Saty SanwadSaty SanwadSaty Sanwad
  • HOME
  • CHHATTISGARH
    • Balod
    • Baloda Bazar
    • Balrampur
    • Bastar
    • Bemetara
    • Bijapur
    • Bilaspur
    • Dantewada
    • Dhamtari
    • Durg
    • Gariaband
    • Gaurella-Pendra-Marwahi
    • Janjgir-Champa
    • Jashpur
    • Kabirdham
    • Kanker
    • Khairagarh-Chhuikhadan-Gandai
    • Kondagaon
    • KORBA
    • Koriya
    • Mahasamund
    • Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur
    • Mohla-Manpur-Chowki
    • Mungeli
    • Narayanpur
    • Raigarh
    • Raipur
    • Rajnandgaon
    • Sakti
    • Sarangarh-Bilaigarh
    • Sukma
    • Surajpur
    • Surguja
  • TOP STORY
  • NATIONAL
  • CRIME
  • ENTERTAINMENT
Search
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Reading: HIT & RUN:हड़ताल टल गई,पर यह जानना भी जरूरी है कि क्या है नया प्रावधान,और क्यों लाया गया….
Share
Sign In
Notification
Font ResizerAa
Font ResizerAa
Saty SanwadSaty Sanwad
  • HOME
  • CHHATTISGARH
  • TOP STORY
  • NATIONAL
  • CRIME
  • ENTERTAINMENT
Search
  • HOME
  • CHHATTISGARH
    • Balod
    • Baloda Bazar
    • Balrampur
    • Bastar
    • Bemetara
    • Bijapur
    • Bilaspur
    • Dantewada
    • Dhamtari
    • Durg
    • Gariaband
    • Gaurella-Pendra-Marwahi
    • Janjgir-Champa
    • Jashpur
    • Kabirdham
    • Kanker
    • Khairagarh-Chhuikhadan-Gandai
    • Kondagaon
    • KORBA
    • Koriya
    • Mahasamund
    • Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur
    • Mohla-Manpur-Chowki
    • Mungeli
    • Narayanpur
    • Raigarh
    • Raipur
    • Rajnandgaon
    • Sakti
    • Sarangarh-Bilaigarh
    • Sukma
    • Surajpur
    • Surguja
  • TOP STORY
  • NATIONAL
  • CRIME
  • ENTERTAINMENT
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.

HIT & RUN:हड़ताल टल गई,पर यह जानना भी जरूरी है कि क्या है नया प्रावधान,और क्यों लाया गया….

Admin
Last updated: 03/01/2024 1:48 AM
Admin
Share
10 Min Read
SHARE

0 बढ़ते सड़क हादसों और मौत की रफ्तार पर जिम्मेदारी निभाने, जागरूक करने का प्रयास है नया प्रावधान

