण देने और बराबर प्रभाव में रखने का काम किया है। इस मामले में जिला भाजपा अध्यक्ष गोपाल मोदी का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
0 एसईसीएल कर्मचारी को संरक्षण और विरोध से बढ़ती रही रंजिश
सरायपाली कोयला खदान के भीतर क्षेत्र से कोयला उठाव को लेकर एसईसीएल कर्मचारी रूपचंद देवांगन की भूमिका लंबे समय से विवादों में रही। उसे एक गुट के पक्ष का समर्थन मिलता रहा तो दूसरी तरफ रोशन सिंह ठाकुर एंड कंपनी के आरोपों से वह घिरा रहा। क्वालिटी जूनियर इंस्पेक्टर पर वसूली का भी आरोप लगा। एक कर्मचारी होने के नाते रूपचंद देवांगन का दायित्व तटस्थ होकर काम करने का था, लेकिन उस पर शुरू से एक पक्ष के लिए काम करने का आरोप लगता रहा और बीच-बीच में उसे सपोर्ट देने के लिए यह गुट आगे आता रहा। वाद-विवाद और जान का खतरा बताए जाने के बाद उसका तबादला प्रबंधन ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दूसरी परियोजना में कर दिया तो इसके बाद उसे न्यायालय जाने से लेकर हर स्तर पर गुट विशेष के द्वारा सपोर्ट किया जाता रहा। एक बार उसे स्टे मिला तो अंतिम सुनवाई में हाईकोर्ट ने तबादला को सही ठहराया। इस सबके बीच आखिरकार खदान के भीतर हत्याकांड हो गया। इस पूरे मामले में एसईसीएल कर्मचारी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बात पुलिस जांच में भी सामने आई है कि एक पक्ष उसका हिमायती था। लोग इस बात को भी कहने से नहीं चूकते कि इस एक हत्याकांड की घटना की आड़ में कहीं ना कहीं निर्दोष लोगों को भी समेट कर अपनी आपसी रंजिश को भुनाया जा रहा है।
0 दर्ज है 4 अपराध

अपराध संख्या 116/2025, 117/2025, 118/2025 और 127/2025 के तहत 4 एफआईआर मृतक अनूप उर्फ रोहित जायसवाल की हत्या के प्रत्यक्षदर्शियों और रिश्तेदारों,साथियों पर दर्ज की गई है। इन पर आरोप है कि घटना दिनाँक को दूसरे पक्ष के आरोपियों के घर जाकर उन्हें धमकाया, मारपीट किया, गाड़ियों में तोड़फोड़ की,आगजनी को अंजाम दिया। प्रकरणों में राहुल जायसवाल उर्फ अंकुश जायसवाल, कन्हैया जायसवाल, हर्ष जायसवाल, अनिल कुमार जायसवाल, धर्मराज मरावी धरमू मरावी, संजय भावनानी और राजेश डोंगरे शामिल हैं। इनमें संजय को छोड़ शेष की गिरफ्तारी हो चुकी है। न्यायालय से भावनानी की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर दिया गया है।
0 सवालों में संगठन का रवैया और कार्रवाई
अनुशासन की बात करें तो नगर पालिक निगम के सभापति चुनाव में हुए अप्रत्याशित और राष्ट्रीय राजनीति तक को हिला कर देने वाले घटनाक्रम में जहां भाजपा से विजयी पार्षद प्रत्याशी नूतन सिंह ठाकुर ने सभापति की कुर्सी जीती तो उनको संगठन ने निकाल दिया, तो वही मंत्री तक को नोटिस जारी किया गया किंतु इसके बाद सारा कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। आखिर क्रॉस वोटिंग करने वालों पर संगठन ने अनुशासन का डंडा चलाने से क्यों हाथ पीछे खींच लिया?
अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को नोटिस देकर सिर्फ इसलिए पार्टी से निकाल दिया कि उन्होंने डीएमएफ के खर्चे पर सवाल उठाया था। जनहित के मुद्दों को उठाने की सजा रवि भगत को मिली तो आदिवासी नेतृत्व से सवाल उठा कि आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में आदिवासी वर्ग के युवा नेता को ऊपर उठाने की बजाय उसके राजनीतिक कैरियर की भ्रूण हत्या कर दी गई। संगठन में सुनवाई नहीं होने पर रवि भगत को सोशल मीडिया में आना पड़ा था। अनुशासनहीनता की बात करें तो बांकीमोंगरा के एक भाजपा नेता को लेकर भी एक ऑडियो वायरल हुआ था। युवती को लेकर काफी तेजी से वायरल इस ऑडियो पर वे सफाई देते फिरते रहे और अंतत: उन्होंने बांकी थाना में इस ऑडियो की जांच करने आवेदन दिया। उनका दावा रहा कि इस ऑडियो में उनकी आवाज नहीं है जबकि उनके जान-पहचान वालों ने इस बात की पुष्टि कि यह उनकी ही आवाज है। संगठन ने इस पर भी कोई संज्ञान नहीं लिया बल्कि थाना में ऑडियो की जांच संबंधी दिए गए आवेदन का आज तक निराकरण नहीं हो सका है। अपने रसूख और प्रभाव के बल पर संगठन से जुड़े पदाधिकारी/ नेता मामलों को दबाकर चल रहे हैं। अभी इसी क्षेत्र का एक भाजपा पार्षद भी काफी चर्चा में है और दोनों मामले कहीं ना कहीं चारित्रिक अनुशासनहीनता के दायरे में आते हैं।