कोरबा। शहर के मुड़ापार-शारदा विहार बाईपास सड़क की स्थिति आज बेहद चिंताजनक और खौफनाक हो चुकी है। कागजों और सड़क के बोर्ड पर भारी वाहनों के लिए ‘नो एंट्री’ (NO ENTRY) लागू है, लेकिन हकीकत में यहां खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और मौत के वाहन बेरोकटोक फर्राटे भर रहे हैं।
सबसे बड़ा खौफ सुबह के वक्त होता है, जब सैकड़ों मासूम बच्चे इसी रास्ते से अपने स्कूल जाते हैं। इन तेज रफ्तार और अवैध रूप से घुसे भारी वाहनों के बीच से गुजरते हुए इन बच्चों की जान हमेशा दांव पर लगी रहती है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन अनजान है; पूर्व में इसी लापरवाही के चलते यहां अनेकों अप्रिय घटनाएं और दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, फिर भी व्यवस्था कुंभकर्णी नींद में है।
अब सबसे गंभीर सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है? ‘नो एंट्री’ में भारी वाहनों को प्रवेश कराने की यह छूट और हिम्मत आखिर कहां से आ रही है?
जिले की ट्रैफिक व्यवस्था सीधे तौर पर कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) के अधीन आती है। यह सिर्फ उनकी ड्यूटी का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी प्राथमिक और नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे कोरबा जिले की यातायात व्यवस्था को सुचारू, सुरक्षित और पारदर्शी रूप से संचालित करें।
पुलिस प्रशासन को किसी और बड़े हादसे या मासूम की जान जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमारी मांग है कि इस बाईपास पर ‘नो एंट्री’ का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और नियम तोड़ने वाले वाहनों व उन्हें संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।





