👉🏻 चोरी के मामले में भरी बरसात आखिर किसका सुराग तलाशता रहा डॉग…?
👉🏻 पुलिस अधिकारियों और डॉग मास्टर पर लोग उठाते रहे सवाल
कोरबा। जिला पुलिस बल में कार्यरत ट्रैकर डॉग बाघा अपनी खास विशेषता और काबीलियत के नाम से पहचाना जाता है। कोरबा जिले में ही नहीं बल्कि पड़ोसी जिलों में भी घटित गंभीर से गंभीर घटनाओं की गुत्थी सुलझाने में उसकी मदद ली जाती रही है। ट्रैकर डॉग बाघा आज तक किसी भी मामले में फेल नहीं हुआ बशर्ते उसे अपराधी का कोई छोटा या बारीक सुराग मिल गया हो। इतनी खास काबीलियत रखने वाले ट्रैकर डॉग की काबीलियत पर आखिर सोमवार को ऐसा क्या हुआ कि पुलिस के अधिकारियों ने आम लोगों के बीच मजाक बना कर रख दिया। उसकी काबीलियत को सवालों के घेरे में ला दिया गया, जब उसे भरी बरसात में अज्ञात चोरों का सुराग तलाशने के लिए फील्ड में उतारा गया।
यह घटनाक्रम देखने वाले प्रत्यक्षदर्शियों, जो कि बाघा की खूबियों से वाकिफ हैं और उसके बारे में जानते हैं व इस बात को भी समझते हैं कि अपराधी का सुराग/सबूत अक्सर पानी में धुल जाता है , खासकर सामान्य डॉग भी पानी फिरने पर गंध को सूंघ नहीं पाता, तब भी भला बाघा से ऐसी उम्मीद की गई।
👉🏻 यह है मामला

दरअसल, कुसमुंडा थाना के निकट पीछे अधिकारियों की कॉलोनी में एक घर में घुस कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। एक बड़े अधिकारी के घर में यह चोरी हुई और सोमवार की दोपहर कुसमुण्डा पुलिस ने यहां तफ्तीश शुरू की। जांच-पड़ताल की कड़ी में साइबर सेल को भी मदद के लिए तलब किया गया। पुलिस के ट्रैकर डॉग बाघा को भी मदद के लिए बुलाया गया। अधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए दोनों ही टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल और इसके आसपास का अवलोकन/ निरीक्षण कर सुराग तलाशने की कोशिश की गई। इस कोशिश के दौरान यहां आस-पास के लोग व डॉग को देखकर उत्सुकतावश भी लोग इकट्ठे हो गए थे। लोगों ने डॉग के आसपास सुराग तलाशने का फोटो-वीडियो भी बनाया लेकिन डॉग को कोई सुराग नहीं मिला। अब मानवीय और तकनीकी आधार पर चोरों के सुराग तलाशे जा रहे हैं।
👉🏻 बाघा के लिए बारिश बनी बाधा,बाकी लोग भी डिस्टर्ब कर चुके थे घटनास्थल
हमारे समाचार सहयोगी ने बताया कि अज्ञात चोरों ने पीछे के रास्ते से घर में प्रवेश किया और आलमारी को तोड़कर नगदी व जेवरातों पर हाथ साफ किया। जांच की कड़ी में पुलिस कर्मियों सहित परिजनों ने घटनास्थल कमरों के कई चक्कर लगा लिए थे, सामानों को भी छू लिया गया था और इस पर सबसे बड़ी बात यह कि भरी बरसात में बाघा को भेज कर घटना स्थल पर सुराग तलाशने का काम कराया गया जो कि नामुमकिन था। थाना के एक सूत्र ने बताया कि ट्रैकर डॉग बाघा बारीक से बारीक गंध को महसूस कर आरोपी की तलाश में माहिर है लेकिन घटना स्थल कमरे से गंध महसूस करने के बाद बाहर की ओर भागे चोरों का सुराग तलाशना उसके लिए असंभव सा था, क्योंकि बारिश ने सुराग पर पानी फेर दिया। अब ऐसे में बाघा की काबीलियत कहीं ना कहीं अधिकारियों की अदूरदर्शितापूर्ण लिए गए निर्णय और दिए के निर्देश के कारण लोगों के बीच मजाक बनकर रह गई। आखिर भरी बरसात में बाघा को फील्ड में उतारने का जोखिम क्यों उठाया गया? वह बेजुबान है लेकिन काबीलियत से भरा है और उसकी काबीलियत को समझना, मौके की नजाकत को भांप कर काम करना अधिकारियों की दूरदर्शिता होनी चाहिए लेकिन इस मामले में ऐसा कहीं भी नजर नहीं आया। सवाल जायज है कि आखिर जानकार अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा निर्देश क्यों दिया? क्या सिर्फ इसलिए कि बाघा थोपे गए निर्देशों पर आपत्ति बेजुबान होने के कारण नहीं कर सकता..? क्या बाघा को मौके पर भेज कर पुलिस अधिकारियों ने किसी को संतुष्ट करने में भूमिका निभाई? बारिश में भीगते बाघा की सेहत का ख्याल क्यों नहीं रखा गया?







