👉🏻 6 दिनों तक कोई भी सुध लेने पंडाल नहीं पहुंचा
👉🏻 परियोजना प्रशासक NHAI के द्वारा आमरण अनशन समाप्त कराया गया
👉🏻 गम्भीर आरोप- टोल प्लाजा में ओव्हरलोड वाहनों से अवैध वसूली,सरकार से चोरी
👉🏻 मुआवजा में करोड़ों-अरबों का घोटाला की जांच कराए सरकार
कोरबा। प्रेमचंद पांडेय, पूर्व सैनिक (कारगिल योद्धा) ने एनएचएआई टोल संचालक विनोद कुमार जैन के द्वारा सर्कुलर के विरुद्ध जाकर करोड़ों रुपए का ठगी का जिक्र करते हुए व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित जिला प्रशासन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी से की गई शिकायत में इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। 9 दिसंबर से प्रारंभ आमरण अनशन को आज NHAI के अधिकारी द्वारा प्रेमचंद पांडेय को जूस पिलाकर समाप्त करवाया गया। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।

प्रेमचंद पांडेय ने केंद्र सरकार को लिखे अपने पत्र में बताया कि 9 दिसंबर से हुए वे अनशन पर बैठे हैं लेकिन ना तो उनका सुध लेने और ना ही किसी तरह का मेडिकल चेकअप करने के लिए कोई भी स्वास्थ्य टीम, प्रशासनिक अधिकारी उन तक नहीं पहुंचे जो यह बताता है कि पूर्व सैनिकों के प्रति कितना सम्मान प्रशासन के लोगों में है।
👉🏻अधिकारों से वंचित किए जा रहे भूतपूर्व सैनिक
उन्होंने कहा कि इसी तरह सेवानिवृत्त सैनिकों को अधिकारों जो वंचित किया गया है एवं अरबपतियों को टोल का संचालन कार्य दिया जाता है, इसको समाप्त करते हुए पुन: सैनिकों के अधिकार के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग में संचालित हो रहे टोल नाका में संचालन का कार्य उन्हें दिया जाए। सर्कुलर के हिसाब से पूर्व सैनिकों को मेन पावर, गनमैन में रखा जाये। स्थानीय लोगों को सर्कुलर के हिसाब से जो मानदेय प्रावधानित किया गया है उसे दिलाया जाए। ओव्हरलोड वाहनों से अवैध वसूली कर शासन को न देते हुए राजस्व नुकसान पहुंचाया जा रहा है। भूमि अर्जन में करोड़ों का मुआवजा भ्रष्टाचार किया गया है। इन सब शिकायत की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराया जाए। NHAI के परियोजना अधिकारी कोरबा डी.डी. परलावर ने रविवार को आमरण अनशन स्थल पर पहुंचकर प्रेमचंद पांडेय को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायत को केंद्रीय कार्यालय एवं उच्च अधिकारियों को कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जाएगा। आश्वासन पर नारियल पानी एवं जूस पिलाकर आमरण अनशन समाप्त किया गया।
👉🏻 इस बात पर दुःख जताया, इसके लिए आभार
प्रेमचंद पांडे ने आमरण अनशन समाप्त करने की बात पर कहा कि मैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध आमरण अनशन पर 6 दिनों से भूखे-प्यासे बैठा था, जिला प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी गई थी लेकिन बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि जिला प्रशासन कोरबा का कोई भी अधिकारी मेरा हाल-चाल जानने तक के लिए मेरे पास नहीं आए और चिकित्सा अधिकारी ने भी कोई सुध नहीं लिया। इससे पता चलता है कि देश के जवान एवं पूर्व सैनिकों के प्रति जिला प्रशासन कितना संवेदनशील है। परियोजना अधिकारी के आश्वासन पर मैं कोरबा जिले में अमरण अनसन समाप्त किया हूं लेकिन अब मैं अपना आमरण अनशन दिल्ली में करूंगा क्योंकि कोरबा जिला प्रशासन के पास हमारी समस्या सुनने के लिए समय नहीं है, यह साबित हो चुका है। उन्होंने मीडिया एवं शुभचिंतकों सहित कोरबा परियोजना अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग को धन्यवाद दिया है।




