0 समर्थगुरु धारा मैत्री संघ का एकदिवसीय ध्यान योग एवं सत्संग शिविर आयोजित
कोरबा। ऊर्जाधानी में 17 अगस्त 2025, रविवार को समर्थगुरु धारा मैत्री संघ कोरबा द्वारा एकदिवसीय ध्यान योग एवं सत्संग शिविर, टॉप इन टाऊन होटल, आई टी आई, चौक में आयोजित किया गया। आयोजनकर्ता प्रशांत विश्वकर्मा द्वारा बताया गया कि कार्यक्रम में समर्थ गुरु धारा मैत्री संघ बिलासपुर से आए स्टेट कोऑर्डिनेटर आचार्य संतोष चंद्र एवं आचार्य पी पी सिंह, तथा सूरजपुर से आचार्य मां भक्ति पूर्णिमा द्वारा योग, ध्यान एवं सत्संग का सत्र लिया गया।
स्टेट को-ऑर्डिनेटर एवं आचार्य संतोष चंद्र द्वारा कार्यक्रम का शुभ आरंभ किया गया और प्रथम सत्र में ब्रह्म नाद ध्यान प्रतिभागियों को कराया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि नाद क्या होता है तथा अंतर चेतना एवं अंतर आकाश में विलीन होना सिखाया गया। आचार्य संतोष चंद्र द्वारा सत्संग में बताया गया कि यह एक दिवसीय कार्यक्रम मात्र एक झलक है परमात्मा की। जब कोई व्यक्ति एक कदम परमात्मा की ओर बढ़ता है तो परमात्मा उसकी ओर हजार कदम बढ़ाता है। व्यक्ति की प्यास उसको इस शिविर तक लेकर के आई है क्योंकि निमंत्रण तो हजारों लोगों तक पहुंचे लेकिन जिसके भीतर प्यास होती है वही इस शिविर तक पहुंच सका है। परम गुरु ओशो एवं समर्थ गुरु बड़े बाबा की कृपा से यह एक दिवसीय ध्यान कार्यक्रम कोरबा में बहुत ही लंबे समय बाद आयोजित हुआ है।
0 मन का भोजन ध्यान है

दूसरे सत्र में बिलासपुर से आए आचार्य पी सिंह द्वारा प्रतिभागियों को कुंडलिनी ध्यान कराया गया। आचार्य द्वारा बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में कुंडलिनी ऊर्जा होती है और वह कुंडली नहीं शक्ति सर्प के समान ढाई कुंडल मार के नीचे की तरफ मुख करके सोई हुई अवस्था में होती है।ज्ञान के माध्यम से उस सोई हुई ऊर्जा को होशपूर्वक जगाया जाता है और ऊर्ध्व गण करके आज्ञा चक्र से होते हुए सहस्त्र चक्र तक की यात्रा की जाती है। आज के व्यस्ततम जीवन में ज्ञान की अत्यंत आवश्यकता है। मनुष्य अपने भौतिक शरीर को तो भोजन कराता है, इस प्रकार मन का भोजन ध्यान है। ध्यान ही एकमात्र मार्ग है प्रभु तक पहुंचाने का। ज्ञान की गहराईयों में जब चेतन उतरती है तो एक समाधि की अवस्था प्राप्त होती है उस स्थिति में कुंडली ऊर्जा सहस्रार चक्र पर स्थित होती है।
तीसरे एवं अंतिम सत्र में आचार्य मां भक्ति पूर्णिमा द्वारा प्रतिभागियों को कीर्तन ध्यान कराया गया। चैतन्य महाप्रभु ने परमात्मा को नृत्य एवं कीर्तन के माध्यम से जाना था, वे कीर्तन में इस तरह लीन हो जाते थे कि घंटे कीर्तन करते रहते थे। कीर्तन की पूरी प्रक्रिया में व्यक्ति जब परमात्मा के प्रति अहोभाव प्रकट करते हुए नृत्य (कीर्तन) करता है और जब दोनों हाथों से ताली बजाता है तो एक ऊर्जा उत्पन्न होती है और संगीत के साथ जैसे-जैसे उसकी गति बढ़ते चले जाती है तो पूरा का पूरा शरीर के रोम-रोम जागृत हो जाते हैं। इस ऊर्जा की जागृत अवस्था में जब साधक दूसरे चरण में (शिथिल होकर के बैठना) होता है तो सहज रूप से साधक की ऊर्जा मूलाधार चक्र से उठती हुई आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र की ओर बहने लगती है जिससे साधक को ध्यान की अवस्था उपलब्ध होती है।
प्रतिभागियों हेतु शिविर में सुबह के स्वल्पाहार एवं चाय तथा दोपहर के भजन एवं शाम के चाय की व्यवस्था थी।
0 अगला ध्यान योग शिविर चाम्पा में
शिविर में चाम्पा से आए आचार्य डॉ. के आर सिंह द्वारा अनुभव को बताते हुए यह बताया गया कि आगामी माह सितंबर 2025 में 5 तारीख से लेकर 7 तारीख तक चाम्पा में ध्यान योग एवं सुरती योग का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। ध्यान योग का कार्यक्रम प्रथम तल का कार्यक्रम है। इस शिविर में भाग लेने हेतु अग्रिम पंजीयन 9617634341 नंबर पर फोन करके किया जा सकता है। ध्यान योग के कार्यक्रम में जो हम एक दिवसीय कार्यक्रम में ध्यान की जो छोटी सी झलक हम पाते हैं उसकी गहराईयों में उतरने की विधि सिखाई जाती है। डॉक्टर सिंह द्वारा बताया गया कि एक बार व्यक्ति ओंकार को, परमात्मा की ध्वनि को अगर सुन ले तो फिर उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आता है। अब वह व्यक्ति वही व्यक्ति नहीं रह जाता जो वह ध्यान योग करने के पहले था। सतगुरु की कृपा से अधिकृत आचार्य द्वारा प्रसाद स्वरूप ओंकार दीक्षा नए साधकों को दी जाएगी। ध्यान योग के कार्यक्रम में अष्टांगिक योग और जीवन जीने की कला तथा ध्यान की गहराईयों में प्रवेश करने की विधियां सिखाई जाएंगी।
0 112 साधकों ने भाग लिया

इस शिविर में बिलासपुर ,चांपा , कोरबा के 112 साधकों ने भाग लिया। फीडबैक सेशन में पुरानी साधिका का मां उपासना द्वारा कोरबा के आयोजनकर्ताओं को इस शिविर के आयोजन हेतु धन्यवाद प्रकट किया गया। उन्होंने कहा ओशो प्रेमियों को जोड़ने का एक अवसर प्राप्त हुआ और ज्ञान की अलख कोरबा में अब परम गुरु ओशो और समर्थ गुरु के आशीर्वाद से जग गई है। जो निरंतर बहती रहेगी। समापन उद्बोधन में स्टेट कोऑर्डिनेटर संतोष चंद्र द्वारा सभी को साधुवाद देते हुए आगामी शिविर में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित किया गया।
आयोजन कर्ताओं में मुख्य भूमिका स्वामी प्रशांत विश्वकर्मा, स्वामी वीरू गुप्ता,स्वामी जय साहू, स्वामी मुकेश विश्वकर्मा, जोहान चौहान, तेन सिंह, स्वामी अनिल शर्मा की रही।