👉🏻 लाम पहाड़ के ग्रामीणों ने पकड़ी तस्करी तो हरकत में आया वन अमला
👉🏻 लेमरू निवासी राजू खान की भूमिका संदिग्ध,विभाग ने की खानापूर्ति
कोरबा। वन मंडल क्षेत्र के जंगलों को चोरों और तस्करों के हवाले छोड़कर मैदानी अमला चैन की बंशी बजा रहा है। कटघोरा और कोरबा, दोनों ही वन मंडल का हाल बेहाल है जहां बड़े पैमाने पर हरे-भरे वृक्षों को काट कर तस्करी कर रहे हैं लेकिन कार्रवाई नगण्य है।
ताजातरीन मामला कोरबा वन मंडल के लेमरू वन परिक्षेत्र अंतर्गत लामपहाड़-बडगांव क्षेत्र में उजागर हुआ है। यहां कक्ष क्रमांक पी 862 में हरे-भरे वृक्षों को काटा जाता रहा लेकिन इसका खुलासा लगभग 12 दिन बाद हुआ जब ग्रामीण एक सूचना पर हरकत में आए।
क्षेत्र के सक्रिय ग्रामीण ने बताया कि जंगल में मशीन के जरिए हरे-भरे वृक्षों की कटाई के संबंध में उसे 26 मई को जानकारी मिली थी। पहले तो लोगों ने सोचा कि यह वन विभाग का काम होगा लेकिन दूसरे दिन एक बारात के सिलसिले में जब सूचना दी गई की लामपहाड़ के रास्ते से होकर बोलेरो मत लाना क्योंकि लकड़ी ढुलाई में लगी ट्रैक्टर के कारण यह पूरा रास्ता खराब हो चुका है। इसके साथ यह भी जानकारी मिली कि इस रास्ते में बहुत सारे बाइक, ट्रैक्टर और ट्रक जैसा गाड़ी खड़ा है और लकड़ी लोड किया जा रहा है। इस सूचना पर ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाई और मौके पर पहुंचे। यहां आने पर ज्ञात हुआ कि लेमरू रेंज के बड़गांव के जंगल में पिछले करीब 12 दिनों से लड़कियों की कटाई हो रही है और उसे ढुलाई कर ले जाया जा रहा है।
👉🏻 राजू खान का नाम लिया,क्या है भूमिका…?

मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने जांजगीर जिले के पासिंग वाहन व ट्रैक्टर में मौजूद चालक से जानकारी लेना चाहा तो उन्होंने लेमरू निवासी राजू खान द्वारा लकड़ी लोड करने भेजना बताया। जब राजू खान से ग्रामीणों ने बात की तो उसने लकड़ियों को रायपुर ले जाना बताया और कहा कि किसी का परमिशन नहीं लगेगा। उसने ग्राम पंचायत के सरपंच से परमिशन लेने की बात सही और जब सरपंच ओकेश्वर पैकरा से ग्रामीण ने जानकारी ली तो उन्होंने ऐसा कोई भी किसी भी तरह का परमिशन देने से इनकार किया। बात-बात में धमकी-चमकी भी मिल गई। जब वाहन चालकों से कागज दिखाने को कहा गया तो उन्होंने दो कोरे कागज दिखाए जिसमें कुछ लिखा नहीं था।
👉🏻बीटगार्ड आया, घूम कर लौट गया,उसे कुछ नजर नहीं आया
ग्रामीण ने मोबाइल पर बीटगार्ड सुखसागर से लकड़ी कटाई के बारे में जानकारी ली तो उसने भी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि वह लामपहाड़ तो आया था और घूम -फिर कर चला गया लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया। इस बात से ग्रामीण नाराज हो गए और बीटगार्ड से सवाल किया कि 12 दिन से उसके क्षेत्र में वृक्षों की अवैध कटाई और वाहन लगाकर ढुलाई हो रही है,तब उसे इस बात का कैसे पता नहीं? ग्रामीण के द्वारा इस पूरे तस्करी को पकड़ लिए जाने के बाद मजबूरी में वन अमला हरकत में आया और फिर घटनास्थल पहुंचकर दो वाहनों समेत लकड़ियों की जप्ती रात 8:30 बजे बनाई गई।
👉🏻कठिन रास्ते ट्रैक्टर से फिर मालवाहन का इस्तेमाल
ग्रामीणों ने बताया कि लकड़ी चोर/तस्करों के द्वारा जंगल के भीतर मशीन से बड़े-बड़े वर्षों की कटाई कर उसे गिरा देने के बाद दूसरे दिन ट्रैक्टर लगाकर लकड़ियों को सामान्य सड़क तक लाया जाता और उसके बाद दूसरे वाहन में भरकर ले जाते रहे। इस मामले में काटे गए वृक्षों को करीब तीन-चार किलोमीटर घाटी रास्ता धमकीटिकरा से लाम पहाड़ तक ट्रैक्टर के माध्यम से लाया जाता रहा और इसके बाद लामपहाड़ से बड़ी पिकअप में लादकर चोर/तस्कर अपने ठिकाने तक ले जाते हैं।
👉🏻दो वाहन जप्त किए गए

ग्रामवासियों के द्वारा तस्करी पकड़ लेने के बाद मजबूरी में कार्रवाई करने के लिए पहुंचे वन अमले ने परिक्षेत्र सहायक बड़गांव,परिसर रक्षक बड़गांव, रेंज लेमरू की संयुक्त कार्रवाई 27 मई की रात 8:30 बजे करना बताया है। लामपहाड़ से धमकीटिकरा मार्ग पर पी 862 में सेमल के वृक्षों को काटकर ट्रैक्टर से परिवहन करना पाया गया। छह चक्का टाटा 1916 वाहन क्रमांक सीजी 11 बीएन 8798 को मौके पर परिवहन के लिए खड़ा होना पाया गया। उपस्थित चालक कोई कागजात लकड़ियों के संबंध में नहीं दिखा सके। इस तरह ट्रैक्टर सहित 6 चक्का मालवाहन और लकड़ियों को बरामद कर जप्त करते हुए लेमरू रेंज कार्यालय अग्रिम कार्रवाई हेतु ले जाया गया। ग्राम पंचायत बड़गांव तहसील अजगरबहार के अंतर्गत आने वाले ग्राम लामपहाड़ के लोगों की सक्रियता के कारण कुछ मात्रा में लकड़ियों की तस्करी तो पकड़ी गई लेकिन अवैध कटाई,अवैध परिवहन और लकड़ी चोरी के इस मामले में किस-किस को आरोपी बनाया जाता है, विभाग इस मामले की तह तक जाकर किस हद तक विवेचना करते हुए और आरोपियों व संलिप्त लोगों को प्रकरण में शामिल करती है, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं होगा कि थोड़ी बहुत कार्रवाई में ही पूरा मामला रफ़ा-दफा कर दिया जाए। वैसे इतना तो तय है कि पड़ोसी जिले के तस्कर/लकड़ी चोर स्थानीय तस्करों और वन विभाग के चंद मैदानी अमले तथा कुछ हद तक ऊपर के अधिकारियों की जानकारी में गोरखधंधा कर रहे हैं। ईमारती व औषधिय महत्व के वृक्षों की कटाई जिले के अन्य वन क्षेत्र में भी हो रही है।






