कोरबा। नशीली दवा की बिक्री करते हुए पकड़े गए दो युवकों को दोषसिद्ध पाए जाने पर सश्रम कारावास और अर्थदण्ड से दंडित किया गया है। विशेष न्यायाधीश ने उनके कृत्य को सहानुभूति के लायक नहीं माना है।
विशेष लोक अभियोजक टीकम साव ने बताया कि घटना दिनांक 25.09.2021 को थाना कुसमुण्डा के सहायक उपनिरीक्षक रफीक खान को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि मोटर सायकल क्रमांक सीजी-12-बी ए-7540 का चालक नशीला मनोत्तेजक कैप्सूल मोटर सायकल क्रमांक सीजी 12 ए एस 7245 के चालक के पास विकास नगर कैंटीन के पास बिक्री कर रहा है। उक्त सूचना के बाद मौके पर पहुंचकर पल्सर मोटर सायकल क्रमांक सीजी 12 ए एस-7245 एवं स्प्लेण्डर मोटर सायकल क्रमांक सीजी 12 सी ए-7540 के चालक को उनके मोटर सायकल के पास घेरा बंदी कर पकड़ा गया। पल्सर मोटर सायकल में चालक मोहन सिंह राजपूत उर्फ छोटू तथा स्प्लेण्डर मोटर सायकल चालक मनीष कौशिक था। मोहन सिंह की तलाशी में शर्ट के जेब में 4 स्ट्रीप एवं 2 स्ट्रीप अलग- अलग खुला हुआ कुल 6 स्ट्रीप में कुल 48 नग पाईवॉन स्पास कैप्सुल बरामद हुआ। आरोपी मनीष व मोहन के पास से Tramadol Hydrochloride घटक युक्त Pyeevon Spas Plus कैप्सुल 48 नग एवं 232 नग को बिना वैध अनुज्ञप्ति के विक्रय करने के प्रयोजन से अपने कब्जे में रखना पाया जाकर जप्त किया गया। पुलिस ने NDPS एक्ट की धारा 22 बी के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तारी करते हुए विवेचना बाद प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) श्रीमती गरिमा शर्मा ने दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को सुना। विचारण उपरांत दोषसिद्ध पाते हुए दोनों आरोपियों को 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास व 50-50 हजार रुपए का अर्थदण्ड से दंडित किया है। राशि का भुगतान न करने पर 6-6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताया जाएगा।
0 समाज पर कुप्रभाव, सहानुभूति को अनुचित माना न्यायाधीश ने
अभियोजन के अधिवक्ता टीकम साव ने न्यायधीश से कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर है। वर्तमान में नशीली दवाओं के विक्रय का अपराध क्षेत्र में बढ़ गया है तथा इसकी चपेट में कम आयु के बच्चे भी आ रहे हैं। अतः अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्तगण को कड़ी सजा दी जाये। अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता ने व्यक्त किया कि अभियुक्तगण के प्रति उदारता बरती जाये। दोनों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि- वर्तमान परिवेश में मादक एवं मनोत्तेजक पदार्थ के अवैध विक्रय, सेवन एवं परिवहन के अपराध में वृद्धि हुई है। यह एक सामाजिक बुराई है, जिसका कुप्रभाव समाज में वृहद रूप से विशेष कर युवा वर्ग पर पड़ रहा है। ऐसे प्रकरण में सहानुभूति अपनाया जाना उचित नहीं है। अतः प्रकरण की परिस्थिति एवं अभियुक्तगण से जप्तशुदा मात्रा को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्तगण को दंडित किया जाता है।