0 शासन के निर्देशों के बाद भी नहीं रुकी ‘प्रॉक्सी व्यवस्था’,
0 छुरीकला नगर पंचायत को लेकर फिर उठी शिकायत, महिला अध्यक्ष की जगह पति के बैठकों और निर्णयों में शामिल होने का आरोप; शासन पहले ही जारी कर चुका है सख्त निर्देश
कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कार्यों में पति, पिता, पुत्र अथवा अन्य करीबी रिश्तेदारों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई नगरीय निकायों में यह व्यवस्था अब भी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। कोरबा जिले की छुरीकला नगर पंचायत का मामला एक बार फिर इस बहस को सामने ले आया है।
नगर पंचायत छुरीकला को लेकर राज्य शासन के अपर सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला अध्यक्ष के अधिकारों और दायित्वों का निर्वहन व्यवहारिक रूप से उनके पति द्वारा किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अध्यक्ष के पति नगर पंचायत के कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं, बैठकों में शामिल होते हैं तथा प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। इतना ही नहीं, मुख्य नगरपालिका अधिकारी भी कई मामलों में निर्वाचित अध्यक्ष के बजाय उनके पति से समन्वय करते हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शासन द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी पत्र क्रमांक VIGI-2904/2/2025-UAD के स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने शासन से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान के बाद सभी नगर निगम आयुक्तों तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे कि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार या नातेदार किसी भी रूप में प्रॉक्सी प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में कार्य नहीं करेंगे। शासन ने स्पष्ट किया था कि ऐसी व्यवस्था महिलाओं को मिले संवैधानिक अधिकारों और महिला आरक्षण के उद्देश्य के विपरीत है।
निर्देशों में कहा गया था कि यदि किसी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की जगह उनके पति, पिता, पुत्र या अन्य रिश्तेदार प्रशासनिक बैठकों में भाग लेते हैं अथवा निर्णयों को प्रभावित करते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद छुरीकला जैसे मामलों से यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि शासन के आदेश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल शासन के निर्देशों की अवहेलना ही नहीं बल्कि महिला जनप्रतिनिधियों को मिले लोकतांत्रिक अधिकारों और उनकी स्वतंत्र भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न माना जाएगा।
0 क्या है शासन का उद्देश्य?
सरकार का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल महिलाओं को निर्वाचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान करने का अवसर देना है। इसलिए किसी भी प्रकार की ‘प्रॉक्सी व्यवस्था’ को समाप्त करना शासन की प्राथमिकता बताई गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि छुरीकला की शिकायत पर शासन क्या कार्रवाई करता है और क्या अन्य नगरीय निकायों में भी ऐसे मामलों की जांच कराई जाती है?







