0 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर दोबारा खुली बंद फाइल
0 पिता की मौत के 5 साल बाद बेटे के बयान पर हुई एफआईआर
कोरबा। मौत के जिस मामले की फाइल पुलिस ने नस्तीबद्ध कर दी थी,वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद 5 साल बाद फिर खुली। मृतक के पुत्र के बयान के आधार पर अब आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। मौत की वजह सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस बनी जिसमें सुरक्षागत लापरवाही सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक मामला थाना लेमरू का है। यहां दर्ज मर्ग क्रमांक 20/2021 में मृतक छन्दू किस्पोट्टा की मौत की जांच की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत को दुर्घटनात्मक (Accidental) बताया गया था व पुलिस ने मर्ग फाइल नस्तीबद्ध कर दिया।
बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से निर्देश मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट, कोरबा से मर्ग डायरी दोबारा खोलने की अनुमति ली गई। दुबारा जांच के दौरान मृतक के पुत्र राजकुमार किस्पोट्टा का पूरक बयान दर्ज किया गया।
उसने पुलिस को बताया कि 17 अगस्त 2021 को कुटुरूवा निवासी जोसेफ तिग्गा ने अपने घर के बाड़ी में बने सेप्टिक टैंक का सेंट्रिंग प्लेट हटाने के लिए उसके पिता सहित अन्य लोगों को बुलाया था। आरोप है कि बिना मास्क, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के मृतक को सेप्टिक टैंक में उतारा गया, जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से वह बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई।
हालांकि पूरक जांच में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जाने की बात सामने आने पर पुलिस ने इसे लापरवाही का मामला मानते हुए आरोपी जोसेफ तिग्गा के खिलाफ धारा 304-ए आईपीसी के तहत अपराध क्रमांक 28/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।





