👉🏻 सुधार कार्य के लिए गाड़ी, पाईप-रॉड- पाना-पेंचिस,गाड़ी-मानव बल की किल्लत
कोरबा-कटघोरा। कोरबा जिले के कुछ विभागों में प्रशासनिक व्यवस्था काफी लचर है। मौजूद खामियों को दूर करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसकी वजह से जन समस्या का निराकरण न तो समय पर हो रहा है और ना ही योजना का लाभ सुचारू रूप से मिल पा रहा है। शीर्ष अधिकारी भले ही बैठकों में त्वरित निराकरण का निर्देश मातहतों को देकर सुधार का दावा करते हैं, चुनिंदा समाचार माध्यमों में सुर्खियां बनते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है।
कुछ ऐसी ही हकीकत का सामना कराने पर एक टेक्नीशियन के साथ एसडीओ की हॉट टॉक हो गई और एसडीओ ने अपने पद का रुतबा दिखाते हुए टेक्नीशियन को मां की गाली दे दी। टेक्नीशियन आहत है लेकिन छोटा कर्मचारी है इसलिए क्या करे, अधिकारी अपने पद पर है।
👉🏻 जानें क्या है घटनाक्रम
यह मामला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कटघोरा उप संभाग का है जहां सब इंजीनियर पदस्थ रहे दाऊराम बंजारे पदोन्नति हासिल कर एसडीओ बन गए हैं। यहां सब इंजीनियर अभिषेक विश्वकर्मा कार्यरत हैं। विभाग के अधीन हैंडपंप टेक्नीशियन के रूप में परमेश्वर कौशिक 2011 से कार्यरत है। उसके अधीनस्थ सात पंचायतों के 16 गांव आते हैं जहां के हैंडपंपों के बिगड़ने पर मरम्मत और सुधार का उस पर जिम्मा है। इन सात पंचायत में करीब 300 हैंडपंप कालांतर में लगवाए गए हैं। अमूमन प्रत्येक गांव में तीन से चार हैंडपंप कुछ महीनों से तो कुछ साल भर से खराब पड़े हैं। इन हैंडपंपों से निकलने वाले पानी का बड़ा सहारा स्थानीय ग्रामीणों को मिलता है। हैंडपंप बिगड़े होने के कारण ग्रामीणों को दिक्कतें हो रही हैं और वह सुधार के लिए लगातार परमेश्वर कौशिक पर दबाव डालते हैं,खरी-खोटी सुनाते हैं। इसी समस्या का समाधान करने के लिए परमेश्वर कौशिक ने एसडीओ दाऊराम बंजारे से बातचीत की। चूंकि भीषण गर्मी का मौसम है और प्रभावित गांव व पंचायतें secl की खदान से प्रभावित हैं जहां जल का स्तर गिरता जा रहा है।
👉🏻 बैठक में कहा 2 गाड़ी भेजेंगे,महीने बाद भी नहीं आई
हाल ही में अप्रैल महीने में पीएचई विभाग की बैठक कटघोरा कार्यालय में हुई थी जिसमें एसडीओ सहित सब इंजीनियर और हैंडपंप टेक्नीशियन भी उपस्थित थे। बिगड़े हैंडपंपों के सुधार में व्यवस्था की समस्या बताने पर एसडीओ द्वारा कहा गया था कि दो गाड़ी दे रहे हैं मजदूर के साथ और जहां भी हैंडपंप बिगड़े हैं सबको सुधार कराया जाए। किन्तु, इसके एक माह बीत जाने के बाद भी 25 मई तक एक एक भी गाड़ी टेक्नीशियन को प्रदान नहीं की गई जिसकी वजह से किसी भी हैंडपंप का सुधार कार्य संभव नहीं हो सका है। इधर, हैंडपंपों के बिगड़े रहने पर ग्रामीणों का गुस्सा जायज है वह टेक्नीशियन परमेश्वर कौशिक से सवाल जवाब करते हैं।
इसी सिलसिले में परमेश्वर कौशिक ने 25 मई को जब अपने सब इंजीनियर अभिषेक विश्वकर्मा को फोन लगाया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। अंततः एसडीओ बंजारे से फोन पर चर्चा की। औपचारिकता के बाद बात आगे बढ़ी और जब परमेश्वर कौशिक ने समस्या बताते हुए कहा कि गाड़ी नहीं आई है, एक महीना हो गया, रॉड नहीं है, पाइप नहीं है, पाना-पेंचिस भी नहीं है तो भला सुधार कार्य कैसे करें? गाड़ी नहीं भेजना था तो नहीं बोलना था कि भेज रहे हैं। बात होते-होते बिगड़ गई और तू-तड़ाक से होकर एकाएक भड़के एसडीओ ने टेक्नीशियन को साले बोलते हुए मां की गाली दे दी। टेक्नीशियन ने इस तरह की समस्या से जूझते हुए काम नहीं करने की बात कही और हटा देने के लिए कहा तब एसडीओ ने इतना तक कह दिया कि तुम नहीं रहोगे तो क्या पीएचई का काम रुक जाएगा! जो भी जरूरत हो कटघोरा ऑफिस जाकर ले जाओ, जो बात करना हो यहां आकर बात करो। परमेश्वर कौशिक ने मात्र 8000 रुपए मेहनताना मिलने का जिक्र करते हुए बिना मशीन, रॉड, पाइप बिना काम नहीं कर पाने की अपनी मजबूरी बताई
0 पांच मुख्यालय में बांटा है कटघोरा विकासखंड
परमेश्वर कौशिक ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा विकासखंड को पांच मुख्यालय में बांटा गया है और प्रत्येक मुख्यालय में एक मिस्त्री जिसे टेक्नीशियन भी कहा जाता है, वह रखा गया है। मुख्य मिस्त्री शिबू कुमार यादव है जिसके पैर में रॉड लगने के कारण वह इस तरह के कार्य करने में अक्षम है। बाता, कसईपाली, चाकाबुड़ा, रंजना व चारपारा को मुख्यालय तय किया गया है प्रत्येक मुख्यालय के लिए एक मिस्त्री निश्चित है और मिस्त्री को अपने हिसाब से हेल्पर की व्यवस्था खुद करनी होती है। लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि जब इस तरह की समस्या से PHE विभाग जूझ रहा है, गाड़ी नहीं है, रॉड नहीं है, पाइप नहीं है, मानव बल नहीं है,औजारों की कमी है तो शीर्ष अधिकारियों या शासन को अवगत कराते हुए इसे दूर करने का प्रयास क्यों नहीं होता? यदि चिट्ठी-पत्री लिखी जाती है तो समस्या का समाधान अब तक क्यों नहीं हो सका है? यह एक बड़ा सवाल है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद आखिर अधिकारी जिला मुख्यालय में होने वाली बैठकों में सब कुछ ओके कैसे बताते हैं…?






