कोरबा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कॉमरेड पवन कुमार वर्मा ने कहा कि आजादी के बाद का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन अपने 37वें दिन एक ऐतिहासिक जीत पर पहुंचा है। देश भर के छात्रों और युवाओं के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इस ऐतिहासिक जीत के लिए सड़क से संसद तक लड़ने वाले हर आंदोलनकारी छात्र-युवा बधाई के पात्र हैं।
पवन कुमार वर्मा, जिला सचिव ने जारी बयान में कहा है कि आज पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए आंदोलन हो रहा है। इस आंदोलन में आप देखेंगे AISF, AISA, SFI, NSUI… सभी छात्र संगठन सड़कों पर हैं पर, एक संगठन गायब है… अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद – ABVP। क्या आपने कभी देखा है RSS के किसी भी जनसंगठन को शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार… इन मुद्दों पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करते हुए?,
लेकिन सवाल ये है – क्या सिर्फ मंत्री के हटने से शिक्षा की सड़ांध दूर हो जाएगी? इस इस्तीफे ने समस्या का पटाक्षेप नहीं, बल्कि सवालों का पिटारा खोल दिया है।
- व्यापार बनी शिक्षा कारपोरेट घरानों ने शिक्षा को दुकान बना दिया है। निजी स्कूल-कॉलेजों के मालिक करोड़ों कमा रहे हैं, और गरीब की पहुंच से शिक्षा कोसों दूर हो गई है।
- स्कूलों पर बुलडोजर हजारों सरकारी स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं, और बाकी पर भी ताला लटकने वाला है।
- पेपरलीक और धांधली NEET से लेकर अन्य परीक्षाओं तक पेपर लीक ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।
- NEP का हमला: नई शिक्षा नीति के नाम पर पाठ्यक्रमों से छेड़छाड़ कर विभाजन और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस गंदगी को साफ करने के लिए शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव, शिक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी और रोजगारोन्मुख शिक्षा चाहिए। ये काम सिर्फ एक प्रगतिशील, लोकतांत्रिक और दृढ़ इच्छाशक्ति वाली सरकार कर सकती है। मौजूदा सरकार उस श्रेणी में नहीं आती।
👉🏻आंदोलन स्थगित हुआ है, खत्म नहीं!
श्री वर्मा ने कहा, खबर है कि CJP आंदोलन के विसर्जन की घोषणा कर रहा है। पर क्या छात्रों के सवाल खत्म हो गए? बिल्कुल नहीं। पेपरलीक इस आंदोलन का प्रतीक जरूर बना, पर इसके पीछे चंदा चोरी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसान-मजदूरों की बदहाली, मनरेगा में कटौती, उपज के दाम, घाटे की खेती, पुलिसिया दमन, बुलडोजर संस्कृति और संविधान की अवहेलना जैसे दर्जनों सवाल आग की तरह सुलग रहे हैं। इसलिए ये “CJP ब्रांड” आंदोलन का स्थगन है, छात्र-युवा-जन आंदोलन का नहीं। जब तक सवाल जिंदा हैं, आवाज भी उठती रहेगी।








