कोरबा। जिनके हाथों में जिले को संवारने और जनता के हित में काम करने की महती जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही अपने दोनों हाथों से सरकारी धन को इस कदर लुटाया कि पूरा तंत्र हिल गया है। जिला खनिज संस्थान न्यास की राशि को चंद व्यापारियों ने अलग-अलग फर्म बनाकर बड़ी ही बेरहमी से लूटा। सरकारी माल अपना की तर्ज पर डीएमएफ के पैसों की जो बंदरबांट की गई,वह बड़ी ही चौंकाने वाली है। बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष साहू, अब्दुल, शेखर की भूमिका महत्वपूर्ण रही। फर्जी बिल लगवा कर सामग्रियों की सप्लाई के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है जिसमें कुछ विभागों के अधिकारियों की भी संलिप्तता उजागर होने वाली है।
तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू के संरक्षण में व्यापारी 1. संजय शेंडेः प्रोपराइटर – ज्योति ट्रेडिंग कंपनी, एसएस इंडस्ट्रीज, सांई इंटरप्राइजेज 2.अशोक कुमार अग्रवाल: मारुति इंटरप्राइजेस, मेसर्स श्री साई एजेंसी, मेसर्स शिवशक्ति ट्रेडर्स 3.मुकेश कुमार अग्रवाल : मेसर्स बालाजी कॉरपोरेशन मेसर्स गणपति इंटरप्राइजेस, सौर्या सप्लाई, 4. ऋषभ सोनी, कोमल सोनी मेसर्स बी. एण्ड एस. ट्रेडलिंक्स एल.एल.पी., मेसर्स स्वर्णिम वेंचर, मेसर्स हनुमंत हॉई ट्रेडर्स, मेसर्स रूद्राक्ष रिटेलर्स, सौर्या इंटरप्राइजेस, मेसर्स भव्या एजेंसी व मनोज कुमार द्विवेदीः डायरेक्टर – उद्गम सेवा समिति ने जमकर डुबकी लगाई।
0 3% कमीशन में फर्जी बिल दिए पूछताछ में मनोज द्विवेदी ने ईडी को बताया कि अलॉटेड टेंडर के बिलों का पेमेंट बोगस (फर्जी) बिल लगाकर कराते थे। यह बिल अब्दुल और शेखर नाम के व्यक्ति टेंडर राशि का 3% राशि लेकर देते थे।
0 मनोज बड़ा बिचौलिया-2.5 से 3 करोड़ रुपये कमीशन में दिया
जांच में तथ्य सामने आये कि मारुति इंटरप्राइजेस, मेसर्स श्री साई एजेंसी, मेसर्स शिवशक्ति ट्रेडर्स संचालक अशोक कुमार अग्रवाल ने कोरबा में 22-23 करोड़ के टेंडर 2.5 से 3 करोड़ रुपए कोरबा कलेक्टर रानू साहू को मनोज नाम के व्यक्ति माध्यम से दिए।
जानकारी के मुताबिक अलग फर्मों के नाम से टेंडर में शामिल होकर 20 करोड़ देकर 130 करोड़ रु. के काम इनके द्वारा हासिल किए गए। संजय शेंडे ने कोरबा में डीएमएफ प्रोजेक्ट के करीब 120 से 130 करोड़ रुपए के काम किए। इन कामों के लिए उन्होंने तीन अलग-अलग फर्म ज्योति ट्रेडिंग कंपनी, एसएस इंडस्ट्रीज, साईं इंटरप्राइजेज बनाई थी। इन्हें सोलर लाइट इंस्टालेशन, आंगनबाड़ियों को खिलौने और आधुनिक कृषि यंत्रों की सप्लाई का काम दिया गया था। संजय शेंडे को टेडंडरिंग में अलग-अलग फर्म बनाकर शामिल होने के निर्देश तत्कालीन कोरबा कलेक्टर एवं डीएमएफ अध्यक्ष आईएएस रानू साहू ने दिए थे। इन काम के बदले में संजय शेंडे ने रानू साहू को 20 करोड़ रुपए कमीशन दिया।