0 विश्व हाथी दिवस पर शुभकामनाओं के साथ की गई अपील
कोरबा। 12 अगस्त विश्व हाथी दिवस, एक ऐसा दिन जो हमें हाथी जैसे बुद्धिमान, अद्भुत और शांत स्वभाव वाले जीवों के महत्व की याद दिलाता है। हाथी केवल वन्य जीव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और भावनात्मक धरोहर का हिस्सा हैं। हजारों वर्षों से यह मानव सभ्यता के साथ सहअस्तित्व में रहे हैं,कभी राजाओं के रथसवार, कभी धार्मिक प्रतीक, तो कभी जंगलों के मौन प्रहरी के रूप में लेकिन, आज आवास नष्ट होने, अवैध शिकार और मानव- वन्यजीव संघर्ष ने इनकी संख्या को खतरनाक रूप से घटा दिया है। जंगल सिमट रहे हैं, नदियों और घास के मैदानों पर कब्जा बढ़ रहा है, और हाथी अपने ही घर में बेघर हो रहे हैं। नतीजा भूख, भटकाव और संघर्ष।
जितेंद्र सारथी,वन्य जीव प्रेमी,वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम (नोवा नेचर) ने बताया कि हाथी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी हैं। वे ‘जंगल के इंजीनियर’ हैं पेड़-पौधों के बीज फैलाते हैं, जंगलों की संरचना बनाए रखते हैं और जल स्रोतों को सुरक्षित करते हैं। यदि हाथी नहीं रहे, तो हमारे जंगल और उनमें बसा जीवन भी कमजोर पड़ जाएगा।
हमारे सामने आज दो रास्ते हैं या तो हम हाथियों की स्थिति को नजर अंदाज कर दें और आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ तस्वीरों में इनका दर्शन कराएं, या फिर अभी से संरक्षण के ठोस कदम उठाएं। इसके लिए सरकार, वन विभाग, सामाजिक संगठनों और आम जनता, सभी की जिम्मेदारी है।
हाथियों के आवास क्षेत्र को संरक्षित और जोड़ा जाए। अवैध शिकार पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के उपाय किए जाएं। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को हाथियों के महत्व से जोड़ा जाए।
आज के दिन हम यह संकल्प लें कि हाथी केवल किताबों और स्मारकों में नहीं, बल्कि हमारे जंगलों में आज़ाद घूमते हुए दिखें। यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी विरासत होगी।