कोरबा-बालकोनगर। देश के महापुरुषों, महान हस्तियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति प्रत्येक पीढ़ी में बनाए रखने के लिए और उनके सम्मान में चौक-चौराहों, भवनों व अन्य सार्वजनिक स्थलों का नामकरण के साथ उनकी मूर्तियों की स्थापना के साथ नामकरण की गई है। स्थापना के बाद अनेक चौक-चौराहा का जहां नाम पूर्ण रूप से प्रचलन में नहीं लाया जा रहा है तो दूसरी तरफ लगाने के बाद प्रतिमाएं उपेक्षा का शिकार हो रही हैं।
इनमें से एक चंद्रशेखर आजाद भी हैं जिनकी आदमकद मूर्ति बालको के परसा भाठा चौक पर स्थापित की गई है। इस चौक का नामकरण चंद्रशेखर आजाद चौक के नाम पर किया गया है लेकिन सामान्य बोलचाल के साथ-साथ प्रचलन में आज भी इसे परसाभाटा चौक के नाम से ही जाना और पहचाना जा रहा है, जबकि चंद्रशेखर आजाद चौक का उपयोग होना चाहिए।

दूसरी तरफ आजाद की यह प्रतिमा अतिक्रमण की कैद में नजर आती है। आजादी के मतवाले चंद्रशेखर आजाद चौक का कायाकल्प करना तो दूर यहां साल में सिर्फ एक-दो बार ही जनप्रतिनिधियों के कदम पड़ते हैं जब उनकी जयंती और पुण्यतिथि का अवसर आता है। इसके बाद राष्ट्रीय त्योहार तक में भी यहां किसी की पहुंच नहीं हो पाती है। चौक के अंदर जहां टूट-फूट हो रही है वहीं बाहर चारों तरफ ठेला और गुमटियों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। आजाद की मूर्ति की ओर जाने वाले मुख्य द्वार के सामने जल जमाव होने से गंदगी बजबजाती रहती है। इसके अलावा साफ-सफाई का अभाव नजर आता है।
आवश्यकता है कि जब महापुरुष की प्रतिमा लगाई गई है तो यहां उनके सम्मानस्वरूप साफ-सफाई और अतिक्रमण मुक्त वातावरण होना चाहिए। यदि रोजी-रोटी के लिए व्यवस्था करना ही है तो व्यवस्थित दुकान बनाकर की जा सकती है किंतु वर्तमान में जिस तरह से यहां का नजारा नजर आता है, सम्मान कम अपमान ज्यादा महसूस हो रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भी अनदेखी पूरी तरह से इसके लिए जिम्मेदार कही जा सकती है।