नई दिल्ली/रायपुर। पहलगाम में हुए आतंकी हमले व पिछले कुछ दिनों में सुरक्षाव्यवस्था को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच गृह मंत्रालय ने 7 मई 2025 को देशव्यापी नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया है। देश के विभिन्न राज्यों के 248 बड़े शहरों में होने वाला यह पहला राष्ट्रीय नागरिक रक्षा अभ्यास है जो 1971 के बाद किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में यह दुर्ग जिले में तय किया गया है। गृह मंत्रालय ने इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य नागरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाना, किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया की त्वरित क्षमता का परीक्षण करना और आम जनता को आत्म-सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना बताया है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा गंभीरता से लेते हुए यह मॉक ड्रिल निर्धारित की गई है, ताकि देश की तैयारियों की समीक्षा की जा सके।
0 प्रमुख अभ्यास
इस मॉक ड्रिल में युद्धाभ्यास जैसे विभिन्न परिदृश्यों को लागू किया जाएगा। मुख्य अभ्यासों में शामिल हैं:
एयर रेड वार्निंग सायरन परीक्षण: हवाई हमले या अन्य आपात स्थितियों में नागरिकों को चेतावनी देने के लिए एयर रेड सायरन बजाए जाएंगे। इससे सभी को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की जानकारी मिल सकेगी।
नागरिकों एवं छात्रों का प्रशिक्षण: नागरिकों एवं छात्रों को ‘डक, कवर, होल्ड’ जैसी आत्म-रक्षा तकनीकें सिखाई जाएंगी और आपातकाल में स्वयं की सुरक्षा एवं दूसरों की सहायता के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ब्लैकआउट अभ्यास: दुश्मन के हमले की स्थिति में नजरबंदी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए फाल्स अलार्म के रूप में क्रैश ब्लैकआउट किया जाएगा – यानी सभी अतिरिक्त रोशनी बंद कर दी जाएगी।
महत्वपूर्ण भवनों का छलावरण: संवेदनशील संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, बुनियादी ढाँचे आदि को सुरक्षा की दृष्टि से छुपाने (कैमोफ्लाज) के उपाय किए जाएंगे।
निकासी योजनाओं का अभ्यास: आपातकाल में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए निकासी मार्गों और योजनाओं की रिहर्सल की जाएगी।
ये अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अनुभव देने और आपदा प्रबंधन तंत्र की कार्यप्रणाली की जांच करने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं।
0 नागरिकों की भूमिका
आपातकालीन तैयारी: नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे पहले से ही अपने घरों में एक आपातकालीन “गो-बैग” तैयार रखें, जिसमें पहचान-पत्र, आपातकालीन दवाइयाँ, पानी और सूखा भोजन आदि रखें। साथ ही अपने परिवार के साथ निकासी योजना का अभ्यास करें और निकटतम आश्रय स्थल की जानकारी रखें।
शांत एवं सहयोगपूर्ण व्यवहार: ड्रिल के दौरान अचानक बजने वाले सायरनों या अलर्ट पर घबराए नहीं; अधिकारियों और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करें। जरूरत पडने पर बुजुर्गों, विकलांगों या जरूरतमंदों की सहायता करें। यह सभी कदम सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं।
प्रशिक्षण में भागीदारी: स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजित लाइव डेमो और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लें। स्कूलों, कॉलेजों एवं कार्यालयों में आयोजित आत्म-सुरक्षा से संबंधित आयोजनों में शामिल होकर खुद को और अपने साथियों को प्रशिक्षित करें।
जागरूकता और सहयोग: अपने पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को भी इस अभ्यास के बारे में जानकारी दें एवं उन्हें सहयोग के लिए प्रोत्साहित करें। यदि अभ्यास के दौरान कोई जानकारी मिले तो घबराने की बजाय इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारी से करें। अफवाहें फैलने से बचें और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समाचार साझा करने से परहेज करें।
0 आम जनता से स्पष्ट अपील
घबराने की आवश्यकता नहीं: गृह मंत्रालय ने बताया है कि मॉक ड्रिल के दौरान यदि एयर रेड अलार्म या अन्य चेतावनी सायरन सुनाई दें तो यह केवल अभ्यास है, इसलिए शांत रहें और घबराएं नहीं। “यह एक अभ्यास है” – यह संदेश हर जगह स्पष्ट रहेगा।
निर्देशों का पालन करें: विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी जनता से आग्रह किया है कि मॉक ड्रिल को सहयोगात्मक रूप से लें। एक सेवानिवृत्त जनरल ने कहा, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है… अधिकारियों के साथ सहयोग करें और यदि आप इन अभ्यासों का सही तरीके से पालन करते हैं तो किसी भी नागरिक को कुछ नहीं होने वाला है”।
सुरक्षा को प्राथमिकता दें: यह अभ्यास हमारी सामूहिक सुरक्षा के हित में किया जा रहा है। सभी को चाहिए कि वे निर्देशानुसार कार्मिकों के साथ मिलकर स्वयं की और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अफवाहों पर विश्वास न करें और सरकारी सूचना स्रोतों से ही अपडेट प्राप्त करते रहें।
0 अतिरिक्त सुझाव 0
आपातकालीन नंबर सहेजें: मोबाइल में पुलिस (112), अग्निशमन (101) और एम्बुलेंस (102) जैसे आपातकालीन संपर्क नंबर पहले से सेव कर लें।
अफवाहों से बचें: केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और कहीं सुनने में आए अवांछित समाचार या अफवाहों को साझा करने से बचें।
स्कूल और कार्यालय की तैयारी: स्कूल, कॉलेज, कार्यालयों में भी सुरक्षा अभ्यास के महत्व पर चर्चा करें और सभी से कहें कि वे अभ्यास में पूर्ण सहयोग दें। प्रबंधन को चाहिए कि वे छात्रों एवं कर्मचारियों को अग्रिम सूचना देकर अभ्यास के लिए तैयार करें।
परिवार सहित भागीदारी: परिवार के सदस्यों (बच्चे, बुजुर्ग, पालतू) को अभ्यास में शामिल करें और गृह अभ्यास (कैसे सुरक्षित जगह पर जाना है, इत्यादि) परिवार के साथ मिलकर करें। इससे सभी सहज रहेंगे और वास्तविक आपातकाल में तैयार होंगे।
सहनशीलता बनाए रखें: अभ्यास के दौरान अपने घर या वाहन में अतिरिक्त लाइट बंद रखें, शांत रहें और स्थान तय होने पर तुरंत उसी पर इकट्ठा हों। शाम 7-8 बजे के बीच लिफ्ट का उपयोग न करें तथा रूटीन व्यवस्था को बाधित किए बिना ड्रिल का सहयोग करें।
यह मॉक ड्रिल सरकार और सुरक्षा तंत्र की आपकी सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का हिस्सा है। कृपया इस अभ्यास को गंभीरता से लें, सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर सुझाए गए कदम अपनाकर स्वयं को सुरक्षित रखें।
*स्रोत: गृह मंत्रालय की जारी अपील और समाचार रिपोर्टों।