👉🏻 मामला- कटघोरा विकासखण्ड का
👉🏻 जिला शिक्षा विभाग में मनमानी-कमीशनखोरी हावी
कोरबा। कोरबा जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय तो न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि छत्तीसगढ़ शासन से भी ऊपर हो गए हैं। वह सरकार द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक तबादला को भी न सिर्फ धता बता रहे हैं बल्कि हाईकोर्ट से जारी निर्देश अनुसार वरिष्ठ सचिवों की समिति द्वारा दिए गए आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की बजाय उसकी भी अवहेलना किए हैं। वे राजनीतिक संरक्षण में अपने प्रशासनिक प्रभाव का पूर्णत: दुरुपयोग कर रहे हैं। कटघोरा विकासखंड में सहायक जिला शिक्षा अधिकारी जो कि प्रभारी बीईओ के तौर पर कामकाज कर रहे थे, उनका तबादला होने के बावजूद कार्यमुक्त ना कर चार्ज संभाल चुके नए ABEO को सुचारू कामकाज करने में बाधक बन रहे हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं कि जब राजनीतिक संरक्षण पूर्ण रूप से प्राप्त हो, तो प्रशासनिक कुर्सी पर बैठा अधिकारी निरंकुश और बेलगाम हो जाता है। वह अपनी मनमानी करते हुए न सिर्फ अपनी अपने पद की गरिमा को दागदार करता है बल्कि महकमे की बदनामी की भी वजह बन जाता है। ऐसा ही कुछ काफी लंबे समय से जिला शिक्षा अधिकारी के तौर पर पदस्थ किए गए मूल रूप से प्राचार्य टीपी उपाध्याय भी कर रहे हैं। हद तो तब है, जब वह खुद को सरकार मान बैठे हैं।
शासन के शिक्षा विभाग मंत्रालय द्वारा 10 जुलाई 2025 को एक प्रशासनिक आदेश जारी कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तबादला किया गया था। इसमें कटघोरा में पदस्थ सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी अभिमन्यु टेकाम का तबादला जांजगीर-चाम्पा जिले के बम्हनीडीह किया गया और उनके स्थान पर हरिकृष्णा नायक ABEO को कटघोरा पदस्थ किया गया। इस तबादला आदेश के आधार पर नए ABEO ने कटघोरा पहुंचकर ज्वाईन कर लिया। दूसरी तरफ अभिमन्यु टेकाम ने इस तबादला आदेश को पति-पत्नी को एक ही जिले में कार्य करने देने के नियम का हवाला देते हुए स्थानांतरण नीति 2005 का उल्लंघन बताकर हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली।
👉🏻 तबादला को सही ठहराया समिति ने
हाईकोर्ट ने इस मामले को वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष रखने का निर्देश दिया और समिति को निराकरण करने आदेशित किया। समिति के समक्ष मामला आने पर विचारण उपरांत स्थानांतरण नीति 2005 का उल्लंघन नहीं माना। प्रशासनिक आधार पर किए गए तबादला को सही ठहराते हुए अभिमन्यु टेकाम के अभ्यावेदन को निरस्त कर दिया गया। इस तरह अभिमन्यु का तबादला यथावत रहा। वरिष्ठ सचिवों की समिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ तथा सदस्य सिद्धार्थ कोमल परदेशी सचिव चक्र शासन के प्रतिवेदन के आधार पर संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर द्वारा नवंबर 2025 को आदेश जारी कर अभिमन्यु के काम का आवेदन अमान्य कर दिया।
👉🏻 इसके बाद डीईओ ने गुमराह किया..!
इस तरह से अभिमन्यु टेकाम को नई पदस्थापना स्थल के लिए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्यमुक्त कर दिया जाना था लेकिन उन्होंने इस आदेश को दबाए रखा और आज तक वह कटघोरा में ही बने हुए हैं,उनका वेतन भी जारी हो रहा है। यह विभाग के शीर्ष अधिकारी की अपने पदीय कर्तव्य के प्रति घोर कदाचरण को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह भी बताता है कि उनके अधीनस्थ अधिकारी संरक्षण में निरंकुश हो गए हैं। कटघोरा खण्ड शिक्षा कार्यालय में दो-दो ABEO कार्य कर रहे हैं।
👉🏻 आवक पर फोकस, गुणवत्ता पर नहीं
बताते चलें कि कोरबा का शिक्षा विभाग काफी लंबे समय से भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। यहां शैक्षणिक अव्यवस्थाओं और कमियों में सुधार पर कम, पैसा किस तरह से आएगा इस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। चाहे वह सहायक शिक्षकों के प्रधान पाठक पदोन्नति का मामला हो या फिर शिक्षा विभाग में सामानों की खरीदी, शिक्षकों की मनचाहे स्थान पर पोस्टिंग का मामला हो या निलंबन- बहाली के खेल सहित शिक्षा विभाग से जुड़ा कोई अन्य विषय हो, जो जैसा चढ़ावा दे रहा है उसका वैसा काम हो रहा है। विभाग के ही एक सजातीय शिक्षक टीपी उपाध्याय के लिए मध्यस्थ का काम कर रहे हैं। जो भी चढ़ावा देना हो या जो भी काम कराना हो, उन महराज को पकड़ लीजिए, प्रभारी अधिकारी उनके आधार पर सारा काम तय करते आ रहे हैं।





