👉🏻अजय जायसवाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने खदान में काम बंद कराया
👉🏻वेतन और सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान
कोरबा। SECL की गेवरा खदान में आज एक तरफ CMD का दौरा चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भू-विस्थापित श्रमिक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। छह महीने से वेतन, सुरक्षा सहित अन्य समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे श्रमिकों का आरोप है कि बार-बार हड़ताल और मांगों के बावजूद उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार श्रमिकों ने जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, जिसके बाद उनके नेतृत्व में ग्रामीणों और श्रमिकों ने खदान पहुंचकर काम बंद करा दिया।
जानकारी के अनुसार, गेवरा खदान में कार्यरत कंपनी PNC सहित अन्य कंपनियों में काम करने वाले भू-विस्थापित कर्मचारी पिछले छह महीने से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि वेतन और सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार हड़ताल की गई, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे श्रमिकों में नाराजगी लगातार बढ़ती गई।
मंगलवार को अजय जायसवाल के नेतृत्व में श्रमिकों और ग्रामीणों ने खदान पहुंचकर काम बंद कराया और हड़ताल शुरू कर दी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
👉🏻CMD के दौरे के बीच श्रमिकों का आक्रोश
इधर, गेवरा खदान में CMD का दौरा भी चर्चा में है। एक ओर प्रबंधन का शीर्ष अधिकारी खदान के दौरे पर है, तो दूसरी ओर भू-विस्थापित श्रमिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रहे हैं। अजय जायसवाल ने दौरे को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि CMD का दौरा केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। खदान में काम करने वाले श्रमिकों और भू-विस्थापितों के साथ हो रही कथित अनदेखी और शोषण की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
श्रमिकों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि बार-बार अपनी समस्याएं उठाने और आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। अब उन्होंने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है। ऐसे में CMD के दौरे के बीच गेवरा खदान में जारी यह हड़ताल प्रबंधन के लिए चुनौती बन गई है। अब देखना होगा कि प्रबंधन श्रमिकों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और आंदोलन समाप्त कराने के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।




