👉🏻 ब्रिटिश शासन से जमींदारी और पृथक जिला तक विकास का साक्षी कोतवाली (चौकी से स्वतंत्र थाना)
कोरबा। सिटी कोतवाली परिसर में निर्मित नवीन थाना भवन का लोकार्पण एवं ई-मालखाना का उद्घाटन गुरुवार 24 सितम्बर को होने जा रहा है। दोपहर 2 बजे कोरबा विधायक व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन के द्वारा नवीन थाना भवन का वर्चुअल लोकार्पण किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग का कोरबा प्रवास सम्भावित है। जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में सारी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।
👉🏻 कोतवाली का प्रभार लेते ही प्रेमचन्द की पहली प्राथमिकता
हाल ही में किए गए पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के तबादला से प्रभावित होकर सिटी कोतवाली में पदस्थ किए गए थाना प्रभारी एसआई प्रेमचंद साहू ने अपनी पदस्थापना के दूसरे ही दिन से निर्माणाधीन नवीन थाना भवन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने संबंधित ठेकेदार से संपर्क कर शेष कार्यों को द्रुत गति से पूर्ण करने के संबंध में चर्चा की और आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया। शासन द्वारा नई तकनीकियों पर आधारित सुरक्षा संसाधनों और जप्त सामग्रियों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिसके लिए ई-मालखाना की नितांत आवश्यकता है। पुराना थाना भवन में पुरानी पद्धति से ही माल खाना चला आ रहा है। अपग्रेडेशन के दौर में नए भवन में ई-मालखाना के लिए विस्तारित व्यवस्था तय की गई है। थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू के द्वारा पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में नवीन थाना भवन के शेष कार्यों को पूर्ण कराते हुए लोकार्पण के अंजाम तक पहुंचाया गया। कोतवाली स्टाफ सहित पुलिस महकमे में यह हर्ष का भी विषय है। इस कोतवाली थाना में ही जिले के अनेक पुराने सेवानिवृत हो चुके पुलिस अधिकारियो/ कर्मियों ने लंबे समय तक अपनी सेवाएं प्रदान की। उनके लिए भी यह गौरवशाली क्षण होगा, जब नया भवन लोकार्पित होगा।
👉🏻 कोरबा के विकास में कदम ताल, पुरातन से नवीनतम की ओर
कोतवाली थाना परिसर में एक पुराना खंडहर खपरैल भवन सामने ही नजर आता है। यह अंग्रेजों के जमाने में स्थापित थाना भवन था। बाद में वर्तमान कोतवाली का थाना भवन निर्मित कराया गया और इसके बाद नवीन थाना भवन उद्घाटित होने जा रहा है।
जब जिज्ञासावश हमने कुछ जानकारियां तकनीकी मदद से जुटाईं तो ज्ञात हुआ कि- 25 मई 1998 को पृथक कोरबा जिला गठन से वर्षों पहले, जब कोरबा एक छोटा कस्बा और जमींदारी क्षेत्र हुआ करता था, तब यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था कोरबा जमींदारी की रानी धनराज कुंवर देवी और अंतिम जमींदार श्री रुद्रशरण प्रताप सिंह के अधीन थी। उस दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों और जमींदार के सुरक्षाकर्मियों की मदद ली जाती थी।
तब ब्रिटिश शासन और बिलासपुर जिले का हिस्सा (1861 का प्रशासनिक बदलाव) महत्वपूर्ण रहा, जब अंग्रेजों ने 1861 में मध्य प्रांत (Central Provinces) के तहत बिलासपुर जिले का गठन किया। उस वक्त कोरबा क्षेत्र को बिलासपुर के प्रशासनिक दायरे में शामिल कर लिया गया। अंग्रेजों के समय ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस चौकियां और थाने बनाए जा रहे थे। इसी कड़ी में ब्रिटिश काल के दौरान ही कोरबा के इस पुराने क्षेत्र (वर्तमान पुरानी बस्ती) में पुलिस की शुरुआती चौकी स्थापित की गई, जो बाद में पूर्ण थाने के रूप में विकसित हुई।
👉🏻 औद्योगिक क्रांति और थाने का विस्तार
(1950 से 1980 का दशक) कोरबा को औद्योगिक केंद्र बनाने में अहम रहा। 1950 और 1960 के दशक में भारत एल्युमिनियम कंपनी,बालको की स्थापना और WCL/SECL के कोयला खदानों के खुलने से इस छोटे से कस्बे में आबादी तेजी से बढ़ी। बढ़ती आबादी और मजदूरों के आगमन के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुरानी बस्ती में स्थित इस थाने (तत्कालीन चौकी) को और अधिक संसाधन तथा पुलिस बल दिया गया। 1998 से पहले तक पूरे कोरबा शहरी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी (चाम्पा जिले की सीमा तक) इसी अकेले मुख्य कोतवाली थाना पर हुआ करती थी।
इसे सिटी कोतवाली का दर्जा 25 मई 1998 को मिला जब बिलासपुर से अलग होकर कोरबा एक नया जिला बना, तब जिला मुख्यालय के इस मुख्य थाने को आधिकारिक तौर पर अपग्रेड करके ‘सिटी कोतवाली’ का नाम दिया गया। इसके बाद यहां पदस्थ रहने वाले थाना प्रभारियों में से खासकर सुभाष सिंह, विवेक शर्मा, दुर्गेश शर्मा आदि ने भवन का अपडेशन कराया।




