0 खदान के अंदर और बाहर ये बेखौफ, इनके मुखबिर थाने में तैनात
0 इधर पड़ोसी जिले का एक थानेदार कोयला के कारोबार में अप्रत्यक्ष संलिप्त
कोरबा। कोरबा जिले में एक बार फिर डीजल चोर सिर उठाने लगे हैं। पुलिस कप्तान की लाख मनाही और सख्ती के बावजूद कुछ दिन बिल में घुसने के बाद डीजल चोर गिरोह फिर से सक्रिय हो रहा है। इसी तरह कोयलांचल में बोरियों में भरवा कर खदान क्षेत्र से कोयला निकलवाया जा रहा है और इसे बड़ी गाड़ी में भरकर जिले की बाहरी सीमा से होते हुए पड़ोसी जिले में ले जाकर बेचा जा रहा है। मजे की बात है कि इस कारोबार में पड़ोसी जिले का एक थानेदार पर्दे के पीछे से संलिप्त है। उनके मुखबिर थाने में ही तैनात हैं और अपनी वर्दी की ईमानदारी और जमीर बेचकर कोयला व डीजल चोरों को सूचनाएं लीक करते हैं। सूचना मिलने के बाद कुछ दिन काम ठंडा रहता है और इसके बाद फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। जब महकमे के जयचंद लोग ही उनके साथ हों तो भला कप्तान की सख्ती कितना असरदार हो सकती है, इसे समझा जा सकता है। हालांकि कप्तान के एक तगड़े प्रहार ने कबाड़ का अवैध धंधा करने वालों की नाक में नकेल कस दिया है। कुछ ऐसे ही तगड़ी कार्रवाई की जरूरत डीजल और कोयला के चोरों पर भी करने की जरूरत है। बहरहाल डीजल और कोयला चोर क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस को छकाते हुए अपना काम कर रहे हैं।
पुष्ट सूत्रों की मानें तो इन दिनों शहर से लगे खदान क्षेत्र में नवीन का गैंग काफी सक्रिय है। भीतर से राजा का सपोर्ट मिलना भी शुरू हो गया है फिर परमेश्वर तो खास बन्दा है ही जो पूरा काम संभाले हुए है। हालांकि इनके काम करने के तौर-तरीके में थोड़ा बदलाव आया है और यह दिन तथा एरिया बदल-बदल कर काम कर रहे हैं। इनकी सुनियोजित कार्यशैली से थाने के कुछ वर्दीधारी बावाकिफ हैं और जब कभी भी कोई बात थानेदार या बड़े अधिकारी तक पहुंचती है और थाना से कार्रवाई करने की बात निकलती है, तो इस गैंग को सक्रिय कर दिया जाता है। इसके बाद 2-4 दिन तक कोई काम नहीं होता, फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है लेकिन तौर-तरीके थोड़े बदल दिए जाते हैं।
बताया जा रहा है कि खदान के भीतर यह गैंग कुछ ज्यादा सक्रिय है जो SECL के भारी वाहनों और मशीनों से डीजल चुरा रहे हैं। हालांकि कुछ डीजल व कोयला चोर खदान के भीतर ही इनकी नकेल कस कर कम कीमत में चोरी का डीजल अपने वाहनों में डलवाने की जुगत लगा रखी है। अब भला 100 रुपए लीटर के डीजल में लगभग आधे कीमत से 10 रुपये ज्यादा पर भीतर अगर माल बेचा जाए तो चोरों को फायदा क्या होगा ? वह तो गाहे-बगाहे अक्सर मौका देखकर हजार-2000 लीटर डीजल अलग-अलग रास्तों से खदान से बाहर पार कर ही देते हैं। वाहनों के इस्तेमाल का तरीका भी बदल दिया गया है। अब ज्यादातर कैम्पर वाहन नहीं, बल्कि सवारी गाड़ी की सीट उठाकर जरीकेन अंदर रखकर डीजल ले जाए जा रहे हैं ताकि संदेह ना हो। इनकी गाड़ियां रात के अंधेरे में शाम ढलने के बाद सड़कों पर फर्राटे भरती नजर आती हैं।
0 जलाऊ की आड़ में सैकड़ों बोरियां कोयला पार
दूसरी तरफ पाली ब्लॉक से लगे एक कोयलांचल खदान क्षेत्र में पड़ोसी जिले का एक थानेदार अप्रत्यक्ष रूप से कोयला की डीलिंग कर रहा है। सूत्र की मानें तो ग्रामीण लोगों की मदद से उनके उपयोग के लिए कोयला लेकर आने का हवाला दिलवा कर बोरी-बोरी कोयला इकट्ठा करवाने के बाद उसे भारी वाहनों में लाद कर बुड़गहन, पाली के रास्ते पड़ोसी जिले के कोयला डिपो में खपाया जा रहा है। सूत्र तो बताते हैं कि पड़ोसी जिले के इस थानेदार को उस क्षेत्र के थानेदार का साथ प्राप्त है। अभी ईंट भट्ठों का काम भी तेजी पकड़ने लगा है तो चोरी के कोयले की खपत भी बढ़ गई है। वैसे भी हाल फिलहाल में प्रदेश में उजागर हुए मामलों से इतना तो साफ हुआ है कि खाकी की आड़ में अवैध कारोबारियों को संरक्षण देने का काम जोर पड़े हुए हैं। इसमें कोयला खदान वाले क्षेत्र में आखिर कालिख लग जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। कोयला,कबाड़ और डीजल के अवैध कारोबार में कहीं ना कहीं खाकी के चंद जयचंदों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।