- Advertisement -

    हिट एंड रन का मतलब है तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने के चलते किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और फिर भाग जाना। ऐसे में सबूतों और प्रत्यक्षदर्शियों के अभाव के कारण दोषियों को पकड़ना और सजा देना बहुत मुश्किल हो जाता है।
    0 इस पर नया नियम क्या आया है?
    जिस नियम को लेकर देश भर में बवाल मचा रहा, और आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म की गई है, दरअसल वह हाल ही में संसद से पारित तीन नए कानून का हिस्सा है। आईपीसी की जगह लेने वाली भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 104 में हिट एन्ड रन का जिक्र किया गया है। यह धारा लापरवाही से मौत का कारण के लिए दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करती है। धारा 104(1) कहती है,’जो कोई भी बिना सोचे-समझे या लापरवाही से कोई ऐसा कार्य करके किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।’ धारा 104(2) उल्लेख करती है, ‘जो कोई भी लापरवाही से वाहन चलाकर किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है और घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दिए बिना भाग जाता है, उसे किसी भी अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी देना होगा।’
    0 क्या कहती है- भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2)
    भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) का वास्तविक अर्थ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 में उप-धारा (2) में एक अतिरिक्त प्रावधान पेश करती है जो उन स्थितियों को संबंधित करती है जहां अपराधी घटना के बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट किए बिना घटनास्थल से भाग जाता है। ऐसे मामलों में सजा बहुत कड़ी होती है। इसमें अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। दूसरी तरफ अगर किसी व्यक्ति से गलती से एक्सीडेंट होता है, और वो घायल को अस्पताल लेकर जाता है या पुलिस/मजिस्ट्रेट को तुरंत सूचित करता है, तो ये BNS की धारा 106 (1) के अन्तर्गत आएगा, जो जमानती होगा।
    0 पीड़ित को बचाने का उद्देश्य
    वर्तमान में हिट एंड रन के मामले, जिसके परिणामस्वरूप लापरवाह और लापरवाह ड्राइविंग के कारण मृत्यु होती है, आईपीसी की धारा 304 (ए) के तहत दर्ज किए जाते हैं, जिनमें अधिकतम 2 साल की कैद की सजा होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में बढ़ती वाहन दुर्घटना के मद्देनजर कानून की अपर्याप्तता पर टिप्पणी की थी। इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए, खंड 106(2) के तहत नया प्रावधान पेश किया गया है जो लंबे समय से लंबित था । धारा 106(2) को हिट एंड रन दुर्घटनाओं को कवर करने और दुर्घटना की तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया है। इसे वर्ष 2019 में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में पेश किए गए शब्द ‘गोल्डन ऑवर के भीतर पीड़ित को बचाने के उद्देश्य से पेश किया गया है ।
    0 इस धारा से किसे डरना चाहिए ? –
    ऐसे वाहन चालक जो एक्सीडेंट के बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बगैर भाग खड़े होते हैं और घायल व्यक्ति का ‘गोल्डन ऑवर’ चला जाता है. ऐसे गैर जिम्मेदार वाहन चालकों पर यह कानून प्रभावशील होगा।
    0 कानूनी राहत के लिए आखिर क्या करें
    यदि किसी चालक से एक्सीडेंट हो जाता है तो वह अपने मोबाइल से डायल 112, पुलिस अधिकारी अथवा मजिस्ट्रेट को सूचना देवे या थाने में स्वयं जाकर सूचना दें ताकि पीड़ित को समय पर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा सके। इससे वाहन चालक को भी कानून राहत मिल सकेगी। यहां यह समझना आवश्यक है कि सड़क दुर्घटना से घायल व्यक्ति स्वयं वाहन चालक हो सकता है, उसके परिवार के सदस्य भी हो सकतें हैं, इसलिए सड़क दुर्घटना की समय पर सूचना दिया जाना अब वाहन चालक की नैतिक नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी होगी, इसलिए कानून में लायी गई इस मानवीय पहलुओं को समझते हुए इसका विरोध नहीं करने की अपेक्षा सरकार की है। यह कानून ऐसे वाहन चालक पर लागू नहीं होगा और पहले की ही भांति कानूनी स्थिति रहेगी। अतः अफवाहों पर ध्यान ना दें जिम्मेदारी से वाहन चलावें।
    0 पहले हिट एंड रन का कानून क्या था?
    भारत में हिट एंड रन के मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत विशेष रूप से दंडनीय नहीं हैं। हालांकि, जब हिट एंड रन मामले का सवाल उठता है तो धारा 279, 304ए और 338 सामने आती हैं। धारा 279 लापरवाह ड्राइविंग की परिभाषा और सजा का प्रावधान करती है। इसमें कहा गया है कि जो कोई भी किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इतनी तेजी से या लापरवाही से वाहन चलाता है कि इससे मानव जीवन को खतरा होता है, या किसी अन्य व्यक्ति को चोट या चोट लगने की आशंका होती है, तो उसे कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना लगाया जा सकता है या एक हजार रुपए या दोनों तक बढ़ाया जा सकता है। आईपीसी की धारा 304ए में लापरवाही से मौत के लिए सजा का प्रावधान है। यह आईपीसी के तहत एक विशेष प्रावधान है और यह धारा सीधे हिट एंड रन मामलों पर लागू होती है जिसके चलते पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। इसमें कहा गया है कि जो कोई भी लापरवाही से किए गए किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, तो उसे दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। धारा 338 उस स्थिति में सजा का प्रावधान करती है जब पीड़ित की मृत्यु नहीं हुई हो लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो। इसमें कहा गया है कि जो कोई भी जल्दबाजी या लापरवाही से काम करके किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाएगा, उसे 2 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। मोटर वाहन अधिनियम 1988 भी हिट एंड रन के मामलों में भी लागू होता है। इस कानून में धारा 161, 134(ए) और 134(बी) हिट एंड रन के मामलों से संबंधित हैं।
    धारा 161 में हिट एंड रन के पीड़ितों को मुआवजे का प्रावधान है जो मृत्यु के मामले में 25,000 जबकि गंभीर चोट के मामले में 12,500 है। धारा 134(ए) के अनुसार, दुर्घटना करने वाले ड्राइवर को घायल व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करने की आवश्यकता होती है। वहीं धारा 134(बी) में जिक्र है कि चालक को उस दुर्घटना से संबंधित जानकारी यथाशीघ्र पुलिस अधिकारी को देने की आवश्यकता है अन्यथा चालक को दंडित किया जाएगा।
    0 आंकड़े क्या कहते हैं?
    सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यह चौंकाने वाली बात है कि देश में सड़क दुर्घटनाओं में हिट-एंड-रन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2020 में कुल 52,448 हिट एन्ड रन के मामले सामने आए जिसमें 23,159 लोगों की जान चली गई। वहीं, 2021 में यह आंकड़ा बढ़ा और इस साल ऐसी 57,415 घटनाएं हुईं जिनमें 25,938 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
    0 विरोध इस बात का हो रहा
    नए नियम आने से ड्राइवरों में इस बात का डर है कि यह उनके खिलाफ बनाया गया है। यदि नए नियम के अनुसार वो घायल की मदद करने जाते हैं ऐसे में उन्हें भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस का दावा है कि संशोधन से पहले जिम्मेदार व्यक्तियों से सुझाव नहीं लिए गए। इसके अलावा देश में एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल का अभाव है। पुलिस वैज्ञानिक जांच किए बिना ही दोष बड़े वाहन पर मढ़ देती है। (साभार)

