0 सत्यसंवाद के खुलासे के बाद परत-दर-परत उघड़ रहा फर्जी भुगतान का मामला
कोरबा-करतला। जनपद पंचायत करतला के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेहरचुआं में पक्का फर्श एवं कोटना निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की जांच जारी है। जांच दल ने ग्राम पंचायत के सरपंच/सचिव/रोजगार सहायक को जांच में उपस्थित रहने की सूचना देने के साथ 7 अगस्त को बेहरचुवा पहुंचकर पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। खुलासों ने मनरेगा में बड़ा खेल उजागर किया है।
ग्राम पंचायत बेहरचुआ में देवनाथ पिता रामसिह के नाम पर पक्का फर्श एवं कोटना निर्माण हुए बिना ही 12हजार 376 रुपये का फर्जी मजदूरी भुगतान का ही एक मामला नहीं बल्कि कई मामले उजागर हुए।
जांच दल में उदय सिंह कंवर (वरि. करा.रो.अधि.), जी.एस.मरावी (उप अभियंता), प्रफुल्ल डिक्सेना (तकनीकी सहायक) शामिल थे। बेहरचुवा की सरपंच द्रोपती राठिया, सचिव बृज सिंह खड़िया व रोजगार सहायक राजनंदिनी महंत भी उपस्थित थे। टीम के साथ मौजूद हमारे समाचार सहयोगी ने बताया कि 15 ग्रामीणों के नाम सामने आए जिनके नाम पर निर्माण स्वीकृत हुआ किंतु कार्य नहीं और सबकी राशि निकल गई। इनमें 3-4 ऐसे भी ग्रामीण मिले जिनको यही नहीं पता कि उनके नाम पर कोई फर्श व कोटना निर्माण की स्वीकृति हुई भी है।
0 ठगे गए ग्रामीणों के नाम

जिन ग्रामीणों के नाम मनरेगा से फर्श व कोटना निर्माण स्वीकृत हुआ पर, बना नहीं और रुपए निकल गए इनमें- ग्रामीण भोजराम पिता बलदेव, कृष्णकुमार पिता घनश्याम, घनश्याम पिता करिया, मुरारी पिता महेत्तर, करम सिंह पिता सावन, अजयकुमार पिता चमारराय, मोहितराम, सुभाष, कवित्रीबाई पति जीत सिंह, भारत पिता पैमासी, वीर सिंह पिता मंगल, रीना देवी पति अजय,रूपनारायण पिता दादूसिंह, नंदकिशोर सारथी पिता मनाराय, देवप्रसाद पिता समारू, गेन्दराम पिता बिसाहु और देवनाथ पिता रामसिंह का नाम शामिल है।
0 रोजगार सहायक के घर 3 कोटना,उपसरपंच के घर भी
जांच के दौरान टीम को पता चला कि शशि पिता गुहादास,गुहादास पिता सहेत्तर दास और सहेत्तर दास पिता गरीब दास, ये तीनों रोजगार सहायक राजनंदनी महंत के परिवार वाले बताए जाते हैं और इनके नाम पर भी पक्का फर्श व कोटना स्वीकृत हुआ है।
इसी तरह रीना देवी पति अजय अग्रवाल के नाम भी फर्श व कोटना निर्माण की स्वीकृति हुई है जिनमें अजय अग्रवाल वर्तमान में उपसरपंच हैं। इन सभी के नाम स्वीकृति के बाद निर्माण तो नहीं हुआ किंतु राशि निकाल कर हड़प कर ली गई है।
0 ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध रही
सूत्रों के मुताबिक जिस आपरेटर और ठेकेदार का नाम देवसिंह की राशि गबन करने के मामले में सामने आया है,उसकी भूमिका शुरू से सन्देहास्पद रही है। बताते हैं कि अवकाश दिवस में विभागीय काम का बहाना बनाकर वह ऑपरेटर जनपद सीईओ की गैर मौजूदगी में डिजिटल हस्ताक्षर (DAC) का इस्तेमाल कर बड़ी चालाकी से फर्जी आहरण करता रहा। इस सब कार्य में निश्चित ही एक अकेले ऑपरेटर की भूमिका नहीं बल्कि संगठित गिरोह की तरह कार्य हुआ है जिसके तार जिला से जुड़े हों तो कोई बड़ी बात नहीं। हालांकि,इस उजागर मामले में उक्त ऑपरेटर जिसे कि उसकी करतूतों के कारण पहले हटाया जा चुका है और वह लगभग फरारी काट रहा है,उसे ही ठेकेदार के साथ दोषी बताकर व एक मामले की राशि जमा करा कर दूसरे मामलों से ध्यान भटकाने की कोशिश हुई है। जांच सवालों के घेरे में होने के साथ इस बात को भी बल मिला है कि पंचायत व मनरेगा कार्य मे ठेका प्रथा हावी है। वहीं अब जबकि,15 मामले और सामने आ गए हैं तब देखना है कि आगामी दिनों में जांच प्रतिवेदन दिए जाने के बाद जनपद व जिला सीईओ किस तरह की कठोर कार्रवाई किस-किस पर तय करते हैं और क्या इस पूरे सुनियोजित व संगठित फर्जी आहरण के मामलों में पुलिस में अपराध दर्ज कराया जाएगा..?