👉🏻 3 साल बाद अब निर्माण के जांच की बात कही रोजगार सहायक ने,पैसा बीच से गायब
कोरबा। मनरेगा के तहत निर्माण कार्य कराने के 3 साल बाद भी हितग्राही को पूरी राशि नहीं मिली है। करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत कथरीमाल के रहने वाले गौतम प्रसाद ने इसी साल जून माह में कलेक्टर को शिकायत देकर निर्माण कार्य की बकाया 64 हजार रुपये की राशि दिलाने का आग्रह किया है। साथ ही संबंधित रोजगार सहायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। आश्चर्य है कि 3 माह बाद भी उसकी शिकायत अनिराकृत है। ऐसे में सरकारी योजना के क्रियन्वयन/ मापदण्ड पर सवाल लाजिमी है,खासकर तब जबकि मामला मनेरगा से जुड़ा हो। हालांकि जब सत्यसंवाद ने रोजगार सहायक धनऊ राम दिवाकर से बात की तो उन्होंने गौतम द्वारा कराए गए पक्का फर्श कोटना निर्माण की अब जांच कराने की बात कही कि क्या बना है, कितना बना है,उसकी जांच जनपद की टीम करेगी।
👉🏻सफेद झूठ बोल गया रोजगार सहायक
जब रोजगार सहायक से पूछा गया कि- हितग्राही गौतम को उसके कार्य, सामाग्री लगाने का पैसा जो बकाया 64 हजार बताया जा रहा है उसका भुगतान हो गया है कि नहीं, तब रोजगार सहायक ने कहा कि अभी नहीं दिए है,पहले जांच करेंगे कि उसने कितना काम किया है, जो राशि बता रहा है,वह लागत है कि कम है इसकी जांच की जाएगी। अब यहीं पर रोजगार सहायक का झूठ पकड़ा गया। दरअसल, जिस गौतम ने अपना बकाया भुगतान मांगा है उसके नाम से 61500 रुपए का भुगतान मनरेगा के रिकार्ड में दिखाया जा रहा है। गौतम के मुताबिक रोजगार सहायक ने उससे खर्च की रकम पूछी थी और नगद रकम ला कर देने का भरोसा दिया था। अब यह भरोसा टूटता दिख रहा है क्योंकि राशि तो निकल चुकी है किंतु गौतम के हाथ आई नहीं, बीच में गड़प हो गई।
👉🏻 जय आरती ट्रेडर्स असली खिलाड़ी
जब सत्यसंवाद ने इस मामले में सूत्रों के जरिये खंगाला तो ज्ञात हुआ कि मनरेगा शाखा में बैठे कुछ लोग मटेरियल सप्लायर फर्म के नाम से मिलीभगत कर खेला कर रहे हैं। गौतम के मामले में उसका मटेरियल का पैसा इसी फर्म जय आरती ट्रेडर्स को बिल दिनाँक 18 जून 2025 के मार्फ़त 61500 रुपए भुगतान किया गया है।
👉🏻 हितग्राही जानता तक नहीं, न कभी सामान लिया
अब इसमें भी पेंच यह है कि हितग्राही इस नाम की दुकान की जानता तक नहीं, सामान खरीदना तो दूर की बात। उसने गांव के निकट ग्राम पंतोरा से शीट व पाइप, गांव से रेती और एक अन्य स्थान से गिट्टी नगद में क्रय करना बताया। अब बड़ा सवाल और जांच का विषय तो यही है कि गौतम का भुगतान जय आरती ट्रेडर्स को क्यों किया गया, उसका बिल बिना सामान खरीदे कैसे लगाया गया,राशि निकली तो बन्दरबांट कहाँ तक हुई?
👉🏻 EWS आवास में चल रही दुकान, मौके से गायब
जब हमने और गहराई से पता किया तो मालूम हुआ कि जय आरती ट्रेडर्स मनरेग में मटेरियल सप्लायर बतौर वेण्डर फर्म है। उसका कार्यस्थल एमपी नगर कोरबा EWS-246/247 दर्ज है। मौके पर ऐसा कुछ नहीं दिखा और फर्म का संचालक आशीष कुमार जोगी है। मनरेगा में अनेक हितग्राहियों का पैसा डकारने की कहानी यहीं से शुरू होकर इन्हीं के बीच खत्म हो जाती है और उधर सरकार व प्रशासन की बदनामी होती है,जब हितग्राही को कार्य के बाद भी उसकी रकम नहीं मिलती। उक्त फर्म के जरिए सरकारी धन का घोटाला कई रोजगार सहायकों से मिलकर चंद मनरेगा कर्मी धड़ल्ले से कर रहे हैं।
👉🏻 यह है शिकायत
बता दें कि गौतम प्रसाद को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वर्ष 2022 के तहत पक्का फर्श कोटना निर्माण के लिए स्वीकृति मिली थी। इस काम के लिए कुल 77 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें 64 हजार रुपये सामग्री तथा 13 हजार रुपये मजदूरी के लिए निर्धारित थे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक निर्माण कार्य 2 जुलाई 2022 से 11 अगस्त 2023 के बीच कराया गया। निर्माण कार्य की देखरेख ग्राम पंचायत कथरीमाल के रोजगार सहायक धनऊ प्रसाद दिवाकर द्वारा किया गया। गौतम प्रसाद का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्हें मनरेगा के तहत 13 हजार रुपये ऑनलाइन भुगतान किया गया, लेकिन निर्माण में लगाई गई सामग्री की 64 हजार रुपये की राशि अब तक नहीं मिली है।