    - Advertisement -
            Share This Article
            Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link Print
            Share
            Previous Article IGT में छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया,अबुझमाड़ मलखम्ब अकादमी के हुनरमंद खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री ने सराहा
            Next Article Voter list में नाम जोड़ने/काटने/संशोधन का कार्य 6 से 22 जनवरी तक
            KORBA:मॉल रोड बनाने में सहयोग करें पावर हाउस रोड के व्यापारी
            03/05/2026
            KORBA:घर में जबरन घुसी बहनें, प्रार्थिया के भाई से शादी कर लेने दावा
            03/05/2026
            KORBA:हेड मास्टर कौशिक सेवानिवृत्त, विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया
            03/05/2026
            हाल-ए-कोरबा: व्यवस्था पर हावी होती हठधर्मिता…!
            02/05/2026
            KORBA:सुनार सहित 6 गिरफ्तार,सोने का बिस्किट,जेवरात व नगदी बरामद
            02/05/2026
            KORBA में 4 मई को “व्यापारियों का महाकुंभ” BNI Crystals चैप्टर का भव्य शुभारंभ
            02/05/2026
            KORBA:एक्टिवा से निकला नाग,सड़क पार कर बाइक में घुसा
            02/05/2026
            शोक: देवप्रकाश शर्मा (लाला) का निधन
            02/05/2026
            Saty Sanwad

            SATYANARAYAN PAL

            Editor

            Mob : +91-9151305911
            Email : satysanwad2023@gmail.com
            Address : Korba Chhattisgarh 495677

            UDYAM-CG-10-0016159

            Important Page

            • About Us
            • Contact Us
            • Disclaimer
            • Privacy Policy
            • Terms and Conditions

            श्री गणेशाय: नमः

            छत्तीसगढ़ की खबरें प्राथमिकता से प्रकाशित की जाती है, जिसमें जनहित की सूचनाएँ, समसामयिक घटनाओं पर आधारित खबरें प्रकाशित की जाती है। साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री (समाचार / फोटो / वीडियो आदि) शामिल होती। SATYSANWAD.COM इस तरह के सामग्री के लिए कोई जिम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। साइट में प्रकाशित किसी सामग्री के लिए संबंधित खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा। इसके लिए SATYSANWAD.COM या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक एवं संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी।

            © Copyright 2025, All Rights Reserved | SATYSANWAD | Managed by Nimble Technology

            Welcome Back!

            Sign in to your account

            Username or Email Address
            Password

            Lost your password?