👉🏻 विद्यापीठ, बाइक शोरूम, एनकेएच, कृष्णा हॉस्पिटल,मंगलम विहार जाने वाले मार्ग को वर्षों से उद्धारक का इंतजार
👉🏻 निगम कह रहा प्राइवेट, कॉलोनाइजर कह रहे निगम का आधिपत्य
👉🏻 जोन प्रभारी कह रहे- हम ही बनवाएंगे,दूसरा कोई नहीं
कोरबा। नगर पालिक निगम क्षेत्र अंतर्गत बसी अनेक अवैध बस्तियां और प्लाटिंग एरिया तक में सड़क आसानी से बना दी जाती है लेकिन शहर की एक ऐसी महत्वपूर्ण सड़क वर्षों से अपने उद्धारक के इंतजार में है। इस सड़क को यह नहीं पता कि उसका मालिक कौन है, वह किसके रिकार्ड में दर्ज है, कौन उसकी देखरेख करेगा? इस लावारिस सड़क से गुजरने वाले वर्षों से हलकान हो रहे हैं, खासकर मरीज और विशेषकर बारिश के मौसम में।
हम बात कर रहे हैं कोसाबाड़ी चौक के निकट स्थित मंगलम विहार कॉलोनी मार्ग की। मुख्य सड़क से लग कर करीब आधा किलोमीटर लंबी यह सड़क वर्षों पुरानी है। इस सड़क के शुरुआती छोर पर एक दो पहिया वाहन का शोरूम, विद्यापीठ पाठशाला कोचिंग सेंटर सहित अन्य प्रतिष्ठान के साथ-साथ न्यू कोरबा हॉस्पिटल कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल व अन्य संस्थान स्थापित हैं।

यही रास्ता आगे जाकर मंगलम विहार कॉलोनी की ओर भी निकलता है। यहां व्यावसायिक व आवासीय तौर पर रहने वालों के द्वारा नगर निगम को लाखों रुपए का टैक्स दिया जा रहा है लेकिन ये लोग एक अच्छी सड़क के लिए जिसमें किनारों पर नाली हो, पर्याप्त रोशनी देता स्ट्रीट लाइट हो, उसके लिए तरस गए हैं।
दुर्भाग्य है कि कई वर्षों से यह सड़क अपने डामरीकरण अथवा कंक्रीटीकरण के इंतजार में राह ताक रही है। सामान्य लोगों को तो आने-जाने में दिक्कत होती ही है किंतु बुजुर्गों, मरीजों और दुपहिया वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना खास कर बरसात के मौसम में करना पड़ता है। इस बारिश में भी इस रास्ते पर निर्भर लोग काफी हलकान हो रहे हैं।अस्पताल में आने वाले मरीज, गर्भवती महिलाओं, अस्थि रोग के मरीजों, वृद्ध रोगियों को एंबुलेंस व अन्य वाहनों से लाने-ले जाने के दौरान इनके साथ अप्रत्याशित- अप्रत्याशित दुर्घटना का खतरा बना रहता है। मुरूम वाली कच्ची सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। दूर-दूर तक गड्ढों में भरा पानी ही नजर आता है, सड़क के मुरुम युक्त कुछ हिस्से टापू की तरह दिखते हैं। वर्षों से उपेक्षित इस सड़क के बारे में नगर निगम के अधिकारियों से लेकर प्रशासन के अधिकारियों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को सारी जानकारी है, इसके बावजूद इस सड़क की दुर्दशा और विडंबना खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
इसकी एक बड़ी वजह इस सड़क के स्वामित्व को लेकर है। यही कारण है कि जिस सड़क से गुजर कर पूर्व में कभी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और हाल ही में प्रदेश के उद्योग मंत्री का काफिला विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए यहां के चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचा, वह सड़क आज तक बदहाली के आंसू हो रही है।
👉🏻 सड़क को लेकर किसने क्या कहा.…
इस सड़क के विषय में जब निगम आयुक्त आशुतोष पांडे से चर्चा की गई और निर्माण न होने का कारण के संबंध में पूछा गया तो उनका कहना था कि यह सड़क प्राइवेट है और कोर्ट का भी कोई इश्यू बताया जा रहा है, इस संबंध में ज्यादा जानकारी कोसाबाड़ी के जोन कमिश्नर दे सकेंगे। जब हमने जोन कमिश्नर एन के नाथ से जानकारी ली तो उनका कहना था कि मामला कुछ कोर्ट में लगा हुआ था,वर्तमान का पता नहीं, लेकिन यह सड़क नगर निगम की है। मामला कोर्ट में होने के कारण निर्माण संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सड़क का निर्माण नगर निगम ही कर सकता है, दूसरा कोई नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल के कार्यकाल में इस सड़क के निर्माण के लिए लगभग 32 लाख रुपए की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन मामला कोर्ट में होने के कारण यह कार्य संभव नहीं हो सका।
👉🏻 यह कहा कॉलोनाइजर ने
इस मामले में जब सड़क को प्राइवेट बताया जा रहा है, तब हमने मंगलम विहार के कॉलोनाइजर श्रेष्ठ सिंह ठाकुर से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि आज से करीब 12 साल पहले उनके द्वारा सभी औपचारिकताओं को विधिवत पूरा करते हुए नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया है। नगर निगम के द्वारा उन्हें इस संबंध में प्रमाण पत्र भी प्रदान कर दिया गया है। इसके साथ ही यह पूरी कॉलोनी और सड़क से लेकर सभी साधन-संसाधन नगर निगम के आधिपत्य में आ चुके हैं। यह भी बताया कि उनके द्वारा करीब 3 साल पहले नगर निगम आयुक्त एवं कोरबा एसडीएम को पुनः पत्र लिखकर इस बात से अवगत कराया गया कि उन्होंने अपना आधिपत्य सौंप दिया है, इसलिए सड़क आदि के निर्माण की जवाबदेही नगर निगम प्रशासन को उठानी चाहिए। श्री ठाकुर ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब निगम के आधिपत्य की यह संपत्ति हो चुकी है और लाखों रुपए का टैक्स इस क्षेत्र से वसूला जा रहा है तो फिर मूलभूत सुविधाओं में अग्रणी सड़क निर्माण का कार्य आखिर क्यों नहीं कराया जा रहा ! किसी मामले के न्यायालय में लंबित रहने के बारे में बताया कि एक-दो मामले कोर्ट में लगे हुए थे लेकिन वह सभी निराकृत हो चुके हैं और वर्तमान में उनकी जानकारी में किसी भी तरह का कोई मामला मंगलम विहार कॉलोनी क्षेत्र को लेकर न्यायालय में लंबित नहीं है।
👉🏻 जनप्रतिनिधियों को गंभीरता दिखानी होगी
करोड़ों के अस्पताल की ओर जाने वाली इस सड़क के कारण पीड़ा और तकलीफ झेल रहे लोगों की मनोदशा का ख्याल रखते हुए ट्रिपल इंजन की सरकार वाले जन प्रतिनिधियों को इस मामले में गंभीरता दिखाने की जरूरत है। जब सारी स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और यह नगर निगम के आधिपत्य की सड़क है तो फिर भला इसे लावारिस की तरह क्यों छोड़ दिया गया है? इस पर छानबीन कराई जानी चाहिए। अक्सर होता यह है कि तत्कालीन समय के शीर्ष अधिकारी अपना पिंड छुड़ाने के लिए मामलों की फाइल दबा देते हैं, उस पर गंभीरता नहीं दिखाते और ऐसे कई मामले सामने आ भी चुके हैं। यदि कहीं कोई फाइल, कोई कागज दबा हुआ है, तो उसे सामने लाकर तस्वीरों को साफ करते हुए इस सड़क का निर्माण जनहित में कराया जाना जरूरी होगा।
00 सत्यसंवाद ने पहले भी संज्ञान में लाया 00





