0 सत्यसंवाद ने लाया संज्ञान में, तब चंद हजार लौटा कर क्या सरकार पर एहसान किया…? सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन जरूरी
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कोरबा-करतला। हर हाथ को उनके क्षेत्र में काम देने की केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण व महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा में जमकर सेंध लगाई जा रही है। कोरबा जिले में जिला से लेकर ब्लॉक स्तर पर अंगद की तरह जमे बैठे चंद भ्रष्ट प्रवृत्ति के लोग योजना के नाम पर हितग्राहियों को आधा-अधूरा तो कई मामलों में बिना लाभ पहुंचाए ही योजना की राशि आहरण कर गबन कर रहे हैं। पूर्व में उजागर हुए मामलों और की गई कार्रवाई से यह बातें प्रमाणित होती रही हैं। घोटाले की कड़ी में सत्यसंवाद ने कोठा कोटना निर्माण में गड़बड़ी का मामला प्रमुखता से उजागर किया और जब जांच हुई तो यह प्रमाणित भी हुआ। नियमों से परे जाकर मनरेगा में ठेका सिस्टम चलाया जा रहा है। मनरेगा की विभागीय मिलीभगत से सुनियोजित ढंग से सरकारी धन का गबन किया गया और जब खुलासा हुआ तो चंद हजार रुपए लौटाकर अपनी कर्तव्यनिष्ठा जाहिर कर इतिश्री कर ली गई। ऐसे में भ्रष्ट लोगों की मंशा पर कोई ठोस प्रहार नहीं हुआ जिससे यह लोग न जाने ऐसे कितने भ्रष्ट कारनामों को अंजाम देकर सरकारी धन को हजम कर चुके हैं और आगे भी न जाने कितनों की राशि हड़प करेंगे?
यह मामला कोरबा जिले के करतला विकासखंड का है,जहां कि ग्राम पंचायत बेहरचुंवा निवासी देवनाथ पिता राम सिंह का पक्का फर्श कोटना निर्माण वर्ष 2023 में स्वीकृत हुआ, जिसे रोजगार सहायक राजनंदनी महंत द्वारा बेहरचुंवा से लगभग आठ से दस किलोमीटर दूर दूसरे ग्राम पंचायत नवापारा में बने पक्का फर्श कोटना निर्माण का फर्जी जियो टैग करके 12 हजार 376 रूपये का फर्जी मजदूरी भुगतान करा दिया गया।

नवापारा के निर्माण में बेहरचुवा लिखवाने और जियो टैग करने के बाद उसे पोतवा दिया गया लेकिन सफेदी सूखने के साथ नाम साफ नजर आता रहा। आज तक बेहरचुंवा ग्राम में हितग्राही देवनाथ पिता रामसिंह का पक्का फर्श कोटना निर्माण शुरू भी नहीं हुआ। इस तरह से काम कराए बगैर ही फर्जी मजदूरी और कार्य होना दर्शाकर हजारों रुपए की चपत लगाई गई। इस तरह से न जाने और भी कितने फर्जीवाड़ा किये गए होंगे।
0 जांच में यह तथ्य उजागर हुए
सत्यसंवाद द्वारा प्रकाशित समाचार और जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सावित्री अजय कंवर की शिकायत पर तथ्यों की जांच कराई गई। करतला जनपद सीईओ द्वारा गठित जांच टीम में अधिकारी आलोक कुमार गुप्ता (सा.वि.वि.अधि.) जनपद सिंह राठिया (वरि.करा.रो.अधि.), लोकविजय (तकनीकी सहायक) ‘जनपद पंचायत करतला को नियुक्त किया गया। उक्त संबंध में जांच दल के प्रतिवेदन एवं सचिव, रोजगार सहायक के बयान अनुसार देवनाथ पिता रामसिंह ग्राम पंचायत बोकरदा (बेहरचुवा) में स्वीकृत पक्का फर्श एवं कोटना निर्माण कार्य में सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा कार्य में जियोटेग, मस्टर रोल जारी हेतु मांग पत्र कार्यालय में नहीं दिया गया है। न ही कार्य में भुगतान से संबंधित जानकारी नहीं थी। उक्त कार्य में ठेकेदार अजय कुमार अग्रवाल एवं तत्कालिन ऑपरेटर दीपक कुमार अग्रवाल की सांठ-गांठ कर (उक्त ऑपरेटर संबंधित पंचायत का प्रभारी नहीं होने के उपरांत भी) मस्टर रोल जारी कर राशि आहरित कर लिया गया। जिसे संज्ञान में आते ही रोजगार सहायक द्वारा उक्त आहरित राशि को वसूल कर राज्य के नोडल खाता में जमा करा दिया गया है। पावती संलग्न किया गया है। इसके साथ ही उक्त शिकायत को नस्तीबद्ध करने हेतु प्रतिवेदन जिला पंचायत सीईओ की ओर प्रस्तुत कर दिया गया है।
0 मनरेगा में कार्य और भुगतान का यह है सिस्टम,विभागीय सांठगांठ बिना सम्भव नहीं
विभागीय सूत्र ने बताया कि योजना में स्वीकृत काम शुरू करने से पहले पंचायत से मांग पत्र देते हैं जिसमें रोजगार सहायक, सचिव एवं सरपंच का संयुक्त हस्ताक्षर होता है। उसके बाद मस्टर रोल जनरेट होता है फिर मस्टर रोल में कार्य करने वाले मजदूरों का हाजिरी डालने के बाद रोजगार सहायक, सचिव, सरपंच का हस्ताक्षर करके जमा किया जाता है। जमा होने के बाद मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी जनपद एवं सीईओ का डिजिटल हस्ताक्षर करके उसे एफटीओ किया जाता है उसके बाद ही मजदूरों के खाते में मजदूरी भुगतान होता है।
इसी तरह ग्राम पंचायत में ठेकेदार नहीं होते बल्कि ग्राम पंचायत खुद निर्माण एजेंसी होती लेकिन उक्त मामले में रोजगार सहायक को बचाने के लिए कथित ठेकेदार और पुराने आपरेटर के ऊपर सारा ठीकरा फोड़ दिये जो जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह पैदा करता है। सबसे बडी चौकाने वाली बात यह है कि उक्त मामले की जानकारी रोजगार सहायक को समाचार प्रकाशन के बाद हुई और राशि दूसरे दिन जमा करा दिया गया जो जांच का विषय है। फर्जी हस्ताक्षर करने वाले ठेकेदार और आपरेटर के खिलाफ अपराध पंजीबद्घ नहीं कराया गया, जो सोचने वाली बात है।
वैसे,उक्त ठेकेदार और आपरेटर द्वारा रोजगार सहायक, सचिव, सरपंच, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी, सीईओ का फर्जी हस्ताक्षर कर पाना संभव ही नहीं है किन्तु जो फर्जी आहरण हुआ है, उसके बाद किसी के द्वारा फर्जी हस्ताक्षर की पुलिस में आखिर शिकायत क्यों नहीं कराई गई? अगर मास्टररोल का कॉपी और एफटीओ में हुये हस्ताक्षर की जांच की जाय तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। फिलहाल, करतला जनपद पंचायत को ठेकेदार चलाते हैं इस बात को यह जांच प्रतिवेदन प्रमाणित करता है।
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