कोरबा। देश की अस्मिता, आन-बान और शान का प्रतीक तिरंगा ध्वज अपने आप में ही गौरवपूर्ण है। इसके प्रति सम्मान और इसे लहराने का जज्बा हर भारतीय नागरिक के दिल में होता है/होना भी चाहिए लेकिन इस जज्बे को जाहिर करने के दौरान तिरंगा झंडा के सम्मान का ख्याल किया जाना बेहद जरूरी है। यदि सम्मान ना कर सकें तो अपने जज्बे पर काबू कर लेना चाहिए किंतु झंडे को अपमानजनक तरीके से लहराकर, कहीं भी लगा कर, किसी भी तरीके से प्रदर्शित कर देने से बचना चाहिए।
आजादी का जश्न हो या फिर गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व, इन दोनों अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज लहराने के लिए होड़ सी मच जाती है। राजनीतिक दल से जुड़े लोग अपनी देशभक्ति की भावनाओं को रैली-यात्रा आयोजनों के जरिए दर्शाते हैं तो दूसरी तरफ नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रध्वज को लोग अपने घरों, प्रतिष्ठानों में भी फहरा सकते हैं, सार्वजनिक जगह पर भी लगा सकते हैं लेकिन इसके लिए मापदंड तय किए गए हैं ताकि तिरंगा झंडा का अपमान ना हो।
इसे राष्ट्रीय त्यौहार पर सम्मान के साथ फहराया जाए या फिर अपनी भावना प्रदर्शित करते हुए जगह-जगह पर लगाया जाए, दोनों ही सूरतों में सम्मान जरूरी है। तिरंगा झंडा कभी भी झुकाकर नहीं रखना चाहिए, टेढ़ा-मेढ़ा नहीं लगाना चाहिए, झंडा कटा- फटा नहीं होना चाहिए, वह बिल्कुल सीधा लगा रहे, इसका ध्यान रखना चाहिए। झुका हुआ झंडा जहां शोक का प्रतीक होता है तो वहीं कटा- फटा, टेढ़ा-मेढ़ा झंडा अपमानजनक।

कोरबा की सड़कों पर स्वतंत्रता दिवस के पूर्व् दिवस ऐसे ही नजारे कई जगह पेश आए जो इस बात की गवाही देते रहे कि तिरंगे झंडे का किस तरह से लोगों ने अपमान किया है। रैली निकली तो इसमें शामिल कुछ लोगों ने डिवाईडरों के आसपास झंडे को किसी भी तरीके से फंसा कर छोड़ दिया। लोगों ने अपने दुकानों के ऊपर झंडे लगाए तो इसे कई ने सीधा रखने की बजाय झुका दिया। जिसने जैसा पाया, अपनी देशभक्ति प्रदर्शित जरूर की लेकिन कई जगह पर सम्मान की बजाय अपमान साफ तौर पर देखने को मिला। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है बल्कि ऐसा अक्सर होता आया है।
झंडा चाहे राष्ट्रीय ध्वज हो या फिर किसी भी पार्टी का या धर्मस्थल का ध्वज हो, वह हमेशा ऊंचा, सीधा, साफ-सुथरा होना ही चाहिए तभी उसके प्रति सच्चा समर्पण, श्रद्धा और विश्वास का भाव दर्शित होता है।

झंडा संहिता के प्रमुख प्रावधान:
सार्वजनिक प्रदर्शन:
जनता, निजी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों को सभी दिनों और अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करने की अनुमति है, बशर्ते वे झंडे की गरिमा का सम्मान करें।
सरकारी भवनों पर:
सरकारी भवनों पर झंडा सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, और विशेष अवसरों पर रात में भी फहराया जा सकता है।
शोक:
झंडे को केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर आधा झुका दिया जाता है।
अन्य झंडे:
किसी अन्य झंडे को राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाया जाना चाहिए।
नुकसान:
यदि झंडा क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसे सम्मानपूर्वक नष्ट कर दिया जाना चाहिए, अधिमानतः जलाकर।
झंडा संहिता का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है ताकि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान और गरिमा बनी रहे।