नई दिल्ली/कोरबा। कोरबा जिले के कोयला खदानों से प्रभावित भू-विस्थापितों के समर्थन में युवा कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष विकास सिंह अपने साथियों के साथ शामिल हुए और एसईसीएल (SECL) की कथित मनमानी, प्रदूषण तथा भू-विस्थापितों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार और प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में “SECL जवाब दो” लिखी तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। साथ ही “चौकीदार को बोलो, मालिक आए हैं” जैसे नारों से जंतर-मंतर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से कोरबा के खदान प्रभावित ग्रामीण और भू-विस्थापित परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कोरबा देश को ऊर्जा देने वाला प्रमुख क्षेत्र है, लेकिन यहां के स्थानीय लोग विस्थापन, प्रदूषण, रोजगार की कमी और अधूरे पुनर्वास जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसईसीएल द्वारा प्रभावित परिवारों की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीण जिला अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि कोयला खदानों के विस्तार के कारण हजारों परिवारों की जमीनें अधिग्रहित हुईं, लेकिन आज भी अनेक प्रभावित परिवार उचित मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार से वंचित हैं। वहीं, खदानों से फैल रहे धूल और प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।
युवा कांग्रेस ने मांग की कि भू-विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लंबित पुनर्वास और मुआवजा मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय तत्काल लागू किए जाएं।
प्रदर्शन के अंत में कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि एसईसीएल प्रबंधन और केंद्र सरकार ने जल्द ही प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरबा के भू-विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुकी है।








