फर्जी सर्पदंश मामले में पाई गई भूमिका
👉🏻 हीरा खांडे के आपराधिक गिरोह में शामिल थे
बिलासपुर। फर्जी सर्पदंश के मामले में लगातार जांच और कार्रवाई की कड़ी में दो पुलिसकर्मियों की संलिप्तता उजागर होने पर इनकी गिरफ्तारी की गई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों सिम्स पुलिस चौकी में घटना के दरम्यान और बाद में पदस्थ रहे थे। इनमें रामकुमार पाटनवार पिता स्व. देवनारायण पाटनवार 40 वर्ष निवासी बंधवापारा सरकंडा और रामेश्वर भास्कर पिता स्व.अंजोर दास भास्कर 53 वर्ष निवासी सतनाम नगर अमेरी शामिल हैं।
ये दोनों हीरा खांडे के पूरे आपराधिक गिरोह में शामिल थे। इनका काम यह था कि जब भी कोई मृत देह सिम्स आती थी, उस समय तत्काल खांडे गिरोह के सदस्य महेन्द्र मनहर को सूचित करते थे कि एक शव आया है। इनके परिजन आए हैं, इनको मिलकर समझा दो। फिर मनहर हॉस्पिटल पहुंचकर मृतक के परिवार वालों को रुपयों और मुआवजे का लालच देकर उन्हें सर्पदंश की बात बताने के लिए तैयार कर लेता था, भले ही व्यक्ति की मौत अन्य किसी कारण से हुई हो। इस आपराधिक लालच में आकर मृतक के परिवार वाले शासन के आपदा कोष से दी जाने वाली आपदा राशि का कुछ हिस्सा पाकर इस गिरोह के कारनामे में ख़ुद शामिल हो जाते थे।
इन पुलिस कर्मचारियों को उनके इस सूचना देने और मृतक के परिवार वालों को तैयार करने में सहयोग करने के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों को न्यायालय से रिमांड पर लेकर आगामी पूछताछ की जाएगी।